सामाजिक, छात्र और राजनीतिक संगठनों ने कहा — बिहार की द्वितीय राजभाषा के साथ हो रहा अन्याय, मांग नहीं मानी गई तो होगा लोकतांत्रिक आंदोलन
मधेपुरा/बिहार : मधेपुरा में आज जिला अधिकारी के माध्यम से बिहार के मुख्यमंत्री को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर राज्य के 208 प्रखंडों में नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल करने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में कहा गया कि बिहार की द्वितीय राजभाषा उर्दू को नए डिग्री कॉलेजों में स्थान नहीं दिया जाना भाषाई विविधता और संवैधानिक मूल्यों की उपेक्षा है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विभिन्न सामाजिक, छात्र एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक पहचान का हिस्सा है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों में इसकी अनदेखी करना लाखों उर्दू भाषी विद्यार्थियों के अधिकारों से समझौता करने जैसा है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य सरकार को शिक्षा में समावेशन और समान अवसर की भावना को मजबूत करते हुए उर्दू विषय को अविलंब डिग्री कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके।
इस मौके पर भीम आर्मी के प्रदेश प्रधान महासचिव अबुजर खान, इंडियन यूथ कांग्रेस के सौरव कुमार, बीएनएमयू अध्यक्ष अरमान आलम, पीएचडी छात्र इम्तियाज रहमानी, एआईएसए के एजाज़ अख्तर, एआईएसएफ के प्रभाष कुमार, एआईएसए जिला उपाध्यक्ष राजकिशोर कुमार समेत कई प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की कि उर्दू भाषा के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।

