मधेपुरा (बिहार) : जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गम्हरिया निवासी समाजसेवी अरुण कुमार ने JNKTMCH मधेपुरा प्रशासन तथा 102 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को “भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की भेंट चढ़ी व्यवस्था” करार दिया है।
प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में मरीजों को राहत पहुंचाने वाली 102 एंबुलेंस सेवा अब खुद सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जब बेहतर इलाज के लिए IGIMS, PMCH, AIIMS पटना अथवा DMCH रेफर किया जाता है, तब मरीजों के परिजनों को एंबुलेंस के लिए घंटों नहीं बल्कि कई बार दो-दो दिनों तक भटकना पड़ता है।अरुण कुमार ने आरोप लगाया कि 102 सहायता सेवा, अस्पताल नियंत्रण कक्ष और एंबुलेंस चालक के बीच मिलीभगत से मरीजों का शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि एंबुलेंस चालक मरीजों के परिजनों से दो हजार से पांच हजार रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं। आरोप है कि जो परिजन चालक की मांग पूरी कर देते हैं, उन्हें तुरंत एंबुलेंस उपलब्ध करा दी जाती है, जबकि पैसे नहीं देने वालों को लगातार इंतजार कराया जाता है।उन्होंने कहा कि कई बार मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद परिजनों को “थोड़ी देर में एंबुलेंस पहुंच रही है” कहकर घंटों गुमराह किया जाता है। इस दौरान मरीज की जान तक खतरे में पड़ जाती है।
समाजसेवी ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कुछ चालक अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और कार्रवाई से बेखौफ नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि गरीब और असहाय मरीज सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग मौन बना हुआ है।अरुण कुमार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी कर्मियों एवं चालकों पर कठोर कार्रवाई करने तथा 102 एंबुलेंस सेवा को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आम लोगों के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।

