किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ किसान सभा व एटक ने एनएच-107 किया जाम
मधेपुरा/बिहार : केंद्र सरकार की कथित किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर सोमवार को बिहार राज्य किसान सभा एवं ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के बैनर तले किसानों और मजदूरों ने सहरसा–पूर्णिया मुख्य मार्ग एनएच-107 को बुधमा के समीप जाम कर रोषपूर्ण प्रदर्शन किया।
इस दौरान आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और किसान-मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। कार्यक्रम का नेतृत्व किसान सभा के जिला अध्यक्ष रमण कुमार, जिला सचिव मुकुंद प्रसाद यादव, किसान नेता शैलेंद्र कुमार एवं एटक के जिला संयोजक वीरेंद्र नारायण सिंह ने किया।
केंद्र सरकार पर लगाया कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने केंद्र सरकार पर किसानों और मजदूरों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों और मजदूरों की नहीं, बल्कि कंपनियों के हित में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। किसानों को उनकी फसलों का उचित एमएसपी नहीं मिल रहा है, जबकि कॉरपोरेट कंपनियों के कर्ज माफ किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा का भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। खेती लगातार अलाभकारी होती जा रही है, जिसके कारण किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं।
प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड लागू करना तथा मनरेगा को समाप्त कर वीबी-जी राम जी योजना लाने का प्रयास मजदूरों के अधिकारों पर हमला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों और मजदूरों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मनरेगा की बहाली और किसानों की कर्जमाफी की मांग
सीपीआई के जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने कहा कि मनरेगा की पुनर्बहाली, किसानों की कर्जमाफी और चार लेबर कोड की वापसी सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
किसान सभा राज्य परिषद के सदस्य रमेश कुमार शर्मा, जिला अध्यक्ष रमण कुमार, जिला सचिव मुकुंद प्रसाद यादव एवं किसान नेता शैलेंद्र कुमार ने कहा कि यह देश किसानों का है और किसानों की तबाही व बर्बादी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खेती और किसान दोनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। नेताओं ने “खेती बचाओ, गांव बचाओ, देश बचाओ” के नारे के साथ किसान-मजदूर आंदोलन को और व्यापक बनाने का आह्वान किया।
60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों-मजदूरों को पेंशन देने की मांग
किसान नेता अनिल भारती, शैलेंद्र कुमार सुमन एवं मोहम्मद जहांगीर ने कहा कि सांसदों और विधायकों को पेंशन मिलती है, लेकिन कठोर मेहनत कर देश के लोगों का पेट भरने वाले अन्नदाता किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों और मजदूरों कों 10 हजार रुपये मासिक पेंशन** देने की मांग की।
प्रदर्शन में किसान नेता मोहम्मद सिराज, रामसेवक यादव, मुंशी आलम, युवा नेता शंभू क्रांति, छात्र नेता वसीमउद्दीन उर्फ नन्हें, मजदूर नेता माधो राम, लालू यादव, राजेश कुमार, उमेश मेहता, मोहम्मद साहब, हीरालाल यादव, मोहम्मद मुस्तकीम, नागो ऋषिदेव, मोहम्मद मुस्लिम, मोहम्मद इम्तियाज, दिलराज सहित बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए।

