प्रतिमा स्थल के रखरखाव पर उठे सवाल, राजकीय जयंती के बाद उपेक्षा का आरोप
मधेपुरा/बिहार : जिला मुख्यालय के पुराने बस स्टैंड के समीप स्थित मंडल आयोग के अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी. मंडल की प्रतिमा स्थल की बदहाल स्थिति को लेकर पूर्व छात्र नेता डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौर ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे जिले के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रतिमा स्थल के समुचित रखरखाव एवं सौंदर्यीकरण की मांग की है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. राठौर ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस बी.पी. मंडल के नेतृत्व में गठित मंडल आयोग ने देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को व्यापक रूप से प्रभावित किया, उसी महान व्यक्तित्व को उनके गृह जिले में अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में उनकी प्रतिमाओं का सम्मानपूर्वक संरक्षण किया जाता है, जबकि मधेपुरा स्थित प्रतिमा स्थल उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिमा स्थल के मुख्य द्वार पर कंबल, साड़ियां और अन्य सामान टांगे रहते हैं, प्रतिमा पर महीनों पहले चढ़ाई गई मालाएं सूखकर खराब हो जाने के बावजूद नहीं हटाई जातीं, परिसर में गिरे एवं टूटे पेड़ों को समय पर नहीं हटाया जाता तथा पूरे परिसर के रखरखाव और सौंदर्यीकरण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार इससे स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है।
रखरखाव को लेकर प्रशासन और नगर परिषद पर उठाए सवाल : डॉ. राठौर ने कहा कि प्रतिमा स्थल की उपेक्षा के लिए जिला प्रशासन एवं नगर परिषद की उदासीनता जिम्मेदार प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि यह स्थल जिला पदाधिकारी कार्यालय एवं नगर परिषद कार्यालय से लगभग सौ मीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए इसकी नियमित देखरेख सुनिश्चित करना संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
केवल जयंती पर याद किए जाते हैं बी.पी. मंडल : पूर्व छात्र नेता ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी स्व. रासबिहारी मंडल के सुपुत्र तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी. मंडल इस क्षेत्र की गौरवशाली पहचान हैं। उनका कहना है कि उन्हें प्रायः केवल उनकी राजकीय जयंती के अवसर पर ही याद किया जाता है, जबकि वर्षभर प्रतिमा स्थल की स्थिति उपेक्षित बनी रहती है।
उन्होंने जिला प्रशासन एवं नगर परिषद से मांग की कि बी.पी. मंडल प्रतिमा स्थल के नियमित रखरखाव, साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण एवं संरक्षण के लिए शीघ्र ठोस पहल की जाए, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा और सम्मान बरकरार रह सके।

