मधेपुरा/बिहार (प्रेस विज्ञप्ति) : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), मधेपुरा इकाई के विभाग संयोजक नवनीत सम्राट ने सोनाय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भान-टेकठी (घैलाढ़) के शिक्षक मुकेश कुमार से जुड़े प्रकरण को गंभीर बताते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। परिषद ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच कराने तथा जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में शिक्षक की पुनः पदस्थापना सुनिश्चित करने की मांग की है।
ज्ञापन के माध्यम से एबीवीपी ने कहा कि यदि किसी शिक्षक के विरुद्ध कोई शिकायत या आरोप प्राप्त हुआ है तो उसकी जांच पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए। परिषद का कहना है कि बिना पर्याप्त साक्ष्य किसी भी शिक्षक को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना या उनके सम्मान को ठेस पहुंचाना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।
विभाग संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को व्यक्तिगत द्वेष, गुटबाजी अथवा राजनीति का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता। उनके अनुसार मुकेश कुमार एक कर्मठ, ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक हैं, जिन्होंने विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य किया है। उन्होंने दावा किया कि विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच भी शिक्षक की सकारात्मक छवि रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार जिला शिक्षा पदाधिकारी (स्थापना शाखा) के निर्देश पर 8 जुलाई 2026 को विद्यालय का प्रभार विधिवत हस्तांतरित किया जा चुका था। इसके बावजूद शिक्षक को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि यदि किसी प्रकार का आरोप है तो उसकी निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए और जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एबीवीपी ने कहा कि परिषद सदैव शिक्षा, विद्यार्थियों के हित और न्यायपूर्ण व्यवस्था के पक्ष में खड़ी रही है तथा किसी भी प्रकार के अन्याय, पक्षपात या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का विरोध करती है। परिषद का मानना है कि योग्य एवं ईमानदार शिक्षकों का मनोबल कमजोर होने से विद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
परिषद ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि जांच में शिक्षक के विरुद्ध कोई ठोस एवं प्रमाणित आरोप सिद्ध नहीं होता है तो उन्हें अविलंब पुनः पदस्थापित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण सामान्य बना रहे। साथ ही भविष्य में उन्हें किसी भी प्रकार की अनावश्यक प्रताड़ना से बचाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने की भी मांग की गई।
नगर मंत्री अंकित कुमार ने कहा कि एबीवीपी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, न्याय और जवाबदेही की पक्षधर है तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के हितों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जिला प्रशासन निष्पक्षता एवं न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए मामले में शीघ्र उचित निर्णय लेगा, जिससे शिक्षकों का सम्मान और विद्यार्थियों के हित दोनों सुरक्षित रह सकें।

