आजाद पुस्तकालय कतराहा के बैनर तले ‘हिंदी पत्रकारिता : कल, आज और कल’ विषय पर परिचर्चा आयोजित
पत्रकारिता में उचित-अनुचित का विवेक और न्यूज-व्यूज का अंतर बनाए रखना जरूरी
डिजिटल मीडिया के दौर में पत्रकारों की जिम्मेदारी बढ़ी
मधेपुरा/बिहार : आजाद पुस्तकालय, कतराहा के बैनर तले हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को सार्क इंटरनेशनल स्कूल परिसर में ‘मधेपुरा जिला स्थापनाोत्सव’ के विशेष कार्यक्रमों की कड़ी में ‘हिंदी पत्रकारिता : कल, आज और कल’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया से जुड़े प्रमुख पत्रकारों एवं शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया और पत्रकारिता की बदलती भूमिका, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर खुलकर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्ज्वलन तथा मधेपुरा के महापुरुषों की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।अध्यक्षीय संबोधन में मानविकी संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। एक दौर था जब पत्रकारिता साहित्य का अभिन्न अंग हुआ करती थी और सुधी साहित्यकार ही पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ पत्रकारिता के स्वरूप और कार्यशैली में व्यापक बदलाव आया है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज समाज के लगभग सभी क्षेत्रों में नैतिक गिरावट देखने को मिल रही है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद पत्रकारिता में उम्मीद की किरण अभी भी मौजूद है।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अमिताभ कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। कल भी चुनौतियां थीं, आज भी हैं और आने वाले समय में भी रहेंगी। जरूरत इस बात की है कि पत्रकार इन चुनौतियों के बीच सही रास्ता तलाशें। उन्होंने पत्रकारों से आत्ममूल्यांकन करने और पत्रकारिता की आचार संहिता का ईमानदारी से पालन करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि डिजिटल पत्रकारिता के दौर में मीडिया की जिम्मेदारी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ गई है।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि पत्रकारिता कभी मिशन हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ इसके व्यवसायीकरण की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य से दूर होती गई तो आने वाले समय में चुनौतियां और गंभीर होंगी। पत्रकारिता को जनहित और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
विशिष्ट अतिथि वरीय पत्रकार राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारिता एक गंभीर और जिम्मेदारी भरा कार्य है। इसे व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति अथवा लोगों को किसी भी तरह प्रभावित करने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। पत्रकार का दायित्व समाज के सामने तथ्य और सत्य को निष्पक्षता से प्रस्तुत करना है।
विषय प्रवेश करते हुए वरीय पत्रकार मनीष वत्स ने कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उदंडता में बदल जाना चिंता का विषय है। आज कई बार न्यूज से अधिक व्यूज हासिल करने की होड़ दिखाई देती है, जो पत्रकारिता के मूल चरित्र और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि न्यूज और व्यूज को अलग-अलग रखना पत्रकारिता की विश्वसनीयता के लिए बेहद जरूरी है।परिचर्चा में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पत्रकारिता का पहला चरण उचित और अनुचित के बीच अंतर करने का विवेक है। वहीं, ब्रेकिंग न्यूज की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा गया कि खबर ऐसी होनी चाहिए जो समाज को तोड़ने के बजाय जोड़ने का काम करे। सनसनी और तात्कालिक लोकप्रियता की बजाय तथ्यपरकता, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकार पत्रकारिता का आधार होना चाहिए।
कार्यक्रम को समाजशास्त्री डॉ. आलोक कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सारंग तनय, पत्रकार तुरबसु और प्रशांत कुमार ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली अतीत को रेखांकित करते हुए वर्तमान की दशा और दिशा पर चर्चा की तथा भविष्य की चुनौतियों को सामने रखा।
कार्यक्रम का संचालन आजाद पुस्तकालय, कतराहा के सचिव डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम के समापन पर आजाद पुस्तकालय की ओर से किट, स्मारिका और पुस्तक भेंट कर उपस्थित पत्रकारों को सम्मानित किया गया।
मौके पर कार्यक्रम के सह-संयोजक युवा पत्रकार अमित अंशु, असिस्टेंट प्रोफेसर प्रसन्ना सिंह राठौर, मनीष कुमार, सुनीत साना, मिराज आलम, गणेश सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

