खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी का आरोप, खेल अवसंरचना निर्माण से पहले विशेषज्ञों और खिलाड़ियों से परामर्श लेने की मांग
सहरसा/बिहार : सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल एवं क्रिकेट मैदान के स्थान पर तीरंदाजी मैदान और अन्य खेल अवसंरचनाओं के निर्माण की योजना को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों एवं खेल प्रेमियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सहरसा सहित पूरे कोशी प्रमंडल में एथलेटिक्स, फुटबॉल, क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, कराटे, कुश्ती, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे खेलों की मजबूत परंपरा रही है। क्षेत्र के सैकड़ों खिलाड़ियों ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले और प्रमंडल का नाम रोशन किया है। ऐसे में उन खेलों की मूलभूत आवश्यकताओं को दरकिनार कर अन्य खेलों को प्राथमिकता देना खिलाड़ियों की भावनाओं के विपरीत है।
मोर्चा ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि जिला प्रशासन द्वारा 1 अप्रैल 2026 से एथलेटिक्स बालिका एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र का संचालन शुरू किया गया है, जहां वर्तमान में 30 बालिकाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इसके अलावा 26 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन द्वारा लगभग 40 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया गया था। ऐसे में एथलेटिक्स प्रशिक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद एथलेटिक्स ट्रैक की योजना को समाप्त कर तीरंदाजी मैदान विकसित करने का निर्णय खेल विकास की दृष्टि से उचित प्रतीत नहीं होता।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि सहरसा एवं कोशी क्षेत्र में तीरंदाजी खेल का न तो व्यापक आधार है और न ही इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध है। इसके विपरीत एथलेटिक्स, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ी वर्षों से बेहतर खेल मैदान और आधुनिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।मोर्चा ने यह भी चिंता जताई कि स्टेडियम परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों के कारण क्रिकेट, कबड्डी, वॉलीबॉल, हैंडबॉल एवं वुशु जैसे खेलों का नियमित अभ्यास प्रभावित हो रहा है। लगभग 300 खिलाड़ी पर्याप्त स्थान के अभाव में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जिससे उनके प्रदर्शन और तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि सहरसा स्टेडियम परिसर में पहले से कारू खिरहर इंडोर स्टेडियम, खेल भवन, बैडमिंटन एवं टेबल टेनिस हॉल, कुश्ती एवं कबड्डी प्रशिक्षण केंद्र, जिम तथा जिला खेल पदाधिकारी कार्यालय जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद खुले खेल मैदानों के विकास को प्राथमिकता नहीं दिया जाना खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है।
नागरिक संघर्ष मोर्चा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान एवं क्रिकेट मैदान का निर्माण शीघ्र कराया जाए। साथ ही स्टेडियम के पूर्वी हिस्से को अतिक्रमण मुक्त कर खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए उपलब्ध कराया जाए तथा भविष्य में किसी भी खेल अवसंरचना परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले खिलाड़ियों, खेल संघों एवं खेल विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श सुनिश्चित किया जाए।
मोर्चा ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन खेल और खिलाड़ियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे सहरसा और कोशी प्रमंडल की खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सके और क्षेत्र की खेल पहचान और अधिक मजबूत हो सके।जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपने वाले शिष्टमंडल में मनीष कुमार, सागर सिंह ‘नन्हे’, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ताबिश मेहर, धीरज सम्राट, शंकर शशी एवं प्रिंस कुमार सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

