बदहाली : जर्जर सामुदायिक भवन में चलता है बुधमा ओपी, बारिश में छत से टपकता है पानी

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मधेपुरा/बिहार : जिले के उदाकिशुनगंज अंतर्गत बुधमा ओपी पिछले 15 वर्षों से सामुदायिक भवन में संचालित है, जिसकी हालत काफी जर्जर हो गई है, हालात यह है बुधमा ओपी की जर्जर छत अब टूटने लगी है और बारिश में छत से पानी टपकता है, जिसको देख कर इनकार नहीं किया जा सकता है कि यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा पेश आ सकता है। यहाँ के पुलिस अधिकारी व कर्मचारी दूसरों की सुरक्षा की गारंटी तो दे रहे हैं, लेकिन खुद असुरक्षित हैं।

अनुमंडल के बुधमा, मंजौरा और फुलौत ओपी सहित कई ऐसे ओपी है, जहँ पुलिसकर्मी के रहने व हथियार सुरक्षित रखने की कोई पर्याप्त व्यवस्था नही है । किसी तरह सिर छुपा कर जिन्दगी गुजारने पर मजबूर है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना आम बात है। जिस वजह से यहाँ कार्यरत पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मी, रात को सही से सो नहीं पाते हैं, टपकते पानी से कागजात खराब हो जाते है। रात को बगैर सोये, सुबह उठकर अपने ड्यूटी पर लग जाते है, इस हालत में ड्यूटी करना अपनी नौकरी गंवाने के बराबर है। यहाँ के पुलिस कर्मी हमेशा डरे सहमे रहते हैं, अगर कोई वरीय पदाधिकारी उनको झपकी लेते देख ले तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।

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ओपी पर है पचास आबादी की सुरक्षा की जिम्मेदारी : बुधमा ओपी पर चार पंचायत के दस गांव की करीब पचास हजार की आबादी की सुरक्षा की जिम्मेदारी  है, लेकिन थाने के पुलिसकर्मी खुद असुरक्षित हैं। वही आधा इलाका उग्रवाद प्रभावित है, यहाँ बड़े अपराधियों का भी गढ़ है। इस ओपी क्षेत्र अंतर्गत खाड़ा, नयानगर, सहजादपुर, नवटोल,  सुखासनी, सिंगारपुर, सहित अन्य गांव है। इनमें कई इलाका संवेदनशील है।

वही कैम्प के वर्तमान भवन में ना तो मालखाना है और ना ही हवालात व मैश है। चौकी के कर्मचारी इस सामुदायिक भवन मे जहां रहते हैं वहीं पर खाना बनाते हैं। अपनी चारपाइ पर बैठकर ही अपना कार्य करते हैं। वर्षा के मौसम में भवन में पानी टपकता रहता है। इस पुलिस चौकी के अधीन करीब 18 गांव का का एरिया है। नयानगर मुखिया अब्दुल अहद ने बताया कि बुधामा पुलिस कैम्प में रह रहे तमाम पुलिसकर्मियों को हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए विभागीय अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए, यह काफी निराशाजनक है। सुदूरवर्ती इलाका होने के बावजूद हजारों लोगों की सुरक्षा का जिम्मा इन पुलिसकर्मियों के पास है।

मधेपुरा, खगड़िया और सहरसा जिले का है यह सीमावर्ती इलाका : उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र का यह हिस्सा, अपराध की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। आए दिन चोरी, लूट,  हत्या की घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। ऐसे में पुलिस प्रशासन के पास संसाधनों का अभाव, चिंता का विषय बना हुआ है। आवासीय सुविधा न होने से सुरक्षा कर्मियों को  जर्जर  सामुदायिक भवन में ठहरने को मजबूर होना पड़ रहा है। तीन जिलों के बीच का बुधमा ओपी क्षेत्र अपराधियों की शरणस्थली माना जाता है। ऐसे में पुलिस चौकी पर पुलिस कर्मियों का बदहाल भवन, सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा करता है। मिली जानकारी के अनुसार उदाकिशुनगंज थाना अन्तर्गत बुधामा ओपी पिछले 18 वर्षों से सामुदायिक भवन में संचालित है। दरअसल यह इलाका खगड़िया, मधेपुरा और सहरसा जिले का सीमावर्ती क्षेत्र है। आए दिन चोरी, छिनतई, लूट, हत्या और शराब तस्करी जैसे दर्जनों उदाहरण हैं।

वर्ष 2002 में हुई थी बुधमा ओपी की स्थापना : वर्ष 2002 में अपराधियों ने निर्वाचित बुधामा पंचायत के मुखिया ठाकुर दास की गोली मारकर हत्या रात्री के समय उनके निजी आवास पर कर दी गई थी। मुखिया ठाकुर दास की हत्या के बाद इलाकेभर में अपराध पर लगाम लगाने के उद्देश्य तथा शांति व्यवस्था कायम रखने के मद्देनजर तत्कालीन एसपी के निर्देश पर बुधामा पुलिस कैम्प की व्यवस्था की गई थी। जहाँ कुछ वर्षों के बाद बुधमा पुलिस चौकी सामुदायिक भवन केंद्र के जर्जर भवन में चल रही है। बरसात में खुद की सुरक्षा में पुलिस कर्मी ठौर ढूंढते रहते है। यहां तैनात पुलिस कर्मियों को आवास की सुविधा सुलभ नहीं हो पा रही है। जिले के अंतिम छोर पर खगड़िया और सहरसा जिले के बार्डर पर स्थापित चौकी जो आबादी के हिसाब से महत्वपूर्ण है, भवन के अभाव में प्रभावहीन है।

2019 से बुधमा ओपी को उपलब्ध है गश्ती वाहन : लघु सिंचाई व विधि मंत्री सह क्षेत्रीय विधायक नरेंद्र नारायण यादव के प्रयास से बुधामा पुलिस कैम्प में जून 2019 से गश्ती वाहन उपलब्ध कराया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर सीमावर्ती इलाका चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद उपलब्ध कराये गये गश्ती वाहन को कभी वीआईपी की सुरक्षा में तो कभी अन्य कारणों से दुसरे कामों में भेज दिया जाता है। इलाके भर के लोगों का कहना है कि मक्का फसल के दिनों में अपराधियों की गतिविधि बढ़ जाती है। अपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने का एक मात्र उपाय सघन पुलिस गश्ती, अपराधियों पर पुलिस की पैनी नजर रखने के साथ-साथ निरंतर वाहन चेकिंग महत्वपूर्ण है।

इस बाबत बुधमा कैम्प प्रभारी अमरेंद्र मिश्र ने बताया कि कैम्प सामुदायिक भवन में संचालित है। जिसमे चौकी जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता है। उन्होंने कहा कि राजकीय फंड से निर्माण नहीं करवा सकते क्योंकि यह पुलिस चौकी का भवन नहीं है। पूरी स्थिति उच्चधिकारियों को अवगत कराया गया है। इसी भवन में सभी काम पूरे करने पड़ते हैं।

वही अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि मामले को लेकर विभाग को लिखा जाएगा, जिससे बुधमा सहित अन्य ओपी को स्थायी भवन उपलब्ध हो सके।

कौनैन बशीर
वरीय उप संपादक

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