BNMU सीनेट की बैठक में सीनेट सदस्य ने विश्वविद्यालय के वित्तीय परामर्शी के कार्यशैली पर लगाया सवालिया निशान

कुलपति के अध्यक्षीय भाषण का स्वागत करते हुए कहा कि लगभग सभी महाविद्यालयों में तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की भारी कमी है. जिसके कारण महाविद्यालयों का दैनिक कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाता है.

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मधेपुरा/बिहार : मंगलवार को आयोजित बीएनएमयू के सीनेट की बैठक में सीनेट सदस्य एमएलसी डा संजीव कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय के वित्तीय परामर्शी के कार्यशैली पर जोरदार तरीके से प्रश्नचिन्ह उठाया.

उन्होंने वित्तीय परामर्शी के वेतन को लेकर मामला उठाते हुए कहा कि वित्तीय परामर्शी ने एलपीसी अभी तक विश्वविद्यालय में जमा नहीं कराया है. जबकि वह पूरा वेतन विश्वविद्यालय से ले रहे हैं. डा संजीव कुमार सिंह ने कहा कि यह कारण कुलपति के वित्तीय स्वच्छता एवं प्रशासनिक पारदर्शिता के दावे को रोड़ा के रूप में साबित होगा. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय पहले वित्तीय परामर्शी से एलपीसी जमा करायें या विभाग से जानकारी लें.

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 डा संजीव कुमार सिंह ने वित्तीय परामर्शी पर आरोप लगाते कहा कि वेतन भुगतान में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की उपस्थिति देखी जाती है ना कि उसके बकाये वेतन के भुगतान में मांगी जाती है. उन्होंने वित्तीय परामर्शी पर सीधे-सीधे शिक्षक एवं कर्मचारियों से अवैध उगाही करने का आरोप लगाया. उन्होंने नये महाविद्यालय के संबंधन में प्रक्रिया को अविलंब पूरा करने के लिए जल्द ही एक और सीनेट की बैठक आयोजित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि संबंधन के मामले में जब तक सीनेट सभा उसे पारित नहीं करेगी, तब तक उसे राज्य सरकार को नहीं भेजा जा सकता है.

सभी महाविद्यालयों में तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की भारी कमी : सीनेट सदस्य डा अरुण खां ने कुलपति, प्रति कुलपति, कुलसचिव समेत बैठक में उपस्थित सभी सीनेट सदस्यों का स्वागत एवं नववर्ष की बधाई तथा कुलपति के अध्यक्षीय भाषण का स्वागत करते हुए कहा कि लगभग सभी महाविद्यालयों में तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की भारी कमी है. जिसके कारण महाविद्यालयों का दैनिक कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाता है. इस पर कुलपति समेत सीनेट सभा को ध्यान देने की आवश्यकता है. जिसके लिए आरएम कॉलेज सहरसा से प्रस्ताव भेजा भी जा चुका है. रंजन यादव ने कहा कि सीनेट में लिए गए निर्णयों का अनुपालन नहीं हो रहा है. यूएमआईएस की धांधली में डेढ़ करोड़ रुपए का बंदरबांट हुआ है. फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्नातक में प्रत्येक साल 20 से 25 प्रतिशत छात्रों का रिजल्ट पेंडिग रह जाता है. साथ ही रंजन यादव ने वर्षों से रंगकर्मियों के द्वारा बीएनएमयू में नाट्यशास्त्र की पढ़ाई को लेकर किए जा रहे मांग को भी जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि जब भी किसी जायदाद का बंटवारा होता है तो बराबर-बराबर बांटा जाता है. इसी तरीके से एलएनएमयू से जब बीएनएमयू अलग हुआ था तो एलएनएमयू में पढ़ाई जाने वाली सभी विषयों की पढ़ाई बीएनएमयू में होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. जिसके कारण बीएनएमयू के छात्रों को नाट्यशास्त्र की पढ़ाई करने के लिए अन्य विश्वविद्यालय समेत अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ रहा है.

बीएनएमयू में नहीं हो रहा है न्यायालय आदेश का अनुपालन : सीनेट सदस्य प्रमोद चंद्रवंसी ने कर्मचारियों के वेतन विसंगति पर तल्ख रूप से अपनी बात रखी. उन्होंने सीधा सवाल विश्वविद्यालय प्रशासन से किया कि यह विसंगति किस स्तर से हुई, विश्वविद्यालय प्रशासन जबाब दें. सीनेट सदस्य दिनेश झा ने कहा कि विश्वविद्यालय में न्यायालय आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है. संज्ञान में लेकर कुलपति इसका अनुपालन करवायें. कर्मचारी नेता सह सीनेट सदस्य प्रमोद कुमार ने विश्वविद्यालय के 86 कर्मियों के वेतन रोके जाने के मामले को उठाया. उन्होंने कहा कि बार-बार राज्य सरकार स्तर से कर्मचारियों का वेतन रोक दिया जा रहा है. इस पर ठोस पहल किया जाय.

कई शिक्षकों की नहीं हो पाई है एक बार भी प्रोन्नति : सीनेट सदस्य डा नरेश कुमार ने शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि कई महाविद्यालय के शिक्षकों की एक बार भी प्रोन्नति नहीं हो पाई है. जिसके कारण इन शिक्षकों को महीने में 50 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है. साथ ही उन्होंने साल में दो बार सीनेट की बैठक करने की मांग की. उन्होंने कहा कि दूसरी सीनेट की बैठक शैक्षणिक मुद्दों पर होनी चाहिये. डा नरेश कुमार ने कहा कि दो करोड़ रुपए बिहार सरकार से विश्वविद्यालय के सौंदर्यीकरण के लिए मिला था. जिसमें से राशि का खर्च नहीं हो पाया है. उन्होंने नार्थ कैंपस में बिजली की लचर व्यवस्था की ओर ध्यान आकृष्ट कराया. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में नैक मूल्यांकन की कल्पना नहीं की जा सकती है. स्नातकोत्तर सेंटर में कुर्सियां नहीं है. छात्रों के लिए कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है. ऐसे में सिर्फ नैक की कल्पना सिर्फ आई वास है. स्थिति यह है कि वहां शिक्षक के साथ जानवर बैठे रहते हैं. नैक के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है. नॉर्थ कैंपस में तीन साल में बाउंड्री नहीं बन पाया है.

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

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