नालंदा : मख़्दूम-ए-जहां का सार्वजनिक सलाना उर्स  लॉकडाउन के कारण इस साल संभव नहीं

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मुर्शीद आलम
नालंदा ब्यूरो
बिहार

नालंदा/बिहार : जिला मुख्यालय बिहारशरीफ स्थित बड़ी दरगाह मोहल्ले में स्थित हजरत मख़्दूम-ए-जहां शैख शर्फुद्दीन अहमद याहिया मनेरी रहमतुल्लाह आलेह के मजार पर लगने वाला 659 वां सालाना उर्स मेला लॉक डाउन-04 के बजह कर इस साल संभव नहीं है।

ज्ञात हो कि देश के बड़े-बड़े सूफी संतों में से एक  सूफी संत में मख़्दूम-ए-जहां का भी नाम आता है और यहां हर साल ईद महीने की 1 तारीख से लेकर 10 तारीख तक उर्स मेला का आयोजन किया जाता है। इस उर्स मेला में बिहार, झारखंड, बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई के अलावा कई राज्यों से अधिक संख्या में श्रद्धालु आते हैं। देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों से श्रद्धालु इस अवसर पर पधारते हैं। जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, वर्मा इत्यादि। 10 दिनों तक लगने वाला यह उर्स मेला मैं प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, और हजरत मख़्दूम-ए-जहां के आस्ताने मुबारक पर चादर पोशी कर अपनी मुरादें मांगते हैं।

 इस उर्स मेला में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 10 लाख श्रद्धालु भाग लेते हैं, लेकिन करोना वायरस के कारण देश में जारी लॉक डाउन-04 के कारण अब हजरत मख़्दूम-ए-जहां के आस्ताने पर उर्स मेला का आयोजन करना असंभव है। इसलिए कि लॉक डाउन-04 को 31 मई तक बढ़ा दिया गया है। 1 ईद से ही उर्स मेला का आयोजन होकर 10 तक चलता और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 5 ईद को जिला प्रशासन की ओर से बड़े ही धूमधाम से  हाथी, घोड़ा और ऊंट के साथ हजरत मख़्दूम-ए-जहां के आस्ताने पर चादर पोशी की जाती है। उसके बाद आम जनों के लिए चादर पोशी का सिलसिला शुरू हो जाता है जो 12वीं ईद तक चलता रहता। जबकि सरकारी आंकड़े के अनुसार10 ईद को उर्स मेला को संपन्न घोषित कर दिया जाता है। मगर बड़ी दरगाह स्थित हजरत मख़्दूम-ए-जहां के आस्ताने पर लगने वाला उर्स मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा।

इस बात की जानकारी देते हुए हजरत मखदूम-ए-जहां के सज्जादा नशीन हजरत सैयद शाह सैफुद्दीन फिरदौसी ने कहा कि लॉक डाउन-04 के कारण उर्स मेला 2020 संभव नहीं है। सिर्फ चंद लोगों के द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग करते हुए रसम अदा की जाएगी।


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