जामिया तुल कासिम दारुल उलूम इस्लामिया परिसर में छात्रों ने उर्दू, अरबी, हिंदी और अंग्रेजी में दीं शानदार प्रस्तुतियां, 110 शहीदों के नाम और स्वतंत्रता सेनानियों के विचार पट्ट पर किए गए अंकित

छातापुर/सुपौल/बिहार : प्रखंड क्षेत्र के मधुबनी स्थित जामिया तुल कासिम दारुल उलूम इस्लामिया परिसर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को ‘एक शाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कारी जफर इकबाल मदनी ने की, जबकि संचालन मुफ्ती मो. अंसार कासमी ने किया।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों और छात्रों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मदरसा के छात्र-छात्राओं ने उर्दू, अरबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में देशभक्ति से ओत-प्रोत भाषण एवं काव्य पाठ प्रस्तुत किए। बच्चों की प्रस्तुतियों को उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हाफिज नसीम इकबाल ने मदरसा के संस्थापक स्व. मुफ्ती महफूजुर्रहमान उस्मानी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि वे भी उनके बताए मार्ग पर चलते हुए समाज सेवा को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में मुसलमानों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनकी कुर्बानियों को इतिहास कभी भुला नहीं सकता। मौलाना जिया उल्लाह जिया रहमानी ने कहा कि आज समाज में नफरत को खत्म कर आपसी मोहब्बत और भाईचारे का माहौल कायम करना बेहद जरूरी है। वहीं, पूर्व प्रखंड प्रमुख जाहूर आलम ने छात्रों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा ही तरक्की का सबसे मजबूत माध्यम है। उन्होंने छात्रों से मेहनत और लगन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने की अपील की।
सैफ अली खान ने मदरसों की सामाजिक एवं शैक्षणिक सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि देश के निर्माण और समाज को शिक्षित करने में मदरसों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे इतिहास में सम्मान के साथ दर्ज किया जाएगा। कार्यक्रम के संचालक मुफ्ती अंसार कासमी ने कहा कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के बारे में अवश्य पढ़ना चाहिए। इसी उद्देश्य से जामिया परिसर में स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों के साथ 110 शहीदों के नाम की पट्टिका भी लगाई गई, ताकि छात्र उनके योगदान से प्रेरणा ले सकें।
कार्यक्रम में मदरसा के छात्र मो. अमन, मो. सोहेल, मो. अदनान, कमरुद्दीन कमर, दिलशाद अली, मो. मुंतजिर, हुमैरा अंसारी और आफरीन जामई की प्रस्तुतियों को विशेष रूप से सराहा गया।इस अवसर पर मौलाना निजामुद्दीन मदनी, मोती अहमद, मो. अखलाक, मौलाना निजामुद्दीन कासमी, मौलाना इम्तियाज रहमानी, कारी कैसर अली राना, असलम परवाना, कारी शमशेर आलम जामई, कारी नजमुद्दीन रहमानी, हाफिज शमशेर आलम, मौलाना अकील कासमी, मंटू खान, शाहजहां शाद, आफताब आलम, फिरोज अहमद, मौलाना अंसारुल हक कासमी, डॉ. मो. तबरेज, मो. फिरदौस, मंजर खान, रहमत अली, मो. परवेज, जियाउद्दीन समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट :- रियाज खान

