मधेपुरा : धूमधाम से मनाया गया सृजन दर्पण का स्थापना दिवस

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राकेश रंजन
संवाददाता
सदर, मधेपुरा

मधेपुरा/बिहार : शहर के कृष्णापुरी मे सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था सृजन दर्पण के स्थापना दिवस समारोह का आयोजन प्रधान कार्यालय परिसर में किया गया ।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संस्था के लिए दो वर्ष का समय बहुत छोटा होता है परंतु इस अल्प अवधि में भी मानव जीवन की विभिन्न धाराओं से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाने का अनोखा प्रयास किया । विभिन्न चौराहों से लेकर राजकीय महोत्सव में ज्वलंत मुद्दों पर सशक्त प्रस्तुति दी नुक्कड़ नाटक से लेकर गीत नृत्य एकांकी नृत्यनाटिका एवं नाटक जैसे कला के विभिन्न माध्यमों के जरिये दर्शको में सजहता के साथ अनुकूल भाव का सृजन किया। इसके द्वारा सामाजिक कुरीति पर्यावरण स्वास्थ्य नशा उन्मूलन एवं राजकीय योजनाओं पर आधारित जन जागरूकता से संबंधी विषयो पर कार्यक्रम किये जाते हैं।
साहित्य मानव के मानस संसार को संतुलित करने का सशक्त साधन रहा है। इस हेतु समय -समय पर समसामयिक समस्याओं से जुड़े विषय पर संघोष्ठी के माध्यम से वैचारिक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाता है। तीसरे वर्ष की प्रथम सीढ़ी पर पांव रखते ही सदस्यों ने अपने कार्यो का सिंहावलोकन करते हुए आगे मानव हितैषी कार्यो के लिए खुद को संकल्पित किया ।
इस अवसर पर भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में नई पीढ़ी विषय पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिकुलपति डॉ प्रो फारुख अली, समाजसेवी डॉ भूपेंद्र नारायण यादब मधेपुरी, प्राचार्य डॉ अशोक कुमार, योगाचार्य असंगस्वरूप साहेव एवं अध्यक्ष डॉ ओमप्रकाश ओम ने किया । अतिथियों के सम्मान में नृत्य निर्देशिका एवं गायिका पुष्पा कुमारी ने स्वागत गीत घर मंदिर से नही वो कम जहाँ रख दो तुम कदम प्रस्तुत किया।
वही समारोह का सफल संचालन नवोदित उदघोषिका मुन्नी कुमारी ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ ओम ने कहा कि किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति वहाँ के भौगोलिक परिवेश से बनती है इसीलिए बाहरी संस्कृति के आकर्षण को विचारकर अपनाना चाहिए। योगाचार्य असंग साहेब ने कहा कि भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण देन संयमित जीवन शैली है।
डॉ अशोक कुमार ने कहा कि समय और परिस्थिति बदलने पर आचार विचार का बदलना स्वभाविक है। सबों में ज्ञान की रोशनी पहुचाने से स्वास्थ्य संस्कृति बनेगी । डॉ मधेपुरी ने कहा साँस लेते वक्त जो हम होते हैं छोड़ते वक्त बदल जाते हैं। संस्कृति में बदलाव भी सहज है लेकिन अपनी मंगलकारी परंपरा को नही छोड़ना चाहिए।
डॉ प्रो फारुख अली ने कहा कि अच्छी संस्कृति जीवन को सरस और सुगम बनाती है। भारतीय संस्कृति तो अपनी शांति प्रियता के कारण अन्य देशों को आकर्षित करती रही है। इस कारण विदेशी संस्कृति का अंधानुकरण नही करना चाहिए।
मौके पर शिवनारायण यादव, ओमेंद्र कुमार एवं अमित कुमार ने भी अपना विचार रखा। कार्यक्रम को सफल बनाने में सृजन दर्पण के सदस्य सागर कुमार, सुशील कुमार, रंगकर्मी सत्यम, सौरभ, राहुल, निखिल, तानुप्रिय, राखी, प्रियंका, शिवानी, सौरभ, गौरव, ब्रह्मप्रकाश, अमलेश, श्रावण, विकास सिंटू आदि ने अपना योगदान दिया। धन्यवाद ज्ञापन सचिव बिकास कुमार ने किया।


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