“जागो ग्राहक जागो”, अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस पर विशेष

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“जागो ग्राहक जागो” जनहित में जारी एक फैमस स्लोगन है। यह वास्तव में उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागृत करने का एक सरकारी प्रयास है। भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में बढ़ते बाजारवाद ने उपभोक्ता संस्कृति को बढ़ावा दिया है, उसके अपेक्षा अभी भी उपभोक्ताओं में जागरूकता की  कमी महसूस की जा रही है।

व्यापारी व उद्यमी वर्ग जहाँ वस्तुओं में मिलावट, नापतौल में कमी, व्यापारियों द्वारा अधिकाधिक मुनाफा कमाने  और निज स्वार्थ की पूर्ति के लिए अनैतिक तरीके अपनाकर ठगने, का कुप्रयास करती है वहीं उनमें भ्रामक और मिथ्या विज्ञापनों के द्वारा लोगों को लुभाने की प्रवृत्ति बहुत बढ़ गई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अनेकों -अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

         उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागृत करने, बाजार में होने वाली जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावटी सामग्री का वितरण, एमआरपी से अधिक दाम वसूलने, बिना मानक वस्तुओं की बिक्री और नाप तौल में गड़बड़ी जैसी अनियमितताओं के प्रति ग्राहकों को जागरूक करने के उद्देश्य से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाए गए।    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक वर्ष 15मार्च को अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस का आयोजन किया जाता है, जबकि भारत में प्रत्येक वर्ष 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है।

        वास्तव में वर्ष 1962 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने उपभोक्ताओं के अधिकार पर अपना ऐतिहासिक भाषण दिया, तत्पश्चात विश्व स्तर पर 15मार्च 1983को यह दिवस मनाया गया।  कालांतर में यह एक महत्वपूर्ण दिवस बन गया।

         अमेरिका के बाद भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत सन् 1966 में मुम्बई से हुई। सन्  1974 में पुणे में ग्राहक पंचायत की स्थापित होने के बाद तोअनेक राज्यों में उपभोक्ता कल्याण हेतु संस्थाओं का गठन गठन किया गया। 9दिसंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी की पहल पर उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पारित हुआ। इसके बाद से ही भारत में 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाने लगा।    

         निःसंदेह उपभोक्ता संरक्षण कानून जनहित का एक सार्थक प्रयास है। अतः अपनी खरीदारी करते समय सामानों की खरीदारी की रसीद लेना, मुद्रित एम आर पी  से अधिक दाम लेने पर विरोध प्रकट करना, सामान अथवा सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, मापदंड और मूल्य की जानकारी रखने जैसे अधिकारों के प्रति सजग रहना आवश्यक है ।

“और जब नापकर दो, नाप पूरी रखो और ठीक तराजू से तौलो! यही उत्तम और परिणाम की दृष्टि से भी अधिक अच्छा है!

         (पवित्र कुरआन 17:35)”

“ऐ ईमान लाने वालो! जब किसी निश्चित अवधि के लिए आपस में ऋण का लेन देन करो तो उसे लिख लिया करो और  चाहिए कि कोई लिखने वाला न्यायपूर्णता से लिख दे।”

                  (पवित्र कुरआन, 2:282)

पवित्र कुरआन की यह आयत पूरी मानवता का मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें अपने अधिकार व कर्तव्य के प्रति सजग बनाती है।    

       निश्चय ही जनहित में जारी यह प्रयास, तभी सार्थक हो सकता है जब हम उपभोक्ताओं के अधिकारों व कर्तव्यों को सामान्य जन तक पहुंचाने में सफल होंगे।

मंजर आलम,
  (एम०ए०, बी०एड०)
नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना       

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