मधेपुरा : विद्यालय भवन नहीं रहने से शिक्षा से वंजित हो रहे हैं जनजाति समुदाय के बच्चे

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जमीन उपलब्ध रहने के बावजूद नवसृजित विद्यालय झंडाटोल के भवन निर्माण में विभागीय अधिकारी बारात रहे हैं लापरवाही अपनी जिम्मेदारी को नजर अंजाद कर नवसृजित विद्यालय झंडाटोल को नवसृजित विद्यालय वरहकोल में  किया शिफ्ट   2 किलोमीटर दुरी और नदी पर पुल नहीं रहने के कारण छात्र-छात्राएं विद्यालय जाने को तैयार नहीं  55 दिनों से छात्र -छात्राओं का पठन पाठन पूरी तरह है बाधित, और विभाग जान कर भी है अंजाम विद्यालय में पढने वाले छात्र-छात्राएं  निहायत ही गरीब एससी एसटी समुदाय से स्थानीय निवासी मिठ्ठन ऋषि देव के विद्यालय भवन निर्माण हेतु 9 डिसमिल जमीन दान में देने के बावजूद विभागीय लापरवाही के वजह से विद्यालय के भवन निर्माण में हो रही  देरी से स्थानीय लोगों गुस्सा

आकाश दीप
संवाददाता
उदाकिशुनगंज, मधेपुरा

उदाकिशुनगंज/मधेपुरा/बिहार : मध्यान भोजन, पोशाक राशि सहित अन्य योजनाये शुरू होने के बाद सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की बढती संख्यां, शिक्षा में गुणवत्ता लाने और सभी बच्चों को विद्यालय से नाता जोड़ने के उद्देश्य को लेकर सरकार ने कुछ वर्ष पूर्व 72 नवसृजित प्राथमिक विद्यालय खोले थे। सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय शुरूआती तौर पर एक बेहतर पहल थी, लेकिन इसका दूरगामी परिणाम अच्छा नहीं रहा। जिसका परिणाम है कि आज उन विद्यालयों के बच्चे  कही खुले पेड़ के नीचे या किसी के दरवाजे पर बैठकर पढ़ने को मजबूर है।

उड़ दौरान सरकार ने विद्यालय में जमीन दान देने हेतु लोगों को प्रेरित भी किया लेकिन विभागीय लापरवाही के वजह से सफल नहीं हो पाया। लिहाजा कई विद्यालयों को जमीन उपलब्ध नहीं रहने के कारण दूसरे विद्यालय में मर्ज कर दिया गया तो कई विद्यालयों में जमीन उपलब्ध होने के बावजूद भी विभागीय लापरवाही और अर्चन की वजह से दूसरे विद्यालयों में शिफ्ट किया जा रहा है। इस सब के बीच नौनिहाल एक तरह स बलि का बकरा  बना दिया गया है,  जमीन उपलब्धता को लेकर विभिन्न स्तर पर विभागीय अधिकारियों द्वारा बरती गई लापरवाही के उपेक्षा के कारण प्रभावित होने वाले विद्यालयों के छात्र के अभिभावक भी चिंतित है।

ऐसे ही एक मामला उदाकिशुनगंज प्रखण्ड क्षेत्र के खाड़ा पंचायत सौतारी झंडाटोला अंतर्गत नवसृजित विद्यालय झंडाटोल का प्रकाश में आया है। विद्यालय के भवन निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को नजर अंदाज कर नवसृजित विद्यालय झंडाटोल को 15 जनवरी को नवसृजित विद्यालय वरहकोल में शिफ्ट कर दिया गया।  लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि झंडाटोल से वरहकोल विद्यालय कि दूरी 2 किलोमीटर रहने और नदी में पुल नहीं रहने के कारण छात्र छात्राएं 2 किलोमीटर की दूरी तय कर और नहर के पानी को पारकर विद्यालय जाने को तैयार नहीं है। लिहाजा 55 दिनों से छात्र-छात्राओं का पठन पाठन पूरी तरह बाधित है। गौर करनी वाली यह भी है कि इस विद्यालय में सभी छात्र-छात्राएं दीनहीन गरीब एससी एसटी समुदाय से आते हैं।    

सनद रहे कि विद्यालय के प्रधान शिक्षक दयानंद झा ने विभागीय अधिकारियों को लिखित रूप में छात्र-छात्राओं का विद्यालय नहीं आने की सूचना भी दी गई है। लेकिन विभाग सब कुछ जान कर अनजान है, ऐसे सरकार का समाज के अंतिम छोड़ पर खड़े लोगों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का मंसूबा सरजमीं दफ़न होता दिख रहा है।

माम्लुम हो कि स्थानीय ग्रामीण मिठ्ठन ऋषि देव के द्वारा विद्यालय भवन निर्माण हेतु 9 डिसमिल जमीन दान में दे दिया गया है  लेकिन विभागीय अधिकारी इस जटिल समस्या के समाधान निकालने में अपनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं ।

विभागीय अधिकारियों के इस रवैये से नाराज सौतारी झंडा टोला के छात्र-छात्रा एवं अभिभावक आदि ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मांग किया कि विद्यालय का संचालन मूल स्थान पर किया जाए साथ दान में दिए गए जमीन की विभागीय प्रक्रिया पूर्ण कर अभिलंब विद्यालय का भवन निर्माण कराया जाए अन्यथा हम लोग विभाग और सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे। अभिभावकों ने कहा कि हमारे नौनिहाल बच्चों को 2 से 3 किलोमीटर कि दुरी तय कर अन्य विद्यालयों में कई व्यस्ततम सड़क और नदी नहर नदी पार पढ़ने जाना पड़ेगा ऐसी स्थिति में आवागमन के दौरान अप्रिय घटना घटने की संभावना हर हमेशा बनी रहती है। छात्रों के पठन-पाठन पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। यह हम लोगों को मंजूर नहीं है।

वहीँ इस मामले में पूछे जाने पर प्रखंड के बीईओ बिंदेश्वरी प्रसाद साह ने  एक तरह से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बताया कि विद्यालय में जमीन उपलब्ध कराए जाने को लेकर आवेदन प्राप्त हुआ है जिसे विभागीय कार्यवाही के लिए अंचलाधिकारी के पास भेजा गया है, वहां से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट आने के बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी, उसके बाद विद्यालय के भवन का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने खुले में मध्यान्ह भोजन और पठन-पाठन की कठिनाइयों को देखते हुए तत्काल दूसरे विद्यालय में शिफ्ट किया गया था। बच्चों के विद्यालय नहीं जाने के कारण विभागीय वरीय अधिकारी का मार्गदर्शन लेने के बाद पुनः मूल स्थान पर विद्यालय संचालन का आदेश निर्गत किया जाएगा।


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