जलजमाव वाले खेतों में मखाना की खेती से किसानों के जीवन में आ रहा है बदलाव

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मधेपुरा (बिहार) : रविवार को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय पूर्णिया एवं कृषि विज्ञान केंद्र मधेपुरा के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत मखाना उत्पादन प्रणाली से आद्र भूमि के विकास के लिये मखाना की खेती की संभावनाएं समस्या एवं निदान विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें मखाना उत्पादक 25 किसानों ने भाग लिया. जिनके खेतों पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबोर भागलपुर द्वारा विकसित सबोर माखाना एक का प्रत्यक्षण फसल वर्ष 2022 में किया गया है.

मधेपुरा जिला के लगभग तीन सौ हेक्टयर जमीन जिसमें हमेशा जल जमाव रहने के कारण बेकार पड़े जमीनों को अभिषाप के रूप में देखे जाने वाले जमीनों में मखाना के खेती के प्रत्यक्षण व प्रशिक्षण के माध्यम से जागरूकता तथा सदुपयोग करके अब वरदान साबित हो रहा है. जलजमाव वाले खेतों में मखाना की खेती से किसानों के जीवन स्तर में बदलाव आ रही है. आज किसान मखाना की खेती कर सिर्फ समृद्ध ही नहीं हो रहे हैं, परंतु विदेशों में भी निर्यात कर बिहार का डंका बजा रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से फसल वर्ष 2021-22 में जिले के 125 हेक्टयर में मधेपुरा प्रखंड के बराही, सुखासन, बालम, साहुगढ़, खौपैती, मनहारा तथा सिंहेश्वर प्रखंड के भवनापुर, लालपुर, मुरलीगंज प्रखंड बेलोकला में सबोर मखाना एक का प्रत्यक्षण लगाया गया है.

केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डा मिथिलेश कुमार राय ने मधेपुरा जिला में मखाना की खेती की संभावनाएं एवं खेती के गुर बताएं. डा आरपी शर्मा ने कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे में, मृदा वैज्ञानिक डा शशि प्रकाश विश्वकर्मा ने जैविक मखाना उत्पादन व पोषक तत्व प्रबंधन तथा वेटनरी वैज्ञानिक डा सुनील कुमार ने मखाना के साथ मछली पालन तकनीक पर जानकारी दी.

बिनीत कुमार बबलू
संवाददाता, मधेपुरा

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