मुसलमानों के नाम नायब अमीर-ए-शरियत हज़रत मौलाना मोहम्मद शमशाद रहमानी क़ासमी का विशेष पैगाम

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पटना/बिहार : इस समय पूरा देश कोरोना वायरस जैसी घातक बीमारी और महामारी से जूझ रहा है , बीमारी की गंभीरता और मौतों की संख्या को देखते हुए, देश भर में कहीं पूर्ण और कहीं आंशिक लॉक डाउन लगा हुआ है , ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि सभी मुसलमान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। ।

रमज़ान का आख़री अशरा (दस दिन) निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण और मूल्यवान है, इस दशक की ताक़ (विषम) रातों में कोई रात  “शब ए क़द्र” हो सकती है अतः प्रत्येक मुसलमान रोज़ा, तरावीह के साथ अधिक से अधिक समय ज़िक्र व तिलावत और इबादत व रियाज़त (उपासना और धर्मनिष्ठा) में लगाएं, शब ए क़द्र की बरकत प्राप्त करने का प्रयास करें, परंतु शब ए क़द्र की खोज में सरकार की गाइडलाइन के विपरित मस्जिदों में इकट्ठा न हों, अपने घरों को इबादतों की रोशनी से भर दें।

⇒ कोरोना रोग के लिए विशेषकर दुआ करें कि कोरोना रोग जल्दी से जल्दी समाप्त हो जाए , परिस्थितियां समान्य हो जाएं एवं मस्जिदें और मदरसे फिर से आबाद हों ।

⇒ किसी भी तरह की इफ्तार पार्टियों से दूर रहें, स्वयं भी दावत (आमंत्रित) न करें सामुहिक बैठकें करने से बचें ।

⇒ खरीदने बेचने हेतु सरकार के आदेश एवं लॉक डाउन के नियमों का पूर्णरूप से पालन करें ।

⇒ स्वच्छता, मास्क एवं दो गज़ की दूरी की जिस प्रकार आप पाबंदी कर रहे हैं उसी प्रकार पाबंदी करें और जीवन की सुरक्षा एवं सावधानी बरतने को अपना ईमानी फ़रीज़ा समझें ।

⇒ जिन व्यक्तियों को कोरोना के लक्ष्ण जैसे तेज़ बुख़ार, सुखी खाँसी, शरीर में दर्द हो रहा हो तो उनको आवश्यक रूप से जाँच करानी चाहिए, इसे छुपाने एवं जाँच से बचने में अपने साथ – साथ सभी मिलने जुलने वालों का नुक़सान है, जाँच कराएं ताकि जानकारी प्राप्त हो जाए के विशेष रोग (कोरोना) है या नहीं? अगर नहीं है तो अल्लाह का शुक्र अदा करें और अगर रोग है तो पूरे लगन के साथ इलाज कराएं, बेशक अल्लाह ही शिफा देने वाले हैं ।

⇒ हर मुसलमान सम्प्रदाय एवं संगठन से आगे बढ़कर मृतकों के शवों को दफन करने एवं क़ब्रिस्तानों में जगह देने में सहायता करें, मृत्यु से न डरें बल्कि अल्लाह पर विश्वास रखें ।

⇒ राष्ट्र के युवाओं का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया जाता है कि रात में मोटरसाइकिल, कार इत्यादि पर घूमने फिरने से बचें, मोबाइल का भी प्रयोग कम से कम करें, ज़िक्र व तिलावत पर ध्यान दें एवं रमज़ान की बरकतें हासिल करें ।

रमज़ान के महीने में विशेषकर असहाय एवं गरीबों का ख्याल रखें, अपने परिजनों, पड़ोसियों एवं जो लोग दया के पात्र हों उनकी हर प्रकार से सहायता करें और सदक़ा ए फित्र को विशेष रूप से दें ।

⇒ इमारत शरिया एवं हमारे मदरसे बहुत अनमोल धरोहर हैं एवं उत्तम सेवा कर रहे हैं, इनकी सराहना करें, इनकी शुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है इसलिए इनकी सहायता करते रहें एवं पैसा खुद से पहुंचाने की फिक्र करें, बैंक द्वारा भी आसानी के साथ पैसा भेजा जा सकता है ।

⇒ मदरसों एवं मस्जिदों के ज़िम्मेदार व्यक्तियों से अनुरोध है के इमाम, मुअज़्ज़िन एवं मदरसों के असातिज़ह (शिक्षकों) इत्यादि का भरपूर ख्याल रखें एवं इनके वेतन में किसी प्रकार की कटौती एवं कमी न करें ।


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