नासूर बनती जा रही है मधेपुरा शहर में जाम की समस्या

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फ़ोटो : शहर में जाम का मंजर
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मधेपुरा/बिहार : जिले में ट्रैफिक जाम की समस्या नासूर बनती जा रही है. इसके कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि हजारों वाहनों का हजारों रुपए का तेल जाम में फंसने के कारण रोजाना जल रहा है. 

शनिवार को लगभग 12:30 बजे जिला मुख्यालय के कॉलेज चौक पर स्नातक की प्रथम पाली का परीक्षा समाप्त होने एवं द्वितीय पाली का परीक्षा शुरू होने तथा महागठबंधन द्वारा आयोजित मानव श्रृंखला का समाप्त होने के दौरान सड़कों पर महाजाम लग गया. लगभग दो घंटे तक लोगों को जाम में फंसा रहना पड़ा हालांकि जाम को समाप्त करने के लिए सदर अनुमंडल पदाधिकारी नीरज कुमार, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अजय नारायण यादव, सदर प्रखंड विकास पदाधिकारी आर्य गौतम एवं सदर थानाध्यक्ष सुरेश प्रसाद सिंह समेत अन्य पुलिस बल एवं कमांडो के द्वारा तत्परता से कार्य किया गया और जाम को खत्म किया गया, लेकिन लगभग दो घंटे तक लोग इस परेशानी से गुजरते रहे.

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फ़ोटो : शहर में जाम को समाप्त करते पुलिस पदाधिकारी

जाम का विरोध किया तो होता है चिकचिक  : शहरों का ऐसा कोई भी सड़क नहीं है, जहां जाम की समस्या से लोगों को रूबरू नहीं होनी पड़ रहा है. इन सड़कों से गुजरने वाली वाहनों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ता है. अतिक्रमण का दौर भी जारी है. पानी टंकी चौक से सुभाष चौक एवं पुरानी कचहरी तक सड़कों के दोनों किनारे फुटपाथ विक्रेता व्यवसाय करते हैं. जिस कारण राहगीरों को दो पहिया वाहन या चार पहिया वाहन ले जाने में काफी परेशानी होती है. कहीं किसी ने जाम का विरोध किया तो चिकचिक होना लाजमी है. बावजूद इसके जिले के अधिकारी से लेकर नगर परिषद के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

इंटर एवं मैट्रिक परीक्षा के दौरान सड़कों पर लगेगा महाजाम : जिले में फिलहाल आज यानी रविवार को विश्वविद्यालय द्वारा ली जा रही स्नातक प्रथम खंड की परीक्षा समाप्त होगी. वहीं कल यानि सोमवार से इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू होगी। जिसमें लगभग 34 हजार परीक्षार्थी परीक्षा में उपस्थित रहेंगे और यह परीक्षा एक फरवरी से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगी. जिसके बाद 17 फरवरी से मैट्रिक की परीक्षा शुरू होगी, जो कि 24 फरवरी तक चलेगी. यानी फरवरी का पूरा माह परीक्षा के दौरान बीत जायेगा. इस दौरान सड़कों पर जितनी संख्या में परीक्षार्थी मौजूद रहेंगे, उससे दोगुने एवं तिगुने की संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहेंगे. ऐसी स्थिति में लोगों को महा जाम से गुजारना पड़ेगा.

जाम की समस्या से छुटकारा के लिए बाईपास जरूरी : परीक्षा के दौरान एवं अन्य दिन भी मुख्यालय के मुख्य सड़कों पर लगने वाला महा जाम का एक सबसे बड़ा कारण बाईपास सड़क नहीं होना भी है. जिला मुख्यालय के मुख्य चौक चौराहों से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बड़े-बड़े ट्रक राज्य के अन्य जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों के लिए गुजरते हैं. ऐसी स्थिति में जब एक साथ कई बड़े-बड़े ट्रक मुख्यालय के मुख्य सड़कों से गुजरते हैं तो जाम होना लाजमी बन जाता है. खासकर परीक्षा के दिनों में इन बड़े-बड़े ट्रकों के कारण महाजाम लगता है. इन जाम से छुटकारा दिलाने के लिए शहर के बाहर से बाईपास होना बहुत जरूरी है.

सायरन बजाकर निकल जाते हैं अधिकारी : ऐसा नहीं है कि शहर की नासूर बनती जा रही जाम की समस्या को लेकर जिले के वरीय अधिकारी से लेकर नगर परिषद के अधिकारी को पता नहीं है. सभी अधिकारी रोजाना इस समस्या से रूबरू होते रहते हैं. कई बार तो ऐसा भी होता है कि अधिकारियों का वाहन भी इस जाम में फंस जाता है. साथ ही कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि अधिकारियों का वाहन सायरन बजाकर निकल लेते हैं, लेकिन आम लोगों को रोजाना इस समस्या से गुजरना पड़ता है. जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है.

एक से डेढ़ घंटे पूर्व ही घर से निकलते परीक्षार्थी : जिले में सप्ताह के छह दिन ऑफिस कार्यालय की तरह सड़कों पर जाम लगना नियम बन गया है. किसी भी सरकारी दफ्तर में कार्य करने वाले,  किसी आवश्यक कार्यो के लिए घर से निकले लोगों एवं चिकित्सकों के पास इलाज के लिए जा रहे मरीजों एवं परिजनों को लगभग एक से डेढ़ घंटे पहले ही घर से निकलना पड़ता है. साथ ही अभी हाल के दिनों में विश्वविद्यालय की कई परीक्षाएं ली जा रही है. इसके लिए भी छात्र-छात्राओं को एक से डेढ़ घंटे पूर्व ही परीक्षा केंद्र के लिए निकलना पड़ जाता है. नहीं तो जाम में फंसे तो परीक्षा छूट जायेगी एवं उनका कार्य नहीं हो पायेगा.

जाम की मूल समस्या अतिक्रमण : शहर में जाम की समस्या का कारण सड़क पर व्यापक अतिक्रमण है. शहर में स्थाई और अस्थाई दोनों प्रकार के अतिक्रमण दिखते हैं. ऑटो रिक्शा, रिक्शा उत्पाद की दुकान शॉप पर ही लगे रहते हैं वही मालवाहक वाहन सड़क पर ही लगा दी जाती है.

कागज पर सिमट कर रह जाता है आदेश : शहर में जाम की समस्या सिर्फ आम नागरिकों के लिए नहीं बल्कि यहां रहने वाले अधिकारियों के लिए भी उसी तरह की है. प्रशासनिक स्तर से शहर में जाम की समस्या के हल को ढूंढने के लिए कई तरह के आदेश निर्गत किए जाते हैं, पर कार्रवाई नहीं होती है. यह आदेश सिर्फ कार्यालय के कागज पर सिमट कर रह जाता है.

इन चौक-चौराहों पर लगता है जाम : शहर के पानी टंकी चौक, थाना चौक, सुभाष चौक, पुरानी कचहरी, पूर्णिया गोला चौक, कर्पूरी चौक, पुराना बस स्टैंड  एवं कॉलेज चौक समेत मुख्य रास्ता के लगभग सभी चौक चौराहों पर जाम लगती है. दरअसल शहर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग अपने वाहन सड़कों पर ही लगा देते हैं. कई विभाग के दफ्तर बाजार में है और वहां पर पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है. दफ्तर जाकर काम करने वाले लोग सड़क पर ही गाड़ी लगाकर घंटों छोड़ देते हैं. जिस कारण जाम की समस्या रहती है. वहीं दुकानदार द्वारा भी सड़क का अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है.

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

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