BNMU : दर्शन परिषद बिहार का 42 वां वार्षिक अधिवेशन पांच से सात मार्च को

बीएनएमयू में पहली बार दर्शन परिषद का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. साथ ही बीएनएमयू कुलपति प्रो डा राम किशोर प्रसाद रमण एवं प्रति कुलपति प्रो डा आभा सिंह के कार्यकाल में आयोजित होने वाला यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है. सीनेट अभिभाषण में कुलपति ने इसकी घोषणा की थी.

Photo : www.therepublicantimes.co
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मधेपुरा/बिहार : दर्शन परिषद बिहार का 42 वां वार्षिक अधिवेशन पांच से सात मार्च को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में आयोजित किया जायेगा. यह अधिवेशन मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा संपोषित है. इसका केंद्रीय विषय शिक्षा, समाज एवं संस्कृति है. इस पर देश के कई राज्यों के वरिष्ठ प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं गहन विचार-विमर्श करेंगे.

यह जानकारी आयोजन सचिव सह बीएनएमयू जनसंपर्क पदाधिकारी डा सुधांशु शेखर ने दी. उन्होंने बताया कि बीएनएमयू में पहली बार दर्शन परिषद का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. साथ ही बीएनएमयू कुलपति प्रो डा राम किशोर प्रसाद रमण एवं प्रति कुलपति प्रो डा आभा सिंह के कार्यकाल में आयोजित होने वाला यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है. सीनेट अभिभाषण में कुलपति ने इसकी घोषणा की थी.

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मार्च 2020 में ही होना था अधिवेशन : मालूम हो कि पूर्व में यह अधिवेशन मार्च 2020 में ही आयोजित होने वाला था और इसके लिए आयोजन समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरों के मद्देनजर इसे आखिरी समय में स्थगित करना पड़ा था.

विचार-विमर्श के बाद तय की गई है तिथि : आयोजन सचिव सह बीएनएमयू जनसंपर्क पदाधिकारी डा सुधांशु शेखर ने बताया कि बीएनएमयू प्रशासन एवं दर्शन परिषद बिहार के पदाधिकारियों के बीच विचार-विमर्श के बाद पांच से सात मार्च की तिथि तय की गई है. इस संबंध में कुलसचिव डा कपिलदेव प्रसाद यादव ने दर्शन परिषद बिहार के महामंत्री डा श्यामल किशोर को पत्र भी प्रेषित कर दिया है. आगे विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों में कार्यरत दर्शनशास्त्र के शिक्षकों एवं शोधार्थियों से गहन विचार-विमर्श कर आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जायेगी.

31 जनवरी तक आलेख भेजने की तिथि : यह अधिवेशन ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों रूपों में आयोजित होगा. इसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जायेगा. मात्र एक सौ अतिथि एवं बाह्य प्रतिभागी ही कार्यक्रम में आमंत्रित किए जायेंगे. शेष प्रतिभागियों को उनके पते पर रजिस्टर्ड डाक से निःशुल्क स्मारिका एवं सर्टिफिकेट भेज दी जायेगी. सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन गूगल फार्म भरना होगा. जिन प्रतिभागियों ने पूर्व में पंजीयन करा लिया है, उनके लिए भी गूगल फार्म भरना ज़रूरी होगा. ऑनलाइन पंजीकरण, आलेख एवं शोध-सारांश भेजने की अंतिम तिथि 31 जनवरी तक निर्धारित की गई है.

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बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पांच विद्वान करेंगे अध्यक्षता : अधिवेशन का केंद्रीय विषय शिक्षा, समाज एवं संस्कृति है. इसके प्रधान सभापति तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर में दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो डा केदारनाथ तिवारी होंगे. साथ ही अधिवेशन में पांच विभागों तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, समाज दर्शन, धर्म दर्शन एवं नीति दर्शन के अंतर्गत शोध-पत्र की प्रस्तुति होगी. बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पांच विद्वान इन विभागों की अध्यक्षता करेंगे. साथ ही बिहार की दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विरासत एवं गांधी-150 : विमर्श एवं विकल्प विषयक दो संगोष्ठी भी आयोजित की गई है. इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से दो दर्जन विद्वान वक्ता भाग लेंगे. इसके अलावा देश के 12 चुने हुए विद्वानों का विशेष व्याख्यान भी होगा. इनमें नई दिल्ली के डा रमेशचंद्र सिन्हा एवं डा एचएस प्रसाद, इलाहाबाद के डा जटाशंकर, गोरखपुर के डा सभाजीत मिश्र, जोधपुर के डा सोहनराज तातेड़, रांची के डा सरस्वती मिश्रा, आरा के डा महेश सिंह, पटना के डा आइएन सिन्हा, डा एनपी तिवारी एवं डा पूनम सिंह, भागलपुर के डा प्रभु नारायण मंडल एवं डॉ. शंभू प्रसाद सिंह के नाम शामिल हैं. व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक डा रामजी सिंह (भागलपुर) करेंगे.

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

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