मधेपुरा : सदर अस्पताल में बेड की कमी से जूझने को मरीज मजबूर

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अमन कुमार
संवाददाता, सदर
मधेपुरा

मधेपुरा/बिहार : यूं तो सदर अस्पताल कई दावे करते हैं, अस्पताल की सच्चाई कुछ और है. अस्पताल प्रशासन ना ही बिचौलियों पर कोई नकल कस रहे हैं और ना ही अस्पताल की सुविधाओं पर सदर अस्पताल के अधिकारियों की नजर जाती है. अस्पताल में कई महीनों से अल्ट्रासाउंड की मशीन उपलब्ध है, लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. वहीं कई सालों से आईसीयू के उपकरण भी मौजूद हैं, लेकिन कई बड़ी घटना या दुर्घटना होने पर मरीज को बहार रेफर कर दिया जाता है. साथ ही सदर अस्पताल परिसर में कचरा एवं जल जमाव की समस्या बनी रहती है. जिसके कारण मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ता जा रहा है. मरीज के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों को मच्छरदानी भी उपलब्ध नहीं कराई जाती है. जिससे रात भर मच्छर मरीज पर हावी रहते हैं.

सदर अस्पताल में मरीजों के लिए नहीं है पर्याप्त बेड : मधेपुरा जिला समेत अन्य जिलों के कुछ इलाकों के लोग जिस सदर अस्पताल पर निर्भर है, उस सदर अस्पताल में मरीजों के लिए पर्याप्त बेड नहीं है. साथ ही मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों के लिए भी रात गुजारने की व्यवस्था नहीं है. जिस कारण मरीजों एवं परिजनों को सदर अस्पताल में रात गुजरना, बड़ी परेशानी का शवब बन जाती है. ऐसा ही मामला सदर अस्पताल में सामने आया है. सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों को बैठने तक की व्यवस्था नहीं है. यूं तो अस्पताल प्रशासन कहती है कि मरीज के साथ एक परिजन रह सकते हैं, लेकिन यह बातें सिर्फ कहने को रह जाती है. किसी परिजन को रात में ठहराव की जरूरत पड़ती है तो उन्हें बाहर बरामदे पर या किसी दुकान के नीचे समय व्यतीत करना पड़ता है. इस ठंड में बरामदे या किसी दुकान के नीचे रात गुजरना, किसी आपदा से कम नहीं है.

परिजनों को सड़कों पर भटक कर गुजारना पड़ता है रात : अक्सर ऐसा होता है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ जाने के बाद किसी बेड पर दो मरीज तो किसी बेड पर तीन मरीज को रखकर उनका इलाज किया जाता है. वही इतनी ठंड में प्रसूति महिला को बेड नही मिलने के कारण वो फर्श पर ही अपना रात गुजार दी. वहीं पिछले कुछ दिनों से परिवार नियोजन की ऑपरेशन चल रही है. जिस कारण अस्पताल में भीड़ बढ़ी रहती है. ऐसे में सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों की संख्या बढ़ जाती है. वहीं मरीज तो मरीज उनके परिजनों का रात गुजारना बहुत मुश्किल हो जाता है. वहीं कुछ मामले मरीज ज्यादा गंभीर होते हैं. ऐसे हालात में मरीज के साथ परिजनों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन सदर अस्पताल के निर्देश के कारण मरीज के साथ एक ही परिजन अस्पताल में साथ में राह पाते हैं बांकी परिजनों को अस्पताल कैंपस में या मुख्य सड़कों पर भटक कर रात गुजारना पड़ता है.

रात बितना अस्पताल में होती है परेशानी : सदर अस्पताल समेत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों एवं ग्रामीण अस्पतालों में मरीज के परिजनों के लिए विश्रामगृह नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी होती है. मरीजों के परिजनों को रात व्यतीत करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. रात में ठहरने के लिए भवन बनाने की मांग काफी समय से हो रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस संबंध में सिर्फ चर्चा ही होती है. अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है. जिसके फलस्वरूप मरीज के परिजनों को रात कटाने के लिए पेड़ों के नीचे एवं अन्यत्र स्थान पर जाना पड़ता है. अस्पताल परिसर में शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. जिससे कई बार चोरी की भी घटना घट चुकी है.

नहीं है विश्रमागृह का प्रावधान : इस मामले में सदर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि किसी भी सदर अस्पताल में विश्रामगृह की व्यवस्था नहीं है और ना ही सदर अस्पताल में विश्रामगृह का कोई प्रावधान है. सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों के लिए बैठने की व्यवस्था है, लेकिन सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों के लिए बैठने की व्यवस्था के लिए इमरजेंसी वार्ड में मात्र एक बेंच की व्यवस्था है. जिस पर मुश्किल से चार लोग ही बैठ सकते हैं. सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के लिए कुल 16 बेड की व्यवस्था है. अगर हर बेड के हिसाब से ही देखा जाए तो 16 मरीज के लिए हर समय 16 परिजन सदर अस्पताल में उपस्थित रहते हैं. कई बार तो बेड से ज्यादा मरीज सदर अस्पताल में रहते हैं. ऐसी स्थिति में मरीज के परिजन इधर-उधर भटक कर समय काटने को मजबूर हो जाते हैं.


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