भारत बंद का मधेपुरा में दिखा व्यापक असर, सड़कें जाम, बाजारों में छाया रहा सन्नाटा

728x90
Spread the news

भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण बढ़ेगी कालाबाजारी व जमाखोरी सरकार की नीतियों के कारण खतरे में है खेती व किसानी  सरकार के कॉरपोरेट प्रस्त नीतियों के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर  मोदी सरकार न सिर्फ किसान विरोधी, बल्कि यह संविधान विरोधी  

खबर से संबंधित वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : काला कृषि कानून के खिलाफ किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर भारत बंद का मंगलवार को जिला मुख्यालय समेत सभी प्रखंडों में भी व्यापक असर रहा। जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंड मुख्यालय एवं प्रमुख बाजार बंद रहा, एनएच 106, एनएच 107 एवं अन्य सभी प्रमुख मार्ग पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप रहा, सड़क जाम के कारण सरकारी, गैर सरकारी कार्यालय भी प्रभावित हुए। शहर के सभी मुख्य चौराहे, बीपी मंडल चौक, कर्पूरी चौक व कॉलेज चौक पर सुबह से ही राजद, भाकपा माकपा, भाकपा माले एवं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया। वहीं बाइक जुलूस निकालकर शहर भ्रमण करते बंद समर्थकों के अपील पर पूरा शहर बंद हुआ, इस दौरान महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी।

इस अवसर पर कर्पूरी चौक पर आम जनों एवं बंद समर्थकों को संबोधित करते हुए सदर राजद विधायक सह बिहार सरकार के पूर्व मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने कहा कि मोदी सरकार की कृषि कानून, किसानों को गुलाम बनाने वाली काला कानून है। जब सरकार किसानों से उनका फसल खरीद ही नहीं करेगी तो जन वितरण प्रणाली के लिए सरकार के पास अनाज कहां से आयेगा, इस परिस्थिति में जन वितरण प्रणाली ध्वस्त हो जायेगी. इसके फलस्वरूप स्टेट फूड कॉरपोरेशन एवं फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया समाप्त हो जायेगा, जिससे करोड़ों लोग बेरोजगार हो जायेंगे एवं आम लोगों के सामने भयंकर भूखमरी तथा खाद्य संकट उत्पन्न हो जायेगा।

भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण बढ़ेगी कालाबाजारी व जमाखोरी : प्रो चंद्रशेखर ने कहा की इन नीतियों से कृषि पर कॉरपोरेट जगत का पूर्णत: कब्जा हो जायेेगा। भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण कालाबाजारी एवं जमाखोरी बढ़ेगी तथा महंगाई चरम पर होगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह किसान विरोधी काला कानून है, सरकार इसे वापस ले अन्यथा गंभीर परिणाम होंगे, चरणबद्ध आंदोलन चलाकर मोदी एवं नीतीश सरकार का नींद हराम कर दिया जायेगा। उन्होंने 17 दिसंबर को काला कानून के खिलाफ जिले में विशाल मौन जुलूस आयोजित करने का आह्वान किया। विधायक प्रो चंद्रशेखर ने इस मौन जुलूस में बड़ी संख्या में किसानों को आने की अपील की। वहीं सिंहेश्वर के राजद विधायक चंद्रहास चौपाल ने कहा कि केंद्र व राज्य की सरकार किसान विरोधी सरकार है, यह जिस तरह से सार्वजनिक क्षेत्र को धड़ल्ले से बेच रही है, उसी तरह से खेत-खलिहान को बेचने पर आमदा है। राजद जिलाध्यक्ष जयकांत यादव ने कहा कि सरकार गांव व स्तर पर क्रय केंद्र खोलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सालों भर खरीद सुनिश्चित करें. किसानों की अनदेखी नहीं सहेंगे, सरकार किसान आंदोलन का दमन बंद करें एवं सम्मानजनक वार्ता करे।

सरकार की नीतियों के कारण खतरे में है खेती व किसानी : सभा की अध्यक्षता कर रहे महागठबंधन के जिला संयोजक एवं सीपीआई के राष्ट्रीय परिषद सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण खेती व किसानी खतरे में है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी अधिकार के दायरे में लाये। भाकपा नेता ने कहा कि इस देश में कृषि क्षेत्र 67 लाख करोड़ रुपए का आईबीए वाला है, इसलिए मोदी सरकार इस क्षेत्र को कॉरपोरेट के हवाले करने को आतुर है। राजद के प्रदेश महासचिव देव किशोर यादव एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग की तरह कृषि को भी निजी करण करना चाहती है। खेत एवं फसल दोनों को कॉरपोरेट के हवाले करने का मतलब है कि किसान गुलाम हो जायेेंगे। देश में कृषि व आर्थिक संकट उत्पन्न हो जायेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह यादव ने कहा कि बिजली कानून 2003 की जगह नये बिजली संशोधन बिल 2020 के जरिए बिजली कंपनियों पर से सरकारी नियंत्रण समाप्त हो जायेगी, यानी किसानों एवं गरीबों को रियायती दर पर बिजली नहीं मिलेगी, मनमानी ढंग से बिजली कंपनी उपभोक्ताओं से बिजली बिल वसूल करेगी।

सरकार के कॉरपोरेट प्रस्त नीतियों के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर: भाकपा माले के जिला सचिव रामचंद्र दास ने कहा कि सरकार किसानों के मुद्दे से भाग रही है और कॉरपोरेट एवं कंपनी राज खेती में स्थापित करना चाहती है। माकपा के जिला मंत्री मनोरंजन सिंह एवं राज्य कमेटी सदस्य गणेश मानव ने कहा कि केंद्र सरकार के कॉरपोरेट प्रस्त नीतियों के कारण आज बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। वर्तमान समय में किसानों को आय बताने में सरकार असमर्थ है। भाकपा के जिला मंत्री विद्याधर मुखिया एवं वरीय नेता रमन कुमार ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार वन नेशन – वन कमीशन की नीति पर चल रही है। चुनाव में भाजपा ने जिन उद्योगपतियों से कमीशन ली, आज उसके हाथ कृषि को बेचना चाहती है। समाजसेवी डा जवाहर पासवान ने कहा कि मोदी सरकार अभी खेत और खलिहान को बेच रही है, आने वाले दिनों में यह देश को बेच देगी। शिक्षाविद प्रो सचिंद्र महतो ने कहा कि किसान विरोधी काला कानून सरकार वापस ले, यह देश किसानों की है, किसानों की अनदेखी नहीं सहेंगे। लोजद के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव एवं वरीय नेता गोपाल यादव ने कहा कि सरकार किसानों पर दमन बंद करे, किसान संगठनों से वार्ता करें एवं काला बिल वापस ले। राजद के जिला महासचिव नसीरुद्दीन नूरी एवं महागठबंधन के सहायक संयोजक रामकृष्ण यादव ने कहा की मोदी सरकार हमारे खेत और पेट पर लात मार रही है, हम इसे नहीं सहेंगे।

मोदी सरकार न सिर्फ किसान विरोधी, बल्कि यह संविधान विरोधी : भीम आर्मी के नेता मुन्ना कुमार पासवान ने कहा कि मोदी सरकार न सिर्फ किसान विरोधी है बल्कि यह संविधान विरोधी भी है, इसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

 भारत बंद में राजद नेता सुरेश कुमार यादव पंकज यादव, प्रमोद यादव, अरविंद यादव, डा राजेश रतन मुन्ना, भारत भूषण, जयप्रकाश यादव, प्रकाश कुमार पिंटू, भूषण यादव, अमेश यादव, राजीव कुमार, मनोज यादव, मुशर्रफ, प्रवीण, धीरेंद्र यादव, नित्यानंद यादव, रामकृष्ण पौदार, शिवनारायण सदा, ललित यादव, संजय यादव, पप्पू यादव, सद्दाम, विकास कुमार, अभिनंदन यादव, भाकपा नेता शैलेंद्र कुमार, दिलीप पटेल, वीरेंद्र नारायण सिंह, शंभू क्रांति, वसीमुद्दीन उर्फ नन्हे, सिराज, मन्नु कुमार, जहांगीर, नवीन कुमार, माधो राम, कृष्णा मुखर्जी, राजू, रामसेवक यादव, विकास कुमार, माकपा नेता सुशील यादव, राजदीप कुमार, माले नेता शंभू शरण भारतीय, सीताराम रजक, अमनदीप कुमार, सुभाष मल्लिक, संजीदा खातून, प्रमिला देवी, कमला देवी, कांग्रेसी नेता शशि भूषण मंडल, कामेश्वर, खोखा सिंह, दिनेश यादव, रमन कुमार, लोजद नेता डा विजेंद्र यादव, अनिल यादव, अमरेश यादव, दिनेश ऋषिदेव, आलम, नसीम, भावेश यादव, विवेकानंद कुमार, छात्र राजद जिलाध्यक्ष नवनीत कुमार, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष निशांत कुमार यादव, संजय यादव, रालोसपा के आलमनगर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी इफ्तेखार आलम गुड्डू, युवा जिलाध्यक्ष प्रो अभिषेक कुशवाहा, छात्र जिलाध्यक्ष अभिषेक यादव, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष इस्तियाक आलम, औरंगजेब, सरफूदिन आदि बड़ी संख्या में महागठबंधन के कार्यकर्ता शामिल थे ।