मधेपुरा : हर साल की एक ही कहानी, खलिहान में धान और किसान की आंखों में पानी

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा (बिहार) : हर साल की एक ही कहानी खलिहान में धान और किसान की आंखों में पानी. दरअसल, सरकारी स्तर पर धान खरीद की जमीनी सच्चाई कुछ और ही है. अब तक धान खरीद के मामले में जिले की झोली खाली है. जिले में धान खरीद का लक्ष्य 40 हजार मीट्रिक टन रखा गया है. कागजों पर खरीदारी शुरू की गयी है. लेकिन कछुए की चाल चल रहे धान खरीद के तहत जिले में अब तक क्रय की शुरूआत नहीं हुई है. धान खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च 2021 है. लेकिन खरीद में तेजी आने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में लक्ष्य की पूर्ति कैसे होगी, यह कहना मुश्किल है. पदाधिकारियों के झूठे आश्वासन से किसान त्रस्त हैं. आलम यह है कि किसान धान की बिक्री के लिए दौड़ लगा रहे हैं. जिले के किसानों का धान खलिहान में पड़ा हुआ है.

समय पर बीज की बुआई नहीं कर पा रहे हैं किसान : जिले में सरकारी दर पर धान की खरीददारी जिला सहकारिता विभाग के अनुसार एक-दो दिन में शुरू कर दी जायेगी. किसान खेतों में लगे धान की फसल की कटाई के साथ धान को तैयार कर बेचने के लिए बेकरार है. अधिकांश किसान धान फसल कटाई के बाद तुरंत हीे गेहूं व मक्का की खेती के लिए खेत की जुताई भी कर चुके हैं. अब खाद्य बीज की जरूरत है, लेकिन रूपए नहीं रहने के कारण ऐसे किसान तैयार खेत में समय पर बीज की बुआई नहीं कर पा रहे हैं. किसानों ने बताया कि पिछले फसल से रुपया मिला था, उससे तो धान की खेती की थी. अब धान तैयार है तो बिक नहीं रहा है. जिसके कारण गेंहू व मक्का बीज लेने में असमर्थता है.
राजन बालन, जिला कृषि पदाधिकारी, मधेपुरा
अब तक धान की खरीदारी शुरू नहीं :

किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा सरकारी दर पर धान क्रय की तिथि व लक्ष्य का निर्धारण में देरी किया गया है. जिस कारण किसानों के बीच असमंजस की स्थिति बनी है. कई किसान मजबूरी में कम दर पर ही धान बेचना शुरू कर दिये हैं. धान की सुरक्षा में किसान खलिहान में ही दिन-रात गुजारने को विवश हैं. परेशान किसान प्रखंड के अधिकारियों से लेकर जिले के वरीय अधिकारियों के यहां धान बेचने के लिए गुहार लगा रहे हैं. इन सबके बावजूद एवं सरकार द्वारा धान खरीदारी के लिए 23 नवंबर को ही निर्देश देने के बावजूद अब तक धान की खरीदारी शुरू नहीं हुई है.

अमित कुमार भारती, सहकारिता प्रसार पदाधिकारी, मधेपुरा
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अच्छी हुई है धान की खेती : जिला कृषि पदाधिकारी राजन बालन ने कहा कि मधेपुरा जिला में खरीफ की मुख्य फसल धान है. इसके लक्ष्य का निर्धारण जिला कृषि विभाग द्वारा किया जाता है. जिले में पिछले वर्ष विभाग द्वारा 85 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान उपजाने का लक्ष्य रखा गया था. जिसके विरुद्ध पूरे जिले में 83696 हेक्टेयर जमीन पर धान की उपज की गई थी. जिसमें कुल उपज 249655 एमटी उत्पादन हुआ था. इस वर्ष विभाग द्वारा 75 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान उप जाने का लक्ष्य रखा गया था. जिसके विरूद्ध 74205 हेक्टेयर जमीन का लक्ष्य प्राप्त हुआ.  इस वर्ष कुछ शिकायतों को छोड़कर उत्पादन अच्छी हुई है. इस वर्ष कुल उपज 284876 एमटी उत्पादन हुआ है.
धान के बेचने के लिए आठ सौ किसान करा चुके निबंधन : किसानों का धान पैक्स के माध्यम से खरीद की जाती है. विभाग के द्वारा धान खरीद की तिथि व लक्ष्य का निर्धारण कर किसानों से ऑनलाइन माध्यम से धान की निर्धारित मूल्य पर खरीददारी करते हैं. जिसके लिए सरकार के निर्देश पर सहकारिता विभाग द्वारा 23 नवंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक तिथि निर्धारित किया गया है. धान बेचने के लिए आठ सौ से अधिक किसान निबंधन भी करवा चुके हैं. निबंधन करा चुके किसान धान को बोरे में डाल घर में रखे हये हैं. अब ऐसे किसान पेशोपेश में है कि कब सरकारी दर पर धान की खरीद शुरू होगी और कब हम अपना धान बेचकर नई फसल के लिए बीज खरीदेंगे. निबंधन कराने वाले कई किसानों ने विभाग के लेटलतीफी देख औने पौने दाम में ही धान बेचना शुरू कर दिये हैं.
1868 रूपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित : पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार सरकारी दर में खास वृद्वि हुई है. जानकारी के अनुसार इस वर्ष 1868 रूपए प्रति क्विंटल सरकारी दर से धान की खरीदारी की जायेगी. पिछले वर्ष 1615 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद हुई थी. सरकारी दर पर बढ़े दाम को देख किसान विभाग के द्वारा धान की खरीदारी के दिन का इंतजार रह रहे हैं.
39 डिफाल्टर पैक्स को धान खरीदने की अनुमति नहीं : जिला सहकारिता विभाग 183 पैक्स एवं व्यापार मंडल कार्यरत है. जिसमें से धान खरीद के लिए 144 पैक्स एवं व्यापार मंडल का चयन किया गया है तथा 39 पैक्स एवं व्यापार मंडल को डिफाल्टर घोषित किया गया है. सहकारिता विभाग के द्वारा डिफाल्टर घोषित किये गये पैक्सों को धान खरीदने की अनुमति नहीं होगी. व्यापार मंडल एवं अन्य पैक्सों को धान की खरीददारी करने की अनुमति व लक्ष्य दिया गया है.
पिछले वर्ष 38 हजार एमटी धान की हुई थी खरीददारी : जिले में पिछले वर्ष 40 हजार एमटी धान की खरीदारी का लक्ष्य रखा गया था. पिछले वर्ष धान की उपज भी कम हुई थी. वहीं पिछले वर्ष सहकारिता विभाग के निर्देश पर पैक्स एवं व्यापार मंडल द्वारा किसानों से सरकारी दर पर 38213.080 एमटी धान की खरीदारी की गई थी, लेकिन इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने के बाद भी खरीददारी शुरू नहीं हो पाने से किसानों में मायूसी व्याप्त है.
किसानों की मजबूरी का फायदा ले रहे बिचौलिये :  औने पौने दाम में धान बेच चुके किसान ने बताया कि साढ़े दस से ग्यारह सौ रूपए क्विंटल धान बेच देना पड़ा है. किसानों ने बताया कि गेहूं व मक्का के लिए खेत तैयार है. बीज के लिए रूपए की जरूरत थी. इसलिए कम दर में धान बेचना पड़ा है. धान खरीद नहीं होने से वे लोग परेशान हैं. शादी-विवाह व लग्न के दिन होने के कारण किसान धान बेचने को मजबूर हैं. इस बीच बिचौलिये हावी हो गये हैं. उन्हें किसानों को ठगने का मौका मिल गया है. धान की फसल उगाने में कर्ज में डूबे किसान अपनी गाढ़ी पूंजी धान को बिचौलियों के हाथ औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं. वहीं धान खरीद कर सेठ साहूकारों को बेच कर बिचौलिये मुनाफा कमा रहे हैं.
एक से दो दिन में शुरू हो जायेगी धान की खरीदारी : जिला सहकारिता विभाग के सहकारिता प्रसार पदाधिकारी अमित कुमार भारती ने बताया कि धान खरीद की सारी तैयारी पूरी है. डिफाल्टर पैक्सों एवं व्यापार मंडलों को धान खरीद की अनुमति नहीं मिलेगी. उन्होंने बताया कि धान खरीद के लिए समिति को निर्देश दे दिया गया है. जिसके बाद एक से दो दिन में सभी निबंधित किसानों से धान की खरीददारी शुरू करवाई जायेगी.

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