मधेपुरा : लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ कल से शुरू

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ आज से शुरू होने वाला है, ऐसे में घर से दूर रहना संभव नहीं होता है. देश के विभिन्न कोने में बसे शहर के लोग छठ के मौके पर घर आना नहीं भूलते हैं. अन्य मौके पर वे भले ही घर नहीं आयें, लेकिन छठ तो परिवार के साथ ही मनायेंगे. ट्रेन में नो रूम के बाद भी लोग 24 से 36 घंटे तक किसी तरह सफर कर घर पहुंच रहे हैं. मंगलवार को विभिन्न ट्रेनों एवं बसों से हजारों लोग छठ के मौके पर घर आये. गृह बसस्टैंड पर उतरने के साथ ही लोगों में जल्दी घर पहुंचने की बेचैनी थी. वहीं शहर पहुंच कर संतुष्टि का भाव भी था. इन लोगों से जब बातचीत की गयी, तो सभी ने कहा कि वे छठ पूजा में शामिल होने के लिए घर आये हैं.

साल में एक बार खुशियां मनाने का मौका : मुम्बई में थियेटर एवं फिल्मों में काम कर रहे जिला मुख्यालय के कर्पूरी नगर वार्ड नंबर 21 निवासी प्रियांशु ठाकुर ने बताया कि हर साल छठ पर्व में ही वे लोग घर आते हैं. यह एक ऐसा पर्व है, जिसमें घर परिवार गांव सभी लोग आपस में मिलकर खुशियां बाटते हैं. सिर्फ छठ में ही गांव आने का मौका मिलता है. साल भर छठ का इंतजार रहता है. परिवार के साथ पूजा होने से घर में उल्लास का माहौल रहता है. सभी लोगों से मुलाकात भी होती है. भले ही दूसरे मौकों पर घर नहीं लौट पायें, लेकिन छठ में घर से दूर रहना संभव नहीं है.

हर साल रहता है छठ का इंतजार : छपरा में एक निजी कंपनी में कार्यरत कॉलेज चौक वार्ड नंबर चार निवासी राकेश सिंह ने बताया कि छठ पर्व का हर साल इंतजार रहता है. काम की वजह से बार-बार घर आने का मौका नहीं मिलता है. छठ पर छुट्टी लेकर हर साल घर आते हैं. इसके लिए पहले से ही छुट्टी का आवेदन देते हैं. इस पर्व में घर से दूर रहना संभव नहीं है. छठ पर परिवार के लोगों को इंतजार रहता है कि सब लोग यहां पहुंचे. जब तक घर नहीं पहुंचता हूं तब तक एक बेचैनी बनी रहती है. घर पहुंच जाता हूं तो लगता है कि घर पहुंच गया. पर्व के मौके पर परिवार के अलावा दोस्तों से मिलने का मौका मिलता है. छठ पर्व पर अपनों से दूर नहीं रह पाते हैं, यह ऐसा पर्व है जो हमे अपनी संपन्न परंपरा से अवगत कराता है.


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