मधेपुरा : कोरोना के मद्देनजर ताजिया जुलूस पर पाबंदी, उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कारवाई

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अमन कुमार
संवाददाता, सदर
मधेपुरा

मधेपुरा/बिहार : कोरोना काल में मुहर्रम को शांतिपूर्वक एवं सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाने सहित इसके आयोजन के लिए बुधवार को मधेपुरा सदर थाना में सदर एसडीओ वृंदा लाल और सदर थानाध्यक्ष सुरेश प्रसाद सिंह की मौजूदगी शांति समिति की बैठक में हुई। जिसमें दोनों समुदाय बुद्धिजीवी, ताजिया जुलूस के आयोजकों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं दर्जनों समाज सेवी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान कोरोना महामारी और लॉकडाउन के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि इस बार मुहर्रम के जुलूस पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी।

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सदर एसडीओ वृंदा लाल ने कहा कि मुहर्रम के मौके पर ताजिया जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इसका उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर आयोजकों व संबंधित लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ ने कहा कि कोरोना महामारी को लेकर गृह मंत्रालय ने लॉक डाउन थ्री के तहत 31 अगस्त तक के लिए गाइड लाइन जारी की है। इसमें किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन या जमावड़े पर रोक लगाई गई है। उन्होंने इसका पालन करने के साथ-साथ बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड की अपील का भी शत-प्रतिशत पालन करने की बात कही।

शांति समिति की बैठक में कई लोगो ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। वहीं सदर थानाध्यक्ष ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी अप्रिय घटना की सूचना उन्हें तुरंत दें, पुलिस कार्यवाही करेगी।

मुहर्रम को लेकर जारी दिशा निर्देश :

इस वर्ष मोहर्रम 30 अगस्त तक मनाने की संभावना है । कोरोना महामारी को लेकर गृह मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा अनलॉक 3.0 के तहत 30 अगस्त तक के लिए गाइड लाइन जारी की गई है। इसके अंतर्गत किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन या जमावड़े पर रोक लगाई गई है। गृह विभाग बिहार सरकार के द्वारा भी अनलॉक 3.0 की अवधि की छह सितंबर तक विस्तारित करते हुये सभी धार्मिक स्थलों को आम लोगों के लिए बंद रखने तथा किसी प्रकार का धार्मिक जमावड़ा नहीं लगाने का निर्देश दिया गया है।

इस बाबत बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने भारत सरकार एवं बिहार सरकार के दिशा निर्देश तथा कोरोना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए मुहर्रम मनाने की अपील की है।

अलम, ताजिया, सिपर अथवा अखाड़े का कोई भी जुलूस नहीं निकाला जायेगा, शस्त्र प्रदर्शन नहीं किया जायेगा तथा लाउडस्पीकर का भी उपयोग नहीं किया जायेगा, किसी भी सार्वजनिक स्थल पर ताजिया नहीं रखा जायेगा एवं अखाड़े का आयोजन नहीं किया जायेगा, साथ ही इमामबाड़ा, अजाखाना एवं जरीखाना की साफ-सफाई, रोशनी एवं सजावट की जायेगी, लेकिन उसमें लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं की जायेगी, इमामबाड़ा एवं अजाखाना में मजलिस, मरसिया एवं नौहा पढ़ने वाले व्यक्ति के अलावा आवश्यक प्रबंध के लिए बहुत सीमित संख्या में ही इमामबाड़ा की प्रबंध समिति के सदस्य सोशल डिस्टेंस के साथ उपस्थित रह सकते हैं, मजलिस, मरसिया एवं नौहा का प्रसारण जूम एप एवं अन्य डिजिटल माध्यम से किया जायेगा, जिसे आम आदमी अपने घरों में बैठकर देख एवं चुन सकते हैं, इमामबाड़ा में स्थानीय व्यक्तियों को एकत्र होने की अनुमति नहीं दी जायेगी, अपने अपने घरों में केवल अपने परिवार के सदस्य के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये मजलिस का आयोजन किया जा सकता है, इमामबाड़ा एवं अजाखाना में मजलिस के तबर्रुक का वितरण नहीं किया जायेगा, बल्कि उसका पैकेट बनाकर लोगों के घरों तक पहुंचाया जायेगा, तबर्रुक के लिये कभी भी भीड़ नहीं लगाई जायेगी, यौमे आशूरा के दिन फूल लेकर जुलूस की शक्ल में कर्बला मैदान नहीं जाया जायेगा, बल्कि दो-तीन आदमी किसी वाहन से फूल लेकर कर्बला मैदान तक पहुंचायेंगे।  


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