मधेपुरा : 65 वर्ष की आयु तक नियमित की जाय अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार बिहार प्रदेश विश्वविद्यालय अतिथि शिक्षक समिति के आवाहन पर बीएनएमयू इकाई द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में विश्वविद्यालय अध्यक्ष डा सतीश कुमार दास की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय परिसर स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना आयोजित की गई।

 मौके पर उपस्थित अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने अपनी मांगों के समर्थन में तथा राज्य सरकार के विरुद्ध जमकर नारे लगाये। बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों में भी अतिथि सहायक प्राध्यापकों की ओर से धरना आयोजित कर बिहार सरकार से समस्याओं के निदान के लिये मांग की गई है।

 संघ के अध्यक्ष डा सतीश कुमार दास ने कहा कि बिहार सरकार ने विश्वविद्यालयों में लगभग ठप शिक्षा-व्यवस्था को सुधारने के लिये लगभग दो हजार की संख्या में अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की, जिस तरह की प्रक्रिया से विश्वविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है, ठीक उसी तरह से इन अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है।

योग्य उम्मीदवार का चयन करके हुई है अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति : अध्यक्ष डा सतीश ने कहा कि यूजीसी की नियमावली, बिहार सरकार के नियम एवं निर्देश तथा बीपीएससी द्वारा अन्तर्वीक्षा के मापदंडो पर विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञापन निकालकर, योग्य उम्मीदवार का चयन करके, अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है। जब अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने सरकार का साथ देकर बुझती हुई शिक्षा का अलख जगाये रखा है तो अतिथि सहायक प्राध्यापकों की उचित मांगों पर भी ध्यान देना सरकार की जवाबदेही बनती है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को मात्र एक हजार रुपया प्रति कक्षा दर से अधिकतम 25 हजार रुपया मासिक मानदेय दिया जाता है, जबकि यूजीसी के नये प्रावधान के अनुसार इन्हें 15 सौ रुपया प्रति कक्षा दर से अधिकतम 50 हजार रुपया मासिक मानदेय मिलना चाहिये। इधर बिहार सरकार ने विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिये नई नियमावली प्रकाशित की गई है,  जिसके कारण भारी असंतोष व्याप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि न तो नई नियमावली और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा की जानेवाली संशोधन की घोषणा में अतिथि सहायक प्राध्यापकों के संबंध में कुछ कहा गया है। ऐसी हालत में उन्हें पूर्ण आशंका है कि अतिथि सहायक प्राध्यपकों को बिहार सरकार दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंकना चाहती है।

65 वर्ष की आयु तक नियमित की जाय अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा : संघ के महासचिव डा दीपक कुमार ने बिहार सरकार से तीन मुख्य मांग की है। उन्होंने कहा कि बिहार के सभी अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा 65 वर्ष की आयु तक नियमित की जाय। यूजीसी द्वारा प्रदत अधिकतम 50 हजार रुपया मासिक मानदेय निर्धारित की जाय, बिहार के हित में अन्य राज्यों की तरह डोमिसाइल नीति लागू की जाय।

धरना को डा धर्मेंद्र कुमार, डा सिकंदर कुमार, डा हरित कृष्ण, डा रफत परवेज, डा संजय, डा संतोष कुमार, डा अरूण कुमार साह, डा पंकज कुमार यादव समेत अन्य अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने संबोधित किया।

 धरना में डा अखिलेश कुमार मिश्रा, डा मनोज कुमार, डा शशिभूषण कुमार सुमन, डा एहतेशाम आलम, डा छोटे लाल यादव, डा सुमेध आनंद, डा रामप्रकाश कुमार आदि उपस्थित थे।


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