राज्यपाल ने बीएनएमयू कुलपति को दी नये सिरे से टेंडर कराने की अनुमति

728x90
Spread the news

» आईटीआई कंपनी का कांट्रेक्ट रद्द होना आंदोलन की सफलता : डा जवाहर  

यूएमआईएस को हटाने को लेकर अभाविप ने किया था मांग » यूएमआईएस कंपनी का कांट्रेक्ट रद्द होने से छात्रों में खुशी

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपर/बिहार : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में संचालित यूएमआईएस के लिए राजभवन ने नये सिरे से टेंडर कराने के लिये अनुमति दे दी है। इसको लेकर राज्यपाल सचिवालय के अपर सचिव राम अनुग्रह नारायण सिंह ने बीएनएमयू के बीएनएमयू कुलपति प्रो डा ज्ञानंजय द्विवेदी को पत्र भेजा है, जिसमें कहा गया है कि 28 जुलाई के पत्र के आलोक में कुलाधिपति फागू चौहान ने नया टेंडर हायर करने की अनुमति दे दी है।

 मालूम हो कि बीएनएमयू में यूएमआईएस का संचालन आटीआई कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। यूएमआईएस में कथित गड़बड़ी को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों, सीनेट-सिंडिकेट सदस्यों आदि ने कुलपति व राजभवन को पत्र लिखकर आईटीआई कंपनी के टेंडर को रद्द करने की मांग की थी। इसके बाद राजभवन ने संज्ञान लेते हुये कुलाधिपति फागू चौहान ने बीएनएमयू कुलपति प्रो डा ज्ञानंजय द्विवेदी को नया टेंडर हायर करने को कहा है। वहीं इस बावत में बीएनएमयू कुलपति प्रो डा ज्ञानंजय द्विवेदी ने कहा कि राजभवन के निर्देशों को अक्षरश: पालन किया जायेगा।

आईटीआई कंपनी का कांट्रेक्ट रद्द होना आंदोलन की सफलता-डा जवाहर  : विश्वविद्यालय में कार्यरत यूएमआईएस कंपनी आईटीआई पर बीएनएमयू कुलपति प्रो डा ज्ञानंजय द्विवेदी के द्वारा कार्रवाई करना एवं कुलाधिपति द्वारा नये कांट्रेक्टर करने का आदेश देना, आंदोलन की जीत है। यह बात सिंडिकेट सदस्य डा जवाहर पासवान ने प्रेस बयान जारी कर कही। उन्होंने कहा कि बीएनएमयू कोसी प्रमंडल में अवस्थित है, जो गरीब, दलित- महादलित, शोषित-पीड़ित, पिछड़ों का क्षेत्र है। यूएमआईएस कंपनी आईटीआई ने छात्र-छात्रओं एवं अभिभावकों का आर्थिक एवं मानसिक दोहन किया है। छात्र-छात्रओं से पंजीयन के नाम पर तीन सौ रूपये लिये गये एवं कालेज एवं विषय चेंज करने के नाम पर भी काफी पैसा लूटा गया, अब कुलपति से उम्मीद है कि वे एक सौ से कम रूपए में नया कांट्रेक्ट करें एवं छात्र-छात्रओं से पंजीयन शुक्ल के रूप में मात्र  50-60 रूपए लिया जाय।                   उन्होंने कहा है कि यूएमआईएस कंपनी आईटीआई का कांट्रेक्ट रद्द होना, आंदोलन की आंशिक सफलता है। यूएमआईएस का कांट्रेक्ट आईटीई कंपनी से किया गया है, जिसने किसी दूसरे को पेटी कांट्रेक्ट दे दिया है। ऐसे में यह कांट्रेक्ट फर्जी माना जाना चाहिये। साथ ही कार्य संतोषजनक नहीं होने के बावजूद आईटीआई कंपनी को लगभग एक करोड़ 15 लाख रूपये भुगतान कर दिया गया। ऐसी आशंका है कि इसमें काफी लेनदेन हुआ है। यूएमआईएस की वर्तमान कंपनी ने जिन कामों को नहीं किया है, उससे संबंधित राशि भी भुगतान कर दी गई है। ऐसे राशि की रिकवरी होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि यूएमआईएस को दिये गये सभी संसाधनों को वापस लेना चाहिये। आईटीआई कंपनी से विश्वविद्यालय का डेटा वापस लेना चाहिये, यह सुनिश्चित किया जाय कि कंपनी डेटा का दुरुपयोग नहीं करे।

यूएमआईएस को हटाने को लेकर अभाविप ने किया था मांग : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के यूएमआईएस में चल रहे अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ अभाविप के द्वारा भी इसे हटाने का मांग किया गया था। अभाविप के विश्वविद्यालय प्रमुख सह विश्वविद्यालय सीनेट सदस्य रंजन यादव ने कहा कि उन्होंने सिनेट में भी इसके अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन पूर्व के कुलपति व इसमें संलिप्त अन्य पदाधिकारी द्वारा करोडों के खेल में इसको बचाने तथा इसके एक्सटेंशन के लिए हरसंभव प्रयास किया गया। पूर्व के कुलपति के सेवानिवृत्त होने के बाद भी सबसे पहले यूएमआईएस में हो रहे हैं अनियमितता के खिलाफ अभाविप ने राजभवन, राज्य सरकार, वर्तमान कुलपति से जांच कर कारवाई की मांग की थी। अब राजभवन ने मामले को संज्ञान में लेते हुये किसी दूसरे कंपनी को टेंडर देने का आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए अभाविप कुलाधिपति फागु चौहान एवं वर्तमान कुलपति प्रो डा ज्ञानंजय द्विवेदी को धन्यवाद देता है। साथ ही अभाविप मांग करता है कि छात्रों को कम से कम शुक्ल में बेहतर सुविधा देने वाले कंपनी को ही आगे का काम दिया जाय, साथ ही साथ यूएमआईएस में डेढ़ करोड़ रुपए के बंदरबांट की जांच कर, पैसा वसूल कर, कारवाई की जाय।

यूएमआईएस कंपनी का कांट्रेक्ट रद्द होने से छात्रों में खुशी : यूएमआईएस कंपनी का कांट्रेक्ट रद्द होने से छात्रों में खुशी की लहर है। मधेपुरा युथ एसोसिएशन के अध्यक्ष सह भाजयूमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राहुल यादव ने कहा कि विवि में हुये यूएमआईएस पोर्टल घोटाले को लेकर मधेपुरा युथ एसोसिएशन ने भी लगातार मुहिम चलाया और कुलपति एवं कुलाधिपति को ज्ञापन दिया। इसका परिणाम हुआ कि महामहिम कुलाधिपति ने यूएमआईएस सर्विस कंपनी आईटीआई का कांट्रेक्ट निरस्त कर, नई कंपनी से टेंडर करने का आदेश दिया है। हम महामहिम के आदेश का स्वागत करते हैं और इसके लिए महामहिम के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। कुलपति प्रो डा ज्ञानंजय द्विवेदी भी धन्यवाद के पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि यूएमआईएस कंपनी आईटीआई ने छात्रों का काफी शोषण किया। कंपनी ने छात्रों से पंजीयन के रूप में तीन सौ रुपया लिया और विवि से भी प्रति छात्र तीन सौ रुपया शुल्क लिया जाता था, यह अत्यंत ही आपत्तिजनक है। हम कुलपति से मांग करते हैं कि अब विवि प्रशासन 60 रुपया में नया कांट्रेक्ट करे। इसी के आसपास सभी विवि का शुल्क है। यूएमआईएस कंपनी आईटीआई का कार्य संतोषजनक नहीं था और वित्तीय परामर्शी ने भी इस पर आपत्ति की थी। इसके बावजूद विवि के पूर्व कुलपति एवं पूर्व प्रतिकुलपति ने आईटीआई कंपनी को में एक करोड़ 15 लाख अग्रिम भुगतान कर दिया, इसकी जांच आवश्यक है एवं राशि राशि की रिकवरी की जाय। आईटीआई का कांट्रेक्ट रद्द करना इस पोर्टल घोटाला में छात्र-छात्राओं की पहली जीत है।


Spread the news