नालंदा : अपने ड्राइवर की मौत पर सर्किल इंस्पेक्टर ने पेश की इंसानियत की खूबसूरत मिसाल

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मुर्शीद आलम
नालंदा ब्यूरो
बिहार

नालंदा/बिहार : जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के सर्किल इंस्पेक्टर मोहम्मद मुस्ताक खान ने कहा कि अल्पसंख्यक खासकर मुसलमानों में ऐसे लोग भी हैं, जो जात और धर्म से ऊपर उठकर अक्सर कुछ ऐसे काम कर जाते हैं, जिसकी मिसाल मिलनी मुश्किल होती है। उनके दिल में ना तो छल कपट होता है और न ही भेदभाव। बल्कि, उन्हें चिंता होती है तो केवल मानव जाति और उनके भविष्य के उत्थान  की। उन्हें परेशानी में देखकर उनके लिए हर समय बेचैन रहने की फिक्र उन्हें  हर समय  सताती रहती है।  

यही कारण है कि जब किसी मनुष्य पर कोई परेशानी आती है ऐसे लोग। मुसीबत की हालत में उनके साथ खड़े होते हैं। इस प्रकार का मामला आज बिहार शरीफ के पुलिस विभाग में देखने को मिला। जिस पुलिस के खिलाफ कई प्रकार के आरोप मढ़े जाते हैं, उसी पुलिस अधिकारी ने ऐसा काम कर दिया जिसका उदाहरण नहीं मिलता।

बताया जाता है कि जिला गोपनीय शाखा के अधिकारी व सर्किल इंस्पेक्टर मो. मुस्ताक ने सड़क दुर्घटना में देहांत हुए अपने चालक के दुख में कई रोज़ तक नीढाल नजर आए। इतना ही नहीं उनके गुनाहों की माफी और उन्हें  स्वर्ग में स्थान मिले  इसके  लिए अपने धर्म के हिसाब से कुरान ख्वानी भी करवाई। बताया जाता है कि 5 दिन पहले सर्किल इंस्पेक्टर मोहम्मद मुस्ताक अपनी टीम के साथ जा रहे थे। उसी दौरान शाहजहांपुर थाना क्षेत्र में एक ट्रक ने उनकी गाड़ी को कुचल दिया। उस समय उनकी गाड़ी सड़क किनारे खड़ी थी और मोहम्मद मुस्ताक व उनकी टीम गाड़ी के बाहर थी। सिर्फ चालक गाड़ी में बैठा था। इस कारण चालक की मौत घटनास्थल पर ही हो गई।

इस घटना का सदमा मुस्ताक साहब को काफी गहरा लगा। उन्होंने साथी चालक के सभी काम स्वयं अपने हाथों से किया  इसके  अलावा अंतिम प्रक्रिया भी खुद से पूरी की। बावजूद वे इस घटना को भूल नहीं पा रहे थे। लगातार पांच दिनों तक क्वार्टर में बेशुद्ध पड़े रहे। आज उन्होंने चालक के नाम से कुरआन ख्वानी करवाई।

जब हमने उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चालक तरुण इसी शहर का रहने वाला था। इसके साथ ही वह मेहनती, ईमानदार, शरीफ और नेक व्यक्ति था। उसने कभी भी महसूस नहीं होने दिया कि वह मुसलमान नहीं है। उसने कुर्बानी में भी हमारा साथ दिया। जब तक कुर्बानी होती रही, तबतक हमारे साथ लगा रहा। उसके देहांत का दुख मैं भूल नहीं पा रहा हूँ। इसी कारण से उन्होंने एक भाई की तरह सभी धार्मिक कर्मकांड खुद की। अगर देखा जाए तो उन्होंने मानवता, सेकुलरिज्म का एक उदाहरण स्थापित किया। जिसे पुलिस विभाग हमेशा याद करता रहेगा।


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