अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर ” द रिपब्लिकन टाइम्स” की अतिथि संपादक प्रसन्ना सिंह राठौर की कलम से

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प्रसन्ना सिंह राठौर
अतिथि संपादक

           “अन्तर्राष्ट्रीय  युवा दिवस ” पूर्णतः युवाओं को समर्पित दिवस है। इस दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1999 में अन्तर्राष्ट्रीय युवा सम्मेलन में लिए पारित प्रस्तावों के आधार पर वर्ष 2000से हुई। इस दिवस को मनाने का मूल आधार गरीबी को दूर करने, निरन्तर विकास को गति देने में युवाओं की भूमिका को तेज करना है। इस दिवस को मनाने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि इसके सहारे सरकार युवाओं की उम्मीद और उसकी सोच को आसानी से प्राप्त कर समाज और राष्ट्र में उनकी भूमिका को विश्व पटल पर तय कर सके।आकड़ें साफ दर्शाते हैं कि निम्न आय वाले देशों में 10% लोग ही माध्यमिक शिक्षा तक का सफर तय कर पाते हैं वहीं विश्व मानचित्र पर लगभग 40% आबादी किसी ऐसी भाषा का भी ज्ञान नहीं प्राप्त कर पाती जिसे बोलने और समझने में वह पूर्णतः सक्षम हो।

ऐसे विषम परिस्थितियों में युवाओं के सफल भूमिका की उम्मीद की सोच मुकाम तक का सफर पूरा नहीं कर सकती इन्हीं हालातों से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर युवा दिवस मनाने की शुरुआत हुई । इस संदर्भ में भारत की भूमिका बहुत खास हो जाती है, क्योंकि मुल्के हिन्दुस्तान को दुनिया युवाओं के देश के नाम से जानती है। हमारे देश में 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की संख्या कुल आबादी में 60% से भी ज्यादा है। मतलब साफ कि यहां विपुल श्रम शक्ति है, बस जरूरत है उसे सही दिशा देकर उसके सकारात्मक उपयोग कर देश के बढ़ते कदम में भागीदार बनाने की। सही दिशा देने के लिए युवाओं के चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देने की जरूरत है जिसके अन्तर्गत उसके अंदर उचित संस्कार डालने,उचित शिक्षा के साथ किसी कला में दक्ष बनाने और बुरी आदतों से दूर रखने की है। यह सब तभी सम्भव है जब शिक्षा की सार्थकता को पहली प्राथमिकता मिले और ईमानदार प्रयास हो । अगर युवाओं के अंदर सही चरित्र निर्माण किया जाए तो इसमें कोई शक नहीं कि वो राष्ट्र की उन्नति को नई दिशा देने में पूर्णतः कामयाब होगा । लेकिन इसमें कमी रह गई तो ऐसे युवा समाज और राष्ट्र का भला तो दूर अपना भला भी नहीं कर सकते और सबके लिए भार बन जाते हैं। भारत जैसे विकसित देश में यह नितांत जरूरी है कि यहां के युवाओं को मेधावी, श्रमशील ,देशभक्त, समाजसेवी के गुणों से परिपूर्ण किया जाए।

अगर ऐसा हो सका तो भारत को विकासशील राष्ट्र की कड़ी से निकाल कर विकसित की कड़ी में आने से कोई नहीं रोक सकता। भारत जैसे देश में जहां युवाओं का बड़ा हिस्सा धर्म के अन्धकार, राजनीति के कीचड़, लैंगिक भेदभाव, जात पात और अलग – अलग नशा का शिकार हो वहां यह उम्मीद खुद से भी बेईमानी लगती है। लेकिन एक सच यह भी है कि इस जहां में कुछ भी असम्भव नहीं रहा। अगर इस क्षेत्र में सकारात्मक पहल ईमानदारी से हो तो यह सपना हकीकत बनेगा वह दिन दूर नहीं । अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस के बहाने  अगर हम इस सपने को हकीकत में लाने के लिए कुछ भी पहल करें तो इस दिवस की यही सच्ची सार्थकता होगी।

” द रिपब्लिकन टाइम्स “ परिवार की ओर से सभी युवाओं को अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं


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