मधेपुरा : लाक डाउन में AISF के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य की छात्रों से अपील, पुस्तकों को मित्र व पथ प्रदर्शक बनाएं।

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ऋषि सिंह
सदर संवाददाता
मधेपुरा,बिहार

मधेपुरा/बिहार : लाक डाउन में हर कोई अपने घरों में कैद है। जीवन का चक्र पूरी तरह थम सा गया है। पहली बार जीवन में समय की उपयोगिता के रास्ते नजर नहीं आ रहे। अलग-अलग तरीके से लोग समय व्यतीत करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

आजादी के आंदोलन में सहभागिता देने का एकलौता गौरव रखने वाला छात्र संगठन एआईएसएफ की तरफ से भविष्य की तस्वीर युवाओं से अपील करते हैं कि इस खाली समय में पुस्तकों से जुड़े और ज्ञान के क्षेत्र को बढ़ाएं। अभी पुस्तकों से मित्रता को गाढ़ी करने का सही समय भी है इसे अपनाने का। पुस्तकों की उपयोगिता का अंदाजा इसी  से लगाया जा सकता है कि इसको सर्वश्रेष्ठ मित्र व पथ प्रदर्शक का दर्जा प्राप्त है। पुस्तकों के संकलन से इंसान की पहचान भी होती है। पुस्तकें सच्चे अर्थों में अंधेरे में उजाला और एकांत में सहयोगी की भूमिका निभाती है। इसकी उपयोगिता को  बरकरार रखना ही नहीं बल्कि इसके महत्व को और अधिक स्तर तक ले जाना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व भी है।

किताबों में ज्ञान देने के साथ मनोरंजन करने की भी अनोखी क्षमता होती है। निसंदेह पुस्तको से सिर्फ जानकारी ही नहीं मिलती बल्कि कुछ  ऐसी दिलचस्प जानकारियां भी प्राप्त होती है जिससे मनोरंजन भी होता है। वक्तृत्व कला सुधारने का बेहतर विकल्प भी अच्छी  पुस्तकों से ही निकलती है। सनद रहे पुस्तक पढ़ने से पहले पुस्तकों का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है।

पुस्तकों का महत्व: पुस्तकें हमारे लिए उपयोगी होने के साथ ही भावी पीढ़ी के लिए भी बहुत उपयोगी है। अलग-अलग दौर की उपलब्ध पुस्तको के आधार पर ही हम उस दौर से जुड़ी खास जानकारी प्राप्त कर पाते हैं। पुस्तके अलग-अलग विषय का अहम ज्ञान कराने के साथ साथ हमारे सोचने, समझने और अपनी बात रखने में हमें निपुण बनाती है। पुस्तकों के सम्बन्ध में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जहां कहा कि नौ रत्नों से बढ़कर पुस्तक अनमोल रत्न है जिसकी कोई कीमत नहीं है। वहीं चर्चित साहित्यकारों में अमित नाम बर्नाड शों ने कहा कि विचारों के युद्ध में किताबें ही अस्त्र होती हैं। किताबों में परिपक्व सार्थक व प्रमाणिक ज्ञान  सुलभ होता है। जब इंसान बहुत विचलित हो और पुस्तकों में खो जाए तो उसकी सारी परेशानी दूर ही नहीं हो जाती बल्कि उसे सही मार्ग का ज्ञान भी होता है । किसी ने तो पुस्तकों के अध्यन को दूसरी दुनिया का दीदार तक कह दिया है। वर्तमान दौर में डिजिटल दुनिया आने के कारण पुस्तकों के महत्व में कुछ कमी आई है लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं, क्योंकि पुस्तके किसी एक दौर की नहीं बल्कि इसे तो और कई दौर को देखना और सींचना है।

पुस्तकों के प्रति आकर्षण में आई कमी को दूर करने के लिए एआईएसएफ आप छात्र युवा सहित समस्त पाठक वर्ग से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में  भी बुके की जगह बुक देने की परंपरा को प्रमुखता दें, इस पहल को भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी राष्ट्र के सामने प्रस्तावित किया है। पुस्तकों  के सम्बन्ध में चर्चित शायर अहसन इमाम अहसन ने शायद ठीक ही कहा कि …..

गौर से पढ़ सको तो समझोगे

एक दिलकश किताब है दुनिया!


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