किशनगंज : मुश्किल हालात से निपटने के लिए बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुमन सिंह का एक और सराहनीय कदम

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हमारे दिल की तड़प को अनजान क्या जाने ! 

प्यार किसे कहते हैं वो नादान क्या जाने !!

हवा के साथ उड़ गया घर एक परिंदे का !

कैसे बना था घोसला वो तूफान क्या जाने !!

शशिकांत झा
वरीय उप संपादक

किशनगंज/बिहार :  लॉक डाउन में जो जहाँ थे वहीं रह गये। घर परिवार, बच्चों की फिक्र और घर में बूढ़े बीमार मां-बाप की चिंता,  ईंसानों की रुहें कंपाकर रख देती है। ऐसे मुश्किल हालात में किशनगंज जिले की बहादुरगंज पुलिस ने एक अनोखी पहल का शुभारंभ किया है। जिसके तहत बहादुरगंज पुलिस महकमे ने अपने बल बूते “फ्री एम्बुलेंस सेवा” की शुरुआत की है ।

लॉक डाउन में बंद आवागमन की असुविधाओं के बीच यह सेवा गरीब-बेबस लाचार एवं बीमारों के लिए वरदान साबित होगी। बताना लाजमी है कि, शुक्रवार को दिन के लगभग चार बजे बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुमन कुमार सिंह के फोन की घंटी बज उठी। खबर मिली कि एक्सीडेंट हुआ है। ठीक उसी समय भाड़े पर ली गई एम्बुलेंस गाड़ी थाने में आकर लगी। थानाध्यक्ष ने एक नजर एम्बुलेंस को देखा और उसे लेकर बहादुरगंज अस्पताल पहुंचे। जहाँ दिघलबैंक प्रमुख के बेटे कार्तिक सिंह अचेतावस्था में पड़ा था, उसके सिर में गंभीर चोट लगने से डाक्टरों ने उसे बेहतर ईलाज के लिए रेफर कर दिया।  घायल को एम्बुलेंस में लेकर आनन फानन में सिल्लीगुड़ी के लिए निकल पड़ा। जहाँ घायल का उपचार चल रहा है ।

इसे इत्तेफाक कहें या ईश्वर की कृपा कि इस एम्बुलेंस के अलावे अस्पताल के आसपास कोई गाड़ी उपलब्ध नहीं थी । याने एम्बुलेंस के आते हीं इसकी सेवा से घायल को बेहतर ईलाज की सुविधा मिल पाई ।

ऐसे में बहादुरगंज पुलिस परिवार ने जनसेवा का एक और उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए इसे आमलोगों की सेवा में समर्पित कर दिया है ।

 

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