दर्द-ए-लॉकडाउन : मधेपुरा रैन बसेरा में रह रहे गरीबों की फ़रियाद, हुजूर दर्द को समझने वाला कोई नहीं

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा लॉकडाउन कर दिया गया है ।  सरकार द्वारा जिला प्रशासन को यह आदेश दिया गया था कि जो भी बाहरी व्यक्ति आये, उसे सदर अस्पताल में जांच के उपरांत जरूरत के अनुसार क्वॉरेंटाइन में रखा जाय । जिला प्रशासन ने भी सख्ती दिखाते हुये सभी सार्वजनिक स्थलों की छापेमारी कर बाहर से आए लोगों को जांच कर जरूरत के अनुसार लोगों को अस्पताल के क्वॉरेंटाइन में तथा होम क्वॉरेंटाइन में रखा गया । साथ ही जरूरतमंद लोगों को नगर परिषद के रैन बसेरा में रखकर उसे भोजन पानी के साथ साथ आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा कर रखा जा रहा है । वही इन लोगों की देखभाल के लिए जिला प्रशासन द्वारा तीन शिफ्ट में एक मजिस्ट्रेट के साथ महिला एवं पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई है ।

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रैन बसेरा में रह रहे लोगों की सुधि लेने वाला कोई नहीं : इसी दौरान 29 मार्च के रात्रि को दौराम मधेपुरा स्टेशन से 13 लोगों को पकड़कर रैन बसेरा में रखा गया । लोगों को रैन बसेरा में रखकर भोजन पानी तो उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन उन लोगों के स्थिति से ना तो नगर परिषद अवगत हो रही है और ना ही जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग अवगत हो रही है । रैन बसेरा में अभी 13 लोगों को रखा गया है, जिसमें से सहरसा निवासी उपेंद्र कामत की तबीयत बिगड़ने के कारण सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, बाकी बचे 12 लोगों को समय पर चाय नाश्ता एवं भोजन पानी तो दिया जा रहा है, लेकिन उनलोगों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है । लोगों ने बताया कि उन लोगों को जब से रखा गया है, तब से वे लोग मास्क एवं सैनिटाइजर की मांग कर रहे हैं, अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है ।

हुजूर दर्द को समझने वाला कोई नहीं: रैन बसेरा में उपस्थित लोगों ने बताया कि उन्हें यहां रख दिया गया है, उसके बाद सिर्फ भोजन पानी दिया जा रहा है ।  रैन बसेरा में उपस्थित लोगों में से कई लोग घर जाना चाहते हैं, उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है । रैन बसेरा में मौजूद 12 लोगों में से कई मजदूर वर्ग के लोग हैं जिन्हें रैन बसेरा में रहने की जरूरत थी लेकिन उनमें से कई लोग ऐसे हैं जो कहीं से पूजा पाठ करके वापस घर जा रहे थे, रात्रि विश्राम के लिए वे दौराम मधेपुरा स्टेशन पर रुके थे । जिन्हें लाकर रैन बसेरा में रख दिया गया । लोगों ने कहा कि वे लोग चाहते हैं कि उन लोगों की भी जांच कर, उन्हें घर वापस भेज दिया जाए । उन लोगों ने कहा कि उनके घर वालों को यह तक पता नहीं है कि अभी हमलोग कहां हैं । वही सुपौल जिला निवासी लालमणि देवी ने बताया कि उनके घुटने में चोट लगी हुई है, जिसे लेकर बहुत दर्द हो रहा है । जिसकी सूचना वहां मौजूद मजिस्ट्रेट एवं पुलिस कर्मियों को दे रहे हैं । उनके द्वारा बार-बार डॉक्टर के आने को लेकर कहा जा रहा है लेकिन अब तक कोई नहीं आया है ।

बेवजह किया है कैद, घर वाले को पता तक नहीं हमलोग हैं कहां : मधेपुरा जिले के भेलवा निवासी दुलारी दासीन ने कहा कि वह अपनी बेटी के घर से अपने घर वापस जा रही थी, लॉक डाउन होने के कारण कोई भी वाहन नहीं मिला, जिसके कारण वह पैदल ही घर जा रही थी, रात्रि होने के कारण वह दौराम मधेपुरा स्टेशन पर रुक गई, इसी बीच जिला प्रशासन के द्वारा उन्हें उठाकर रैन बसेरा में रख दिया गया । उन्होंने बताया कि उनके पास घरवालों को सूचना देने का कोई साधन नहीं है । घर वाले भी अब परेशान हो रहे होंगे । उन लोगों को तो यह तक पता नहीं होगा कि अभी मैं कहां हूं ।

 रैन बसेरा में उपस्थित 13 लोगों में सहरसा निवासी उपेंद्र कामत, सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर निवासी बद्री शर्मा, मधेपुरा जिले के सिंघेश्वर प्रखंड निवासी नरेश दास, पूर्णिया जिला निवासी सुरेश ऋषिदेव, सुपौल जिला निवासी राजू सिंह, सुपौल जिला निवासी रुखसाना, सुपौल जिला निवासी लालमणि देवी, सहरसा जिला निवासी जोगिंदर पासवान, मधेपुरा जिले के भेलवा निवासी दुलारी दासीन, सहरसा जिला निवासी दुखनी देवी, जिला मुख्यालय के कॉलेज चौक निवासी इसराफील, मधेपुरा जिले की निवासी हसीना एवं पूर्णिया जिला निवासी पूजा शामिल है ।


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