मधेपुरा : भारत का इतिहास जोड़ने का रहा, तोड़ने का नहीं-वर्तमान की जवाबदेही भविष्य को तबाह होने से रोके -राठौर

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एन आर सी, सी ए ए, एन पी आर  ने राष्ट्र को बना दिया अशांत -राठौर

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : मधेपुरा मस्जिद चौक पर विगत बारह दिनों से ज्यादा से चल रहे अनिश्चित कालीन धरना लगातार जारी है। धरने में शामिल औरतों की बड़ी आबादी संग बड़ी संख्या में भाग ले रहे पुरुष लगातार एक सूत्री मांग पर डटे हैं कि सरकार एन आर सी, सी ए ए, एन पी आर के बेतुके फैसले और योजना को यथाशीघ्र वापस ले ।

सोमवार को देर शाम धरना स्थल पर पहुंचे वाम छात्र संगठन ए आई एस एफ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य सह राज्य उपाध्यक्ष हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार के बेतुके फैसले रूपी एन आर सी, सी ए ए, एन पी आर से देश पूरी तरह अशांत हो गया है। समाज के सभी वर्ग के लोग बड़ी तादाद में घर से बाहर निकल कर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। सरकार अगर जल्द अपने फैसले को वापस नहीं लेगी तो उसे इसकी बड़ी क़ीमत चुकानी होगी।

प्रखर वक्ता राठौर ने कहा कि भारत का इतिहास जोड़ने का रहा है, तोड़ने का नहीं। इसे सरकार को समझने की जरूरत है। सरकार के पास विकास के सार्थक मुद्दे नहीं है इसलिए देश में ऐसे अनावश्यक काम  हो रहे हैं। राठौर ने कहा कि अब भी वक्त है सरकार तानाशाही रवैया पर विराम लगाए अन्यथा अंजाम बहुत बुरा होगा । बड़ी संख्या मां – बहनों का घर से बाहर निकलना एक नया अध्याय लिख रहा है। इतिहास गवाह है जब जब औरतों ने कमान संभाली है तब तब सत्ता के सिंहासन में भूचाल आया है।

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उन्होंने कहा कि पूरे भारत में सरकार के इस लावारिस फैसले के खिलाफ लोग सड़क पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी की जवाबदेही है कि भविष्य को तबाह होने से रोके। धरना को संबोधित करते हुए मुन्ना कुमार और दिनेशचंद्र ने कहा कि लगातार मुसलमानों पर हो रहे हमले देश को बांटने की साजिश का हिस्सा है। ऐसा करने वाले कभी भी किसी कौम के हिस्सा नहीं हो सकते । अभी के दौर में कुछ गोडसे भक्त नापाक इरादों से आपसी भाईचारे को चोट करने की कोशिश कर रहे हैं।

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मो दिलशाद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह दुखद है जिनका देश निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा वो आज भाग्य विधाता बन बैठे हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। धरना को संबोधित करते अन्य वक्ताओं ने लगातार चल रहे धरना को समाज के जिंदा होने का प्रमाण बताया जो हर गलत के विरोध को आगे रहता है। धरना में सैकड़ों की संख्या में औरतों के साथ बड़ी संख्या में पुरुषों की भीड़ देर रात तक जमी रही।


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