मधेपुरा : मकर सक्रांति को लेकर शहर में उत्साह का माहौल, दूध और दही की हुई एडवांस बुकिंग

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : स्नान, दान और ध्यान के अनुपम त्यौहार मकर सक्रांति को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। परंपरागत तौर पर पतंगबाजी की भी पूरी तैयारी है। बाजार में खरीददारों की भीड़ जुट रही है। ठंड के कारण 11 जनवरी तक तिलकुट और लाय की मामूली बिक्री ही रही, लेकिन रविवार को बिक्री में तेजी आ गयी। बाकी अंतिम दिन बिक्री होने की उम्मीद जतायी जा रही है। बाजार में दूध और दही का डिमांड भी देखी जा रही है। गुड़ की बिक्री अत्यधिक रही। मूढ़ी का पैकेट और चूड़ा की बिक्री भी देर शाम तक होती रही।

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पतंग की बिक्री में आयी गिरावट : इस वर्ष मकर संक्राति के अवसर पर पतंग की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है। बच्चों में उनके फेवरेट कार्टून कैरेक्टर और बॉलीवुड के हीरो वाली पतंग की भारी डिमांड देखी जा रही है। हालांकि युवा वर्ग में मोदी पतंग की मांग है लेकिन इसमें भी कमी आयी है। बाजार में साधारण पतंग दो रूपये से पंद्रह रूपये में बिक रहा है। बॉलीवुड पतंग की भारी डिमांड है। हालांकि ज्यादा ठंड होने के कारण मकर संक्रांति में बच्चे पतंग उड़ा सकेंगे या नहीं इसे लेकर सशंकित हैं। दुकानदार ब्रजेश कुमार ने बताया कि बच्चों की पसंदीदा पतंग में डोरेमोन, डोरीमी आदि की तस्वीर वाले पतंग शामिल हैं। वहीं शाहरूख खान अब भी बच्चों की पहली पसंद बने हुए हैं।

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कुलदेवता को चढाया जाता है तिल का प्रसाद : मकर संक्रांति का त्योहार हमारी पौराणिक सभ्यता और संस्कृति का द्योतक भी है। इस त्योहार को आम से लेकर खास तक काफी उत्साह से मनाते है। त्योहार के दिन एक तरह से अघोषित छुटटी का दिन होता है। गम्हरिया निवासी गृहिणी कृष्णा देवी ने बताती है की मकर संक्रांति के दिन कुल देवता की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कुलदेवता को तिल प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है। मकर संक्रांति पंचाग के हिसाब से ही मनाया जाना चाहिए। गृहिणी रेश्मा भारती ने बताया कि यह त्योहार स्नान, दान और ध्यान के प्रतीक में मनाया जाता है। इन सब चीजों को करने के लिए बस मन और उत्साह की जरूरत है। गृहिणी पुष्पा राज एवं सुमन कुमारी ने बताया कि मकर संक्रांति कुल देवता की पूजा अर्चना का त्योहार है।

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वसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है मकर संक्राति : मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी काल से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति के आते ही देवताओं की रात समाप्त हो जाती है। उत्तरायण शुरू हो जाता है। इस दिन से ही लोग मलमास के कारण रूके हुए अपने शुभ कार्य शुरू करते हैं। यह मकर संक्राति ही वसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है। इस दिन तिल और गुड़ के बने खाद्य पदार्थ खाने की परंपरा है। तिलकुट और लाई बनाने के लिए तिल, गुड़, चूड़ा, मुढ़ी बाजार में करीब एक माह से ही अपनी जगह बनाये हुए हैं। किराना दुकान हो या चौक-चौराहे, हर जगह इन सामग्रियों की बिक्री हो रही है।

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दूध और दही की हुई एडवांस बुकिंग : मकर संक्रांति के अवसर पर दही खाने की परंपरा है। लेकिन इस बार दूध की कमी लोगों को खल रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित दूध की कमी तो है ही इस कमी को पैकेट के दूध से किया जा रहा है। लोग पहले से ही दूध की बुकिंग करा रहे हैं। ताकि उन्हें ससमय दूध उपलब्ध हो सके। पुरानी बाजार स्थित दूध विक्रेता पंकज कुमार साह ने बताया कि सामान्य दिनों में उनके यहां एक सौ लीटर से डेढ़ सौ लीटर की बिक्री होती थी। विगत दो दिनों से पांच सौ लीटर की बिक्री हो रही है। लोग एडवांस बुकिंग भी करा रहे हैं। दही की भी एडवांस बुकिंग हो चुकी है। केवल उनके यहां ही पांच सौ किलो दही की बुकिंग हो चुकी है।


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