CAA, NRC & NRP के खिलाफ बहुजन क्रांति मोर्चा का विशाल रैली, कहा दम है तो धर्म नहीं DNA आधार पर लागू करे कानून

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : बुधवार को एनआरसी, एनपीआर एवं सीएए जैसे काले कानून के विरोध में बहुजन क्रांति मोर्चा संगठन के बैनर तले अनेकों संगठन एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी समाज के लोगों द्वारा रैली प्रदर्शन  आयोजित किया गया। यह जुलूस जिला मुख्यालय के कॉलेज चौक से निकलकर पुरानी बाजार, मस्जिद चौक, थाना चौक, सुभाष चौक, मुख्य बाजार, पूर्णिया गोला चौक, कर्पूरी चौक होते हुए पूर्वी बाईपास होकर जयपाल पट्टी चौक होते हुए कला भवन परिसर पहुंची। जहां यह विशाल जुलूस सभा में तब्दील हो गई।

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जुलूस में शामिल छात्रों एवं नौजवानों ने एनआरसी सीएए तथा केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर नारे लगाए। सभा समाप्ति के बाद बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति के नाम जिला जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रपति के नाम जिला पदाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में छात्रों के नौजवानों ने कहा कि एनआरसी की सूची में से जिन जिन 17 लाख 20 हजार 933 लोगों को निकाल दिया गया है। उन लोगों को फिर से एनआरसी की सूची में शामिल किया जाए। सीएए कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 का हनन करने वाला कानून है, इसलिए इसको रद्द किया जाए।

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सीएए कानून की वजह से देश में फैल चुकी है अशांति : उन्होंने कहा कि सीएए कानून की वजह से देश में अशांति फैल चुकी है एवं इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेवार है। इसलिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर देश में अशांति फैलाने एवं दो सामाजिक समूह में विवाद निर्माण करने का गुनाह दर्ज किया जाए एवं यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाई जाए। एनआरसी एवं सीएए के विरोध में आंदोलन करने वाले लोगों पर जो झूठी प्राथमिकी दर्ज किए गए हैं, उनके ऊपर से बिना विलंब किए हुए प्राथमिकी हटाई जाए। एनआरसी एवं सीएए के तहत नागरिकता का अधिकार देते समय डीएनए कार्ड जोड़ना चाहिए, ताकि सही व्यक्ति को नागरिकता प्रदान की जाए। अर्थात डीएनए कार्ड के आधार पर ही नागरिकता दिया जाए।

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ईवीएम में घोटाला करके आई हुई सरकार है वर्तमान सरकार  : छात्र एवं नौजवानों ने कहा कि ईवीएम के साथ वीवीपैट लाकर, ईवीएम की वजह से आए हुए चार दोष दुरुस्त करने के लिए सौ प्रतिशत वीवीपैट लगाने का कानून बनाया जाए. वर्तमान सरकार ईवीएम में घोटाला करके आई हुई सरकार है। इसलिए ईवीएम के साथ लगाई गई वीवीपैट की पर्ची की गिनती के संदर्भ में आठ अक्टूबर 2013 का सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट लागू करके, उस संदर्भ में प्रोसिडेंस मानकर सौ प्रतिशत वीवीपैट की गिनती करने का कानून बनाया जाए। चुनाव आयोग को अनियंत्रित अधिकार दिए गए हैं। उनको समाप्त करके उस संदर्भ में स्वतंत्र योजना का निर्माण किया जाए। 10 सालों के लिए राजनीतिक आरक्षण बढ़ाकर एससी एवं एसटी को प्रतिनिधित्व विहीन किया गया है। इसलिए पूना पैक्ट की शर्तों का अमल करते हुए राजनीतिक आरक्षण समाप्त किया जाए एवं राजनीतिक आरक्षण की समीक्षा की जाए। इंटरमेडीएट्री कास्टस निर्माण करके उसमें शामिल जातियों को स्वतंत्र रूप से आरक्षण दिया जाए तथा यह करते समय ओबीसी के आरक्षण को बिल्कुल ही धक्का ना लगाया जाए।

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2021 को होने वाली जनगणना हो जाति आधारित जनगणना : मौके पर उपस्थित नेताओं ने कहा कि 2021 को होने वाली जनगणना में जाति आधारित जनगणना किया जाए एवं उसका रिकॉर्ड डाटा हार्ड कॉपी में रखकर प्रकाशित किया जाए। ताकि जनता इसको देख सके। एनआरसी एवं सीएए में जो नागरिक आते हैं, उनको नागरिकता अधिनियम 1955 एवं विदेशीत्व अधिनियम 1946 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद छह से 11 के अंतर्गत धर्म भेद को ना मानते हुए प्रदान करने सहित अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। मौके पर उपस्थित बहुजन क्रांति मोर्चा के संयोजक बालकृष्ण कुमार ने बताया कि इन संवैधानिक अधिकारों के लिए 3 चरणों में यह कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। जिसमें प्रथम चरण में 20 दिसंबर 2019 को जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। इन्हीं चरणों के अंतर्गत बुधवार को जिला स्तरीय प्रदर्शन रैली का आयोजन किया गया। साथ ही तीसरे चरण में 29 जनवरी को भारत बंद का आयोजन किया जाएगा।

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सभा को द ग्रेट भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष मुन्ना पासवान, बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक बालकृष्ण कुमार, डा सुरेश कुमार, राहुल कुमार पासवान, मो परवेज आलम, अध्यानंद यादव, अमित कुमार, गमगम, मणि शंकर कुमार, मनीष कुमार सहित अन्य लोगों ने सभा को संबोधित किया। मौके पर  सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता  उपस्थित होकर सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर जैसे काले कानून का विरोध किया।


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