मधेपुरा : लोकतंत्र का गीता, बाइबिल और कुरआन है भारतीय संविधान

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आरिफ आलम
वरीय संवाददाता,
चौसा, मधेपुरा

चौसा(मधेपुरा) लोकतंत्र का गीता, बाइबिल और कुरआन है भारतीय संविधान । दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान का गौरव भारत को प्राप्त है। इसमें संपूर्ण जीवन का दर्शन दर्ज है। लिहाजा संविधान के प्रति श्रद्धा हर भारतीय का कर्तव्य है ।

        उक्त बातें स्थानीय महादेव लाल मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक सचिन्द्र पासवान ने कही। वे आज मंगलवार को विद्यालय में आयोजित 70वें संविधान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान विविधता में एकता, अखंडता , सद्भाव का सर्वोत्तम व्यवस्था और व्यवहार सीखाता है।

       वरीय शिक्षक यहिया सिद्दीकी ने कहा कि हमारे राष्ट्र नायकों के लंबे संघर्ष के बाद भारतीय संविधान हमें मिला है। उन्होंने कहा कि यूं तो संविधान सभा में 299 सदस्य थे , लेकिन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का योगदान अतुलनीय था। श्री सिद्दीकी ने बताया कि कुल  114 बैठकों के बाद भारतीय संविधान  2 वर्ष 11 माह 18 दिन में तैयार हुआ ।जिसके 22 भाग 12 अनुसूची तथा 465 अनुच्छेद हैं। अबतक 102 संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित हुए हैं।

            सनद रहे कि भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को पारित तथा 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। तभी से प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। इस निमित्त आज मंगलवार को महादेव लाल मध्य विद्यालय, चौसा में एक समारोह आयोजित कर संविधान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा संविधान की उद्देश्यिका का वाचन कर एकता , अखंडता और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लिया गया। गौरतलब है कि आज ही मद्यपान निषेध दिवस भी है । इस बाबत विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिका और छात्रों सभी प्रकार के नशा का त्याग करने का संकल्प लिया ।

         मौके पर प्रधानाध्यापक सचिन्द्र पासवान, शिक्षक सत्यप्रकाश भारती , यहिया सिद्दीकी , प्रणव कुमार, राजेश कुमार, मंजर इमाम, भालचंद्र मंडल, फैयाज अहमद, शिक्षिका मंजू कुमारी , नुजहत परवीन, श्वेता कुमारी सहित बाल संसद के सदस्यगण तथा छात्रगण उपस्थित थे।

वहीँ दूसरी तरफ संविधान दिवस पर उ0 म0 वि0 बड़की बढ़ौना में कार्यक्रम आयोजित किया गया । प्रधानाध्यापक गौतम कुमार गुप्त ने संविधान के विभिन्न पहलू को विस्तार से बताते हुए कहा कि प्रस्तावना को संविधान का दर्पण, मूल अधिकार हमें सभी अधिकार देती है, तो वहीं मूल कर्तव्य जबावदेही भी तय करती है । हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है जिसमें धर्मनिरपेक्षता, संघीय ढाँचा, संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता, नीति निर्देशक तत्त्व, न्याय प्रणाली जैसी तमाम खूबियाँ हैं ।

शिक्षक मनीष कुमार, लड्डू कुमार शर्मा, बीरेन्द्र कुमार ,कैलाश ऋषिदेव, सोनी शर्मा, कुमारी साधना भारती ने भी अपने उद्गार प्रकट किए । मौके पर छात्रों में विक्रम, प्रकाश, सत्यम, मुन्ना, प्रवीण, मीनू, प्रीति, अंशुप्रिया ने भी संबोधित किया । इसके साथ नशामुक्ति दिवस भी मनाया गया और सबों को जागरूक किया।


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