
उप संपादक
मधेपुरा/बिहार : कोई भी काम करने के लिए सिर्फ उसके अनुरूप उपयुक्त क्षमता की जरूरत नहीं होती बल्कि इसके लिए हौसलों में भी जान होनी चाहिए। अगर साहस हो तो भी फिर क्षमता में कुछ कमी होने के बावजूद भी इंसान बहुत कुछ कर सकता है।
लोग कहते हैं कि यदि भगवान किसी का कुछ छीनता है तो उसे कोई शक्ति जरूर देता है। कुछ इसी प्रकार की शक्ति भगवान ने पूर्णिया जिला के बनमनखी स्थित मगुर्जन वार्ड नंबर 13 निपानिया की इस छात्रा को दी है। रूपम कुमारी नाम की इस छात्रा के दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन पढ़ाई के जुनून में इस छात्रा ने हाथ के स्थान पर पैरों से लिखना सीखकर अपनी दिव्यांगता को पीछे छोड़ दिया है। रूपम कुमारी शुक्रवार को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पीएचडी टेस्ट परीक्षा 2019 की परीक्षा दाएं पैर से लिखकर दे रही थी। शरीर ने रूपम के सामने चुनौती पेश की थी लेकिन उन्होंने इसके आगे हार नहीं मानी और अपने सपनों को नहीं मरने दिया। उसने अपनी शिक्षा जारी रखी। रूपम जन्म से ही अपने पैर के पंजे की मदद से लिखती आ रही हैं।
