अनोखी मिसाल : मिलिए इस शिक्षक से, शाम होते ही जिनका दरवाजा हो जाता है पाठशाला में तब्दील, स्ट्रीट लाइट के नीचे पहली से दसवीं कक्षा तक के बच्चों को देते हैं मुफ्त शिक्षा  

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अमित कुमार
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : गरु की महत्ता को समझाते हुए हर वर्ष भारत वर्ष में पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म के दिन, यानी पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मान्या जाता है। वैसे तो उन शिक्षकों को उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है जो विद्यालय में शिक्षा देते हैं लेकिन आज भी कुछ शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें बच्चों की जिंदगी में तालीम की रौशनी बिखेरने के लिए ना तो विद्यालय, ना हाई फाय सुविधि की दरकार है।

गुरु शिष्य की परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम् और पवित्र हिस्सा है, जिसके कई स्वर्णिम उदाहरण हमारे इतिहास में दर्ज हैं। लेकिन वतर्मान समय में आज हम आपको एक ऐसे शिक्षक से मिलाने जा रहे हैं जिनकी अच्छी सोच, नेकदिली और अनके जज्बे को देख कर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अगर दिली में कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो नामुमकिन कुछ भी नहीं ।

हम बात कर रहे हैं मधेपुरा के एक ऐसी शख्सियत की, जो किसी सरकारी या प्राइवेट स्कूल में नहीं, बल्कि स्ट्रीट लाइट में बच्चों को पढ़ाते हैं। इनका स्कूल भी सुबह सात बजे नहीं, बल्कि शाम को सात बजे लगता है और एक ही कक्षा में आपको पहली से दसवीं तक के विद्यार्थी मिल जाएंगे।

पहली से दसवीं कक्षा तक आते है बच्चें
शहर के वार्ड न 25 निवासी शिक्षक अमन कुमार अमर पिछले दस वर्षों से अपने दरवाजे पर सड़क किनारे लगे हाई मास्क लाइट के नीचे बच्चों को पढ़ाते है। यहां पहली कक्षा से दसवीं तक के बच्चें पढ़ने आते है और प्रतिदिन शाम को सात बजे से नौ बजे तक स्ट्रीट लाइट के नीचे अमन की पाठशाला लगती है। यहां बगैर किसी भेदभाव के सभी वर्ग के बच्चें अक्षर ज्ञान हासिल करने पहुंच जाते है। अमन भी सभी बच्चों को कठिन से कठिन पाठ आसान तरीके से हल करने की विधि बताते है।

मिल रही है बिजली, करने लगे सदुपयोग
अपने इस सफर के बारे में शिक्षक अमन कुमार ने बताया कि सात बच्चे से शुरू होकर आज ये पचास बच्चों तक का सफर चल रहा है। अपनी इच्छा के बारे में बताते हुए कहा कि मेरी तो चाहत है पुरे इलाके के बच्चे आये वो पढ़े और अपनी मंजिल को पाए। रोड लाइट के नीचे पढ़ाने के पीछे की कहानी के बारे में उन्होंने बताया कि आज बिहार तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में मधेपुरा जैसे शहर को भी बीस से बाईस घंटे बिजली मिल पाती है। शाम के समय यह स्ट्रीट लाइट इस दरवाजे पर भरपुर रौशनी फैलाती है। आसपास में सभी के घरों में बच्चों को स्टडी के लिए जगह व टयूटर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यह स्ट्रीट लाइट पाठशाला लगनशील बच्चों को बेहतर उड़ान भरने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों से भी हमेशा बच्चों को कक्षा में भेजने के लिए संपर्क करता रहता हूं।

स्ट्रीट लाइट कर रही है राह आसान
सरकार द्वारा लगाये गये स्ट्रीट लाइट से राहगीरों को अपनी मंजिल तक के सफर में सुविधा हो रही है। वही यह लाइट क्षेत्र के नौनिहालों को भी आगे बढ़ने व बेहतर भविष्य निर्माण में मददगार साबित हो रही है। शिक्षक अमन बताते है कि आज भी लालटेन डिबिया में स्थानीय कई बच्चें पढ़ते है। उन्होंने कहा जब बिजली की आपूर्ति शहर में उतनी अच्छी नही थी तब वो भी लालटेन की रौशनी में बच्चों को पढ़ाते थे।

बिजली गुल होने पर जेनरल नॉलेज व इंग्लिश स्पीकिंग की लगती है कक्षा
बच्चों को स्ट्रीट लाइट में पढ़ाने के दौरान जब लाइट कट जाती है तो अमन भी तत्काल पढ़ाई का तरीका बदल देते है। उन्होंने बताया कि पावर कट के बाद भी बच्चें की पढाई रूकती नही है। इस दौरान बच्चों से सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे जाते है. छोटे बच्चे से गिनती, पहाड़ा, व इंग्लिश स्पीकिंग का अभ्यास कराया जाता है। पुनः लाइट आ जाती है तो फिर पढ़ाई पूर्वव्रत जारी रहती है।

हाई स्कूल बड़गांव में शिक्षक हैं अमन
शिक्षक अमन कुमार अमर मधेपुरा वार्ड न 25 के स्थानीय निवासी है। पिता जनार्दन तांती फौजी थे। प्राथमिक शिक्षा जिला मुख्यालय से प्राप्त करते हुए इन्होने 12 वी की शिक्षा पार्वती विज्ञान महाविद्यालय से लिया। आगे स्नातक की पढाई इन्होने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के शिक्षण संस्थान में दाखिला लिया था। स्नातक में इन्होने बॉटनी को लेकर पढ़ाई किया। इस बीच तैयारी के लिए ये लखनऊ भी गये। जहां इन्होने मेडिकल के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी की है।

बच्चों में देख रहे है बालमन के सपने
शिक्षक अमन बताते है कि उनका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था। लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से मेडिकल में सफल नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि उसी दिन ये प्रण लिया था की अपने स्तर से जितना हो पाएगा मैं बच्चों के लिए मदद करूगां। उनके भविष्य निर्माण में आर्थिक तंगी कभी आरे नहीं आयेगी। तैयारी के दौरान लखनऊ में उन्होंने देखा था कि एक प्रदीप कुमार पाण्डेय नामक शिक्षक प्रतिदिन ऐसे ही बच्चों को पढ़ाते है। वहां से देखकर शिक्षक अमन को और भी बल मिला और आज रोड लाइट के नीचे बच्चों को पढ़ाकर छोटे घर से बड़े सपने देखने और पूरा करने में मदद कर रहे है।

बिना सहयोग चल रही है पाठशाला
स्थानीय ग्रामीण से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया ये शिक्षक ही असली शिक्षक है। जहां न जात न धर्म न रूपये पैसे की बाध्यता है। उन्होंने कहा मेरे चार बच्चे यहां पढ़ते है। लगता है नही कि मेरा बच्चा किसी से कम है। पैसा कितना लेते है सर तो बताया कोई बाध्यता नही है।


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