मुरलीगंज/मधेपुरा : मुरलीगंज प्रखंड को अनुमंडल का दर्जा देने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर क्षेत्रवासियों ने एक बार फिर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित एक ज्ञापन स्थानीय विधायक निरंजन कुमार मेहता के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें मुरलीगंज को अनुमंडल बनाने की मांग दोहराई गई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मुरलीगंज को अनुमंडल बनाने की मांग पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल से ही की जाती रही है। इस मुद्दे पर समय-समय पर सर्वदलीय धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि मुरलीगंज एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां जूट, मक्का, गेहूं सहित विभिन्न कृषि उत्पादों का बड़े पैमाने पर व्यापार होता है। यहां से सरकार को पर्याप्त राजस्व की प्राप्ति होती है, बावजूद इसके प्रशासनिक सुविधाओं के लिए लोगों को मधेपुरा अनुमंडल पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि किसी भी सरकारी कार्य के लिए किसानों को खेती, मजदूरों को मजदूरी और व्यवसायियों को अपना कारोबार छोड़कर मधेपुरा जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की क्षति होती है। साथ ही मुरलीगंज का भौगोलिक क्षेत्रफल भी व्यापक है, जिससे स्थानीय स्तर पर अनुमंडल की आवश्यकता और अधिक महसूस की जा रही है।
ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व जिला परिषद सदस्य रामजी प्रसाद साह, नपं उपमुख्य पार्षद श्याम आनंद, चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव बाबा दिनेश मिश्र, जदयू प्रदेश महासचिव रूपेश कुमार गुलटेन, भाजपा नगर अध्यक्ष सूरज जायसवाल, हेल्पलाइन अध्यक्ष संजय सुमन तथा जनसुराज जिला सचिव राजीव कुमार शामिल थे। सभी ने मुख्यमंत्री से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी चिरलंबित मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार कर मुरलीगंज को अनुमंडल का दर्जा प्रदान करेगी, जिससे प्रशासनिक सुविधा बढ़ेगी और आम जनता को राहत मिलेगी।
मिथिलेश कुमार की रिपोर्ट

