BNMU : बीएड ऑन स्पॉट मामले में जांच टीम पर सख्ती के बजाय संशोधन, बड़ी साजिश- राठौर

728x90
Spread the news

मधेपुरा/बिहार : BNMU दस दिन में रिपोर्ट देने की जगह एक साल में भी रिपोर्ट नहीं दे पाने वाली जांच टीम को कटघरे में लाने के बजाय अध्यक्ष और सदस्य सचिव को बाहर कर दो सदस्यों को जिम्मेदारी देकर 31 मार्च तक रिपोर्ट देने के अधिसूचना जारी होने पर एआईएसएफ AISF बीएनएमयू BNMU ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे पीड़ित छात्रों के साथ न्याय की जगह उसका मजाक उड़ाना  और दोषियों को संरक्षण देना बताया।

 संगठन के बीएनएमयू BNMU प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि यह सरासर पीड़ित छात्रों के साथ अन्याय ही नहीं बल्कि जांच को बड़े स्तर पर प्रभावित कर गोलमाल करने की साजिश है। पहले वाली जांच टीम काफी हद तक जांच प्रक्रिया पूरी कर चुकी थी लेकिन उसमें कई बड़े पदाधिकारियों की गर्दन फंस रही थी जिसके कारण कई पदाधिकारियों के दबाव में जांच रिपोर्ट जारी करने में लगातार विलंब हुआ, अब जब कि संगठन इसको लेकर आक्रमक हुआ है तब सदस्यों का फेर बदल कर पूरी जांच रिपोर्ट को ही प्रभावित करने की चाल चली जा रही है। छात्र नेता राठौर ने कहा कि यह अपने आप में अजीबोगरीब मामला है, विषम हालात में किसी भी कमिटी में सदस्य को हटाने व जोड़ने की परम्परा रही है लेकिन अध्यक्ष व सचिव को आखिरी समय में हटाने का यह पहला मामला है। यह सरासर मनमानी और सिंडिकेट का दुरुपयोग है। संगठन अन्य सदस्यों को जोड़ने का विरोध नहीं करता लेकिन सदस्य व अध्यक्ष को हटाने व 31 मार्च तक का समय देने को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। इसपर अविलंब कुलपति संज्ञान ले यह मांग संगठन करता है।

राठौर ने कहा कि जांच टीम को कटघरे में लाने व सख्ती बरतते हुए अविलंब रिपोर्ट जमा करने के आदेश देने के बजाय अप्रत्याशित संशोधन व सेम डेट को सूची जारी करने के बजाय लगभग एक माह बाद विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षा शास्त्र विभाग के शिक्षकों की सूची जारी कर सिंडिकेट से अनुमोदन लेना बताता है कि पैसों की उगाही व दोषियों को बचाने के लिए सिंडिकेट का दुरुपयोग किया जा रहा है जो उच्च सदन की मर्यादा का हनन है। क्योंकि जहां ऑन स्पॉट एडमिशन में जमकर रोस्टर की अनदेखी, सीट से ज्यादा नामांकन हुआ, वहीं शिक्षकों की बहाली सूची जारी करने में एक माह विलंब कर पैसों की खूब उगाही की गई। संगठन इससे जुड़े कई बिंदुओं को लगातार उजागर करता रहा लेकिन विश्वविद्यालय ने करवाई की जगह मौन रह मानों इसे स्वीकार करने का काम किया है।

एआईएसएफ नेता राठौर ने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक व्यवस्था व सिंडिकेट व सीनेट रूपी उच्च सदन का सम्मान करता है उसकी बैठकों में किसी प्रकार की बाधा एआईएसएफ नहीं बनेगा लेकिन बैठक में उक्त बिंदुओं पर पहल नहीं होने पर बैठक के बाद आंदोलन को आक्रमक रूप देगा।

मो० नियाज अहमद
ब्यूरो, मधेपुरा

Spread the news

कोई जवाब दें

कृपया अपना जवाब दीजिये।
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें