“शिक्षा बचाओ-देश बचाओ” अभियान के तहत एनएसयूआई का विशाल विरोध प्रदर्शन

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मधेपुरा/बिहार : शनिवार को एनएसयूआई के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष निशांत यादव के नेतृत्व में जिला मुख्यालय स्थित बस स्टैंड से भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय परिसर तक पैदल मार्च कर सरकार के छात्र एवं युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्षण किया. प्रदर्शन के दौरान शहर एनएसयूआई के झंडों से पटा रहा. एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जमकर सरकार के नीतियों के खिलाफ नारेबाजी किया. विश्वविद्यालय परिसर में जाकर यह पैदल मार्च सभा में तब्दील हो गई. विश्वविद्यालय परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय के समीप एकत्रित हुए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार उर्फ चुन्नू सिंह ने कहा कि सरकार छात्र एवं युवा के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. शिक्षा का निजीकरण एवं बाजारीकरण कर, शिक्षा से देश के कमजोड़ वर्गों को वंचित कर देना चाहती है. यही कारण है कि सरकार नई शिक्षा नीति 2020 चोर दरवाजे से लेकर आई है.

तमाम सरकारी कंपनियों को निगलने के बाद भी भूख नहीं हुई है कम : एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार उर्फ चुन्नू सिंह ने कहा कि “शिक्षा बचाओ देश बचाओ” अभियान चलाकर, एनएसयूआई देश भर के तमाम छात्र एवं युवाओं को आंदोलन के लिये गोलबंद कर रहा है. मौके पर उपस्थित एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रवि कुमार ने कहा कि बिहार में विश्वविद्यालय लूट एवं भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. पठन-पाठन के अलावे सब हो रहा है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को छात्र एवं युवाओं के भविष्य की कोई परवाह नहीं है. पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे एनएसयूआई जिलाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि “शिक्षा बचाओ देश बचाओ” एक आंदोलन है. यह आंदोलन सरकार के तानाशाही, मनमानी, छात्र एवं युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ है. यह चरणबद्ध रूप से जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि तमाम सरकारी कंपनियों को निगलने के बाद भी पूंजीवादी समर्थित सरकार की भूख कम नहीं हुई है. वो अब शिक्षण संस्थानों को निगलने के लिये बेताब है. जिसे इस देश के छात्र एवं युवा कभी पूरा नहीं होने देंगे.

सरकार से जो जवाब मांगते हैं तो जवाब में उन्हें देते हैं लाठियां : जिलाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल छात्र जॉइनिंग के इंतजार में है. एसटीईटी के सफल अभ्यर्थी जब जॉइनिंग की मांग पर सरकार से जवाब मांगते हैं तो सरकार जवाब में उन्हें लाठियां देते हैं. यह सरकार अंग्रेजी हुकूमत से भी क्रूर एवं तानाशाह है. इन्हें सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

पैदल मार्च में एनएसयूआई छात्रनेता नीतीश यादव, जितेंद्र कुमार, नवीन कुमार, रौशन राज, प्रिंश कुमार, ई सज्जन यादव, ब्रजनंदन कुमार, लालमोहन कुमार, रविरंजन, रमन कुमार, आशीष कुमार, अजय कुमार, कौशल ,प्रभाष, रामविलाश, कृष्णा राज, प्रवीण भारती, रोबिन, बेचन, लोचन, छोटू, राजेश, विनीत, गुड्डू, अभिषेक, गौरव, शशि, मिथलेश, चंदन, सोनू, रितिक, विक्रम, धीरज, मनोज, मनीष, सुमित, पंकज, मणिकांत, जीतू, अभिषेक कुमार, राजेश, अशोक, पवन, ओमप्रकाश, सियाराम, श्रवण, गणेश, रंजीत कुमार, ब्रजेश, पिंकू, प्रिंश, नितेश, साहेब उड़व, बमबम, शरद, ओमप्रकाश, राजेश, रंजीत, शंकर, अशोक, मनीष, संतोष, राजा, दिलखुश, कुंदन, रैवेन, सौरव, मणिकांत समेत सैकडों छात्र मौजूद थे.

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

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