बीएड को जानबूझकर उलझा रहा बीएनएमयू, फीस बढ़ाने की जगह अधिग्रहण पर दे ध्यान-राठौर

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मधेपुरा/बिहार : बीएनएमयू में न्यायालय के आदेश के आलोक में बीएड व एम एड के शिक्षकों द्वारा वेतन की मांग को ढाल बना फीस बढ़ाने की विश्वविद्यालय की साजिश पर वाम छात्र संगठन एआईएसएफ ने कड़ी आपत्ति जताई है, और इसे आपदा में अवसर करार दिया है।

उक्त बातें संगठन के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य सह बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कही। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशानुसार वेतन देने की शिक्षकों की मांग का एआईएसएफ समर्थन करती है लेकिन फीस बढ़ाने का नहीं। वर्तमान फीस में ही जब कोर्ट के आदेश का पालन सम्भव है तो फिर बढ़ाने की जरूरत कैसे आन पड़ी? उन्होंने कहा कि सरकार ने कई बार पत्र लिखकर बीएड अधिग्रहण की पहल शुरू करने की मांग की थी, इसको लेकर संगठन ने कई बार मांग की, कुलपति के स्तर से आश्वाशन के बाद भी पहल शुरू नहीं की गई। एआईएसएफ की मांग पर पहल शुरू करने में पटना विश्वविद्यालय में शुरू करवाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रो बलराम तिवारी ने भी हर संभव सहयोग की बात कही थी। अधिग्रहण होने से जहां वेतन से जुड़ी समस्या नहीं रहेगी वहीं छात्रों को न्यूनतम शुल्क देना होगा।

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राठौर ने साफ शब्दों में कहा कि संगठन किसी कीमत पर फीस वृद्धि को स्वीकार नहीं करेगा। वहीं उन्होंने कहा कि नो प्रॉफिट नो लोस पर चलने वाले बीएड में छात्रों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी है जिसका समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि बीएड में कई समस्याएं हैं उसके समाधान की जगह फीस बढ़ाने की नीति तैयार करना हास्यास्पद है। उन्होंने कुलपति से मांग किया कि बीएड से जुड़े विभिन्न समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।

मो० नियाज अहमद
ब्यूरो, मधेपुरा

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