मधेपुरा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य शाखा प्रबंधक पर कई संगीन आरोप, कोर्ट पहुंचा मामला

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टीआरटी डेस्क : मधेपुरा/बिहार : मधेपुरा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य शाखा प्रबंधक पर लोन लिमिट बढ़ाने के नाम पर एक लाख रुपये ठगी करने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में पीड़ित द्वारा जिला पदाधिकारी और जिला के एलडीएम के साथ साथ डी आई जी सहरसा, रिजनल मैनेजर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पूर्णियाँ, बैंक के प्रबंधक संचालक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मुंबई, बिहार के मुख्यमंत्री, केन्द्रीय वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री को लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई गई है।   

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सेंट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक के कारनामें की फेहरिस्त में ओर भी कई कड़ी जुड़ी हुई है जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे।पहला मामला लोन स्वीकृत के नाम पर एक लाख रुपये ठगी का है जबकि दूसरा मामला भी ऋणी द्वारा बैंक लोन खत्म कर नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेने के बाद भी जमीन का मूल केवाला जो ऋणी ने लोन लेते समय बैंक में बतौर गिरवी रखा था, उसे भी वापस करने के नाम पर शाखा प्रबंधक द्वारा 5 हजार रुपये  की रिश्वत तलब करने का है। इस मामले में भी जिले के वरीय पदाधिकारी को पीड़ित द्वारा लिखित शिकायत की गई है। शाखा प्रबंधक के कारनामों की इंतहा सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती है बल्कि अपने ही बैंक में पिछले तीस साल से दफ्तरी के पद पर डेली भत्ता पर कार्यरत कर्मी भी शाखा प्रबंधक के जुल्म व सितम के शिकार हैं। 25 रुपये की देहारी से बैंक में डेली भत्ता पर काम शुरू करने वाले कर्मी को शाखा प्रबंधक ने बिना किसी वजह से कोरोनाकाल के दौरान ही उम्र के उस पड़ाव पर नौकरी से निकाल बाहर कर दिया है जिसके बाद इस दौर में उसके लिए दूसरी जगह नौकरी मिलना बहुत कठिन है, जिससे हताश और परेशान कर्मी ने लोक शिकायत निवारण के साथ साथ न्यायालय का भी दरवाजा खटखटा कर न्याय की भीख मांगी है। 

आइए बारी बारी से  आपको बैंक के शाखा प्रबंधक आकाश कुमार के कारनामे के बारे तफ़सील से बताता हूँ —

पहला मामला मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित मुरहो मार्केट में प्रिंटिंग प्रेस संचालक मो शाहबाज से जुड़ा है जिसका कहना है कि कोरोना काल में लगतार 6 सात माह तक काम धंधा बंद होने के कारण व्यवसाय में भारी क्षति होने से उसकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल खराब हो गई, इसलिए उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य शाखा प्रबंधक आकाश कुमार साह से अपने सीसी लोन खाता का लिमिट बढ़ाने की गुजारिश की, जिसपर शाखा प्रबंधक द्वारा उसे लिमिट बढ़ाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन कुछ दिन बाद यानि 25 जनवरी को शाखा प्रबंधक ने उससे कहा कि आपके लोन का लिमिट नहीं बढ़ सकता है क्योंकि आपका सीबील खराब है। पीड़ित व्यवसाई का आरोप है कि खराब सीबील को नजर अंदाज कर दस लाख का लिमिट बढ़ाने के एवज में दस परसेंट के हिसाब से एक लाख रुपये का डिमांड शाखा प्रबंधक आकाश कुमार द्वारा उनसे किया गया। जिसके बाद बड़ी मुश्किल से उसने अपने जान पहचान के लोग से एक लाख रुपये बतौर कर्ज लेकर मैनेजर को दिया। रिश्वत की रकम लेने के बावजूद उसे बैंक का चक्कर बार-बार लगाना पड़ता था जिस पर उसने शाखा प्रबंधक से कहा कि आपका डिमांड भी पूरा कर दिया फिर भी आप मुझसे बैंक का चक्कर लगवा रहे हैं। बस इसी बात पर शाखा प्रबंधक को गुस्सा आ गया और फिर उन्होंने ना सिर्फ लिमिट बढ़ाने से इनकार कर दिया बल्कि एक लाख रुपये जो शाहबाज ने किसी से ब्याज पर लेकर शाखा प्रबंधक को बतौर घुस दिया था उसे भी वापस करने से कतराने लगे। शाखा प्रबंधक का रवैया देख कर  शाहबाज घबरा गया और उसके सामने गिडगिडाने लगा  तो शाखा प्रबंधक ने कहा कि ठीक है चिंता मत करो तुम्हारा पैसा लौटा देंगे।

पीड़ित व्यवसायी ने कहा कि मुझे शाखा प्रबंधक की नियत ठीक नहीं लगी तो मैंने 4 फरवरी 2021 को उनके विरुद्ध सेंट्रल बैंक के रिजनल मैनजर से लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई, जिसकी प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी और जिला के एलडीएम, के साथ साथ डी आई जी सहरसा, बैंक के प्रबंधक संचालक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मुंबई, बिहार के मुख्यमंत्री, केन्द्रीय वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री को भी ईमेल के जरिए भेज दिया, लेकिन कारवाई नहीं होता देख कर 10 फरवरी को लोक शिकायत निवारण का शरण लिया। पुनः 17 तारीख रिजनल मैनेजर पूर्णिया लिखित तौर पर फिर से गुहार लगाई, जिसके बाद 23 फरवरी को शाखा प्रबंधक के कहने पर शहर के बड़े-बड़े बिजनेस मैन के अलावा अज्ञात लोगों से उसे डराया धमाका जाने लगा। पीड़ित व्यवसाई ने कहा जिस तरह से मुझे डराया धमकाया जा रहा है उससे मैं मानसिक रूप से काफी परेशान हूँ और जिस प्रकार मुझे डराया धमकाया जा रहा है अगर मेरे साथ कोई घटना घटती है तो उसके जिम्मेदार शाखा प्रबंधक होंगे।

 वहीं दूसरा मामला मधेपुरा सदर प्रखण्ड के मधुबन पंचायत निवासी जनार्दन प्रसाद से जुड़ा हैं, उनका आरोप है कि उन्होंने अपने हिस्से की जमीन गिरवी रख कर सेंट्रल बैंक से एक ट्रेक्टर लोन पर लिया था जिसका सारा भुगतान वर्ष 2012 में ही कर बैंक से नो ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया, लेकिन कुछ कारणवश वह बैंक से अपनी जमीन का मूल केवाला नहीं ले पाए। दिसंबर माह में जब जनार्दन यादव अपनी जमीन का केवाला लेने बैंक पहुंचे तो शाखा प्रबंधक आकाश कुमार द्वारा यह कह कर उसे वापस कर दिया गया कि इस केवाला में आपके भाइयों का नाम है, उन्हें भी बैंक लेकर आना होगा उन सभी का हस्ताक्षर लेने के बाद ही आपको केवाला मिलेगा, जिसपर जनार्दन यादव ने कहा कि लोन मैंने अपने हिस्से की जमीन पर लिया है अपने भाइयों के हिस्से की जमीन पर मैंने लोन नहीं लिया, और लोन देते समय सिर्फ मेरा और मेरे दो बेटों का हस्ताक्षर लिया गया था मेरे भाइयों का नहीं, तो फिर लोन चुकता करने के बाद अपने भाइयों को मैं यहाँ क्यों लाऊँ? इसके बाद शाखा प्रबंधक ने कहा कि ठीक है आप अपना वंशावली मुझे दीजिए। दूसरे दिन जनार्दन यादव ने शाखा प्रबंधक के पास वंशावली भी जमा कर दिया। बावजूद इसके जनार्दन यादव को जमीन का केवाला लौटाया नहीं जा रहा था। रोज कोई न कोई बहाना बनाकर बैंक से लौटा दिया जाता रहा। तंग आकार जनार्दन यादव ने इस मामले में जिला पदाधिकारी और मधेपुरा के एलड़ी एम से लिखित शिकायत कर बताया है कि जमीन का केवाला वापस करने के एवज में पाँच हजार का रिश्वत का डिमांड शाखा प्रबंधक द्वारा किया गया है। 

अब तीसरा मामला सैंट्रल बैंक में पिछले 30 साल से डेली भत्ता पर काम करने वाले राजेन्द्र प्रसाद मण्डल से जुड़ा है। इस मामले में पीड़ित कर्मी राजेन्द्र मण्डल ने भी जिला पदाधिकारी मधेपुरा के आलावा मधेपुरा न्यायालय और  लोक शिकायत निवारण, मधेपुरा में लिखित शिकायत दर्ज कर सेंट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक आकाश कुमार पर  आरोप लगया है कि शाखा प्रबंधक द्वारा लॉक डाउन के दौरान बहाना बनाकर बिना किसी कारण से उसे नौकरी से हटा कर उसकी जगह पर दूसरे को रख लिया गया है।इतना ही नहीं शाखा प्रबंधक को जब मालूम हुआ कि कर्मी राजेन्द्र मण्डल उसके खिलाफ न्यायालय जाने वाला है तो शाखा प्रबंधक आकाश कुमार और उसी बैंक के फील्ड ऑफिसर अमित कुमार, मधेपुरा सदर प्रखण्ड के  मठाई बाजार स्थित उसकी दुकान पर आ धमके और दुकान में मौजूद कर्मी के भांजे को धमकाते हुए पूछा कि तुम्हारा मामा कहा है। जिसपर उसने कहा कि घर पर होंगे, जिसके बाद शाखा प्रबंधक और फील्ड ऑफिसर भान टेकठी स्थित राजेन्द्र मण्डल के आवास पर पहुँच गए और उनकी पत्नी को धमकाते हुए कहा कि तुम्हारा पति औकात से बाहर जा रहा है उसको समझा लो वरना पूरे परिवार को जेल भेजवा देंगे। अपने बैंक के एक कर्मी के खिलाफ एक शाखा प्रबंधक के ऐसे शब्द और रवैया देख कर कर्मी कि पत्नी ने एतराज जताया तो शाखा प्रबंधक ने उसकी पत्नी को भी अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर गंदी गंदी गाली देकर वहाँ से निकल गए।

        उक्त बाबत जब सेंट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक आकाश कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं कैमरे के सामने कुछ नहीं बोलूँगा लेकिन मैंने इस मामले में जो स्पष्टीकरण अपने विभाग को भेजा है उसका फ़ोटो आप ले लें और जब स्पष्टीकरण की कॉपी का वीडियो बनाना शुरू किया गया तो उसे भी शाखा प्रबंधक ने हटा लिया, हालांकि उन्होंने ऑफ कैमरा अपने ऊपर लगे सभी आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए सभी के आरोप को सिरे खारिज करते हुए कहा सभी झूठ बोल रहे हैं।

बहरहाल झूठा कौन है और सच्चा कौन यह तो निष्पक्ष जांच के बाद पता चलेगा । सवाल मौजूं है कि   क्या सभी लोग झूठे हैं और शाखा प्रबंधक ईमानदार हैं या शाखा प्रबंधक झूठ बोल रहे हैं ? यह तो जांच का विषय है, लेकिन सवाल तो यह भी उठता है विभाग से लेकर हाईलेबल तक पत्राचार के बावजूद इन मामलों में जांच की कार्रवाई की सुगबुहाट दूर-दूर तक होता नहीं दिख रहा है तो क्या यह मान लिया जाए कि बैंक के वरीय पदाधिकारी किसी प्रलोभन में आकार अपने शाखा प्रबंधक को बचाने में लगे हैं या इन तीनों पीड़ित लोगों की शिकायत पर ईमानदारी पूर्वक जांच करवाकर दोषी पर कारवाई की जाएगी या नहीं यह तो आने वाला समय ही बतलाएगा, लेकिन फिलहाल शाखा प्रबंधक आकाश कुमार के एक से बढ़ कर एक कारनामे ने सेंट्रल बैंक की शाख को धूमिल करके रख दिया है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता ।


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