मधेपुरा : उत्साह के साथ मना क्रिसमस का जश्न

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : क्रिसमस के अवसर पर जिला मुख्यालय में उत्सव का माहौल रहा. शहर के मिशन अस्पताल समेत कई स्कूलों में प्रभु ईशा मसीह के जन्म दिन पर प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ. शुक्रवार की सुबह नौ बजे से ईसाई धर्मावलंबियों की भीड़ चर्च में उमड़ने लगी थी. मिशन परिसर स्थित बीआईसी चर्च में युवतियों ने गीत गाकर प्रभु की स्तुति किया. ईसा मसीह के जन्म की खुशी सबके चेहरे पर छलक रही थी. क्रिसमस त्योहार को लेकर ईसाई धर्मावलंबियों में खासा उत्साह दिखा. अगल बगल के इलाकों से अहले सुबह ही ईसाई धर्मावलंबियों का जत्था चर्च परिसर में जमा होने लगे. सर्व प्रथम पास्टर रघु मुर्मू के अगुवाई में प्रार्थना की गयी. इस अवसर पर रघु मुर्मू ने कहा कि प्रभु ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उन्होंने एकलौता पुत्र प्रभु ईशु मसीह को दे दिया. जो उन पर विश्वास करें, उनका नाश न हो, अनंत जीवन पाये.  त्योहार को लेकर पूरे दिन चर्च परिसर में ईसाई धर्मावलंबियों का तांता लगा रहा.

प्रेम का संदेश ले कर आये थे यीशू : शुक्रवार को क्रिसमस त्योहार पर आयोजित विशेष प्रार्थना सभा के दौरान पास्टर रघु मुर्मू ने चर्च में उपस्थित जन समुदाय को बताया कि परमेश्वर ने अपना इकलौते पुत्र को मनुष्य तन धारण कर लोगों को दुख, दर्द, पाप से मुक्ति दिलाने और प्रेम के संदेश को लेकर हजारों वर्ष पूर्व दुनिया में भेजा था. नबियों की भविष्यवाणी के मुताबिक प्रभु यीशू का जन्म कुंवारी मरियम के गर्भ से होगा. यीशू के पिता पवित्र आत्मा होंगे. पवित्र बाइबिल का संदेश सुनाते हुए पास्टर रघु मुर्मू ने प्रेम शब्द को जीवन में उतारने की जरूरत बताते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही. उन्होंने कहा कि प्रभु यीशू ने लोगों को आपस में प्रेम एवं सद्भावना का संदेश दिया है. सुबह नौ बजे से 11 बजे तक चर्च में क्रिसमस की अराधना हुई. पास्टर रघु मुर्मू ने बताया कि क्रिसमस शब्द का जन्म क्राइस्टेस माइसे अथवा क्राइस्टस मास शब्द से हुआ, माना जाता है. प्रार्थना सभा के दौरान ईसा मसीह के जीवन से संबंधित प्रवचन सुनाये गये. वहीं प्रार्थना सभा के बाद सभी लोग एक दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी.

नहीं की गई कैंडल जलाने सहित कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम : प्रभु यीशु के जन्म दिवस क्रिसमस पर इस वर्ष चर्च में सार्वजनिक आयोजन नहीं किया गया. कोरोना संक्रमण के कारण कार्यक्रमों में ज्यादा लोग एक साथ शामिल न हों इसका भी ध्यान रखा गया. प्रभु यीशु के आगमन को लेकर ईसाई समुदाय द्वारा विशेष तैयारी की गई थी. मिशन अस्पताल परिसर स्थित घरों में विशेष साज सज्जा की गई थी. प्रभु यीशु के जन्म को दर्शाते हुए घरों में चरनी बनाई गई थी. साथ ही घर में क्रिस्मस ट्री को विशेष रुप से सजाया गया था. हर घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा गये थे. पास्टर रघु मुर्मू ने बताया कि बीआईसी रीजनल कमेटी के निर्णय के अनुसार क्रिसमस पर कोई भी सार्वजनिक आयोजन नहीं किया गया. कोरोना संंक्रमण के निर्देशों का पालन करते हुए कुछ कार्यक्रम किए गए, लेकिन इसमें बाहरी व्यक्तियों को शामिल होने की पाबंदी रही. साथ ही इस वर्ष कैंडल जलाने सहित कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं की गई.

अन्य वर्षों की भांति प्रवेश करने पर लगी रोक : कोरोना संक्रमण को लेकर धार्मिक आयोजन भी काफी प्रभावित हुआ है. क्रिसमस के दिन जहां जिला मुख्यालय स्थित बीआईसी चर्च में भीड़ होती थी, प्रभु यीशु मसीह की प्रतिमा के समक्ष कैंडल जलाने के लिए मारामारी की स्थिति रहती थी. वहीं इस बार कोरोना संक्रमण के कारण बीआईसी चर्च में सन्नाटा रहा. सरकारी गाइडलाइन के अनुसार चर्च में सीमित संख्या में ही लोगों को प्रवेश दिया गया. प्राथना सभा के लिए सिर्फ ईसाई धर्मावलंबियों की ही चर्च में प्रवेश दिया गया अन्य लोगों को चर्च में प्रवेश से रोक लगा दिया गया. चर्च के मुख्य द्वार पर बाहर से ताला लगा दिया गया. चर्च में पहले भारी भीड़ उमड़ती थी. सुबह से देर रात तक लोग आते रहते थे. मेला सा नजारा होता था. वहीं इस बार सूना-सूना सा नजारा रहा.

जल्द से जल्द खत्म हो कोरोना संक्रमण एवं खुले शैक्षणिक संस्थान : क्रिसमस डे को लेकर जिला मुख्यालय स्थित चर्च में प्रार्थना सभा से पहले, प्रार्थना सभा के दौरान एवं प्रार्थना सभा के बाद कोरोना संक्रमण के निर्देशों का पालन किया जा रहा था. प्रार्थना के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन किया गया. साथ ही प्रार्थना सभा के बाद कैंडल जलाने की अनुमति नहीं दी गई. वहीं लोगों ने एक दूसरे को दूर से ही बधाई दी. पास्टर रघु मुर्मू ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार लोगों को हाथ मिलाकर बधाई देने की अनुमति नहीं थी. प्रार्थना सभा के दौरान पास्टर रघु मुर्मू सहित सभी लोगों ने कोरोना संक्रमण जल्द से जल्द समाप्त हो, इसके लिए प्रार्थना की. साथ ही नववर्ष में विद्यालय, महाविद्यालय समिति सभी शैक्षणिक संस्थान अच्छे ढंग से खुले इसके लिए भी प्रार्थना की गई. पास्टर रघु मुर्मू ने बताया कि कोरोना संक्रमण का ऐसा भी समय रहा, जब लोग अपने लोगों से भी मिलने से कतराते थे. घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी, लोग अपने घरों में बंद रहते थे. ऐसे समय में भी स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मी एवं सफाई कर्मी ने अपना कर्तव्य निभाया, ऐसे लोगों के लिए हमेशा स्वस्थ रहने की प्रार्थना की गई.


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