सहरसा : कृषि बिल के खिलाफ प्रतिरोध मार्च

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प्रेस विज्ञप्ति

सहरसा/बिहार : राजद जिला अध्यक्ष मोo ताहीर के अध्यक्षता में चले सभा को सम्बोधित करते हुए सीपीआई के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य ओमप्रकाश नारायण ने कहा भारत की सरकार तरह -रह की जन विरोधी बिल लाकर देश के आम जन को तंग और तबाह कर दिया है, तीनो कृषि बिल लाकर किसानो के साथ अन्याय किया है । बिहार राज्य किसान सभा के प्रांतीय सचिव कामरेड रणधीर यादव ने कहा कि भारत की सरकार कॉर्पोरेट परस्त एवं किसान विरोधी सरकार है, तीनो कृषि काला बिल लाकर कृषि प्रधान राष्ट्र में किसानो के साथ धोखा किया है, पुरे देश के किसान अठारह दिनो से आन्दोलनरत है, कड़ाके  की ठंड में लाखो लाख किसान बीबी बच्चे के साथ दिल्ली के चारो तरफ सड़को पर अपनी मांगे के समर्थन में है, दर्जनो किसान कड़ाके की ठंड में आन्दोलन के दौरान शहीद हो गऐ लेकिन मोदी सरकार किसानो की नही सुन कर देश के साथ धोखा एव जुल्म कर रही है ।

वक्ताओ ने कहा भारत की सरकार किसान संगठनो के नेताओ के साथ सम्मान जनक समझौता नही किए एव तीनों किसान विरोधी काले कानून वापस नही लिए तो सहरसा में भी गांव गांव किसानो को गोलबंद कर दिल्ली की तहत सहरसा आनेवाली सभी रास्ते को जाम करेंगे। बिहार राज्य किसान सभा के जिला अध्यक्ष गणेश प्रसाद सुमन, जिला मंत्री ह्रदयनारायण यादव, सीपीएम के किसान नेता रमेश यादव, व्यास प्रसाद यादव, मोo सकील, बद्री नारायण मंडल, माखन साह, जनवादी नौजवान सभा के नेता कुलानन्द यादव, कृष्णदयाल यादव, रामकान्त राय, केशव मेहता, रामचन्द महतो, डोमी पासवान, विघानंद यादव, ब्रजेश महतो, राजद के पूर्व विधायक अरूण यादव ने कहा देश का अन्नदाता किसान सड़को पर है और बेशर्मी सरकार एक भी वात नही सुनती है।

 सभा को माले के जिला मंत्री ललन यादव, विक्की राम, कुन्दन यादव, वकील कुमार यादव, सीपीआई के परमानन्द ठाकुर, विजय यादव, चन्द्र शेखर ठाकुर, शंकर कुमार, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विघानंद मिश्र, रामसागर पाण्डे, राजद के मनोज यादव, मनमोहन यादव, मन्टु यादव, प्रो गीता यादव, गुंजन यादव, रामनाथ यादव, शंकर कुमार, शशि लाल यादव, सत्यनारायण यादव, किसान नेता नंदकिशोर यादव ने भी सभा को संबोधित किया।

 सभा के उपरान्त सहरसा स्टेडियम से समाहरणालय मुख्यालय होते अम्बेदकर चौक तक विशाल प्रतिरोध मार्च निकाला प्रदर्शनकारी मोदी सरकार मुर्दाबाद, कृषि काले कानून वापस लो, किसान नेता से अभिलम्ब वार्ता करो आदि गगनचुंबी नारे लगा रहे थे।  अंत में किसान नेताओ के नेतृत्व में मागो से संबंधित मांग-पत्र जिला पदाधिकारी को सौंपा गया।  


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