कोरोना काल में दाने-दाने को मोहताज हैं सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के कर्मचारी

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सिंहेश्वर मंदिर के तीन कर्मचारी को 30 महीने से नहीं मिला है वेतन » अनलॉक चार में मंदिर खुलने पर अब जबरन काटी जा रही है उपस्थिति  

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : कोरोना संकट के दौर में बिहार के सुप्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति का कर्मचारी भी दाने-दाने को मोहताज हो जाये यह सुनकर सभी को आश्चर्य होगा, लेकिन ऐसा हुआ है। इस कोरोना काल में सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति में वर्षो से कार्यरत तीन कर्मचारियों को 30 महीना से वेतन नहीं मिला है, इन कर्मचारियों के सामने भुखमरी की स्थिति उतपन्न हो गई है, जबकि उच्चतम न्यायालय के अलावा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में लोगों से संवाद करते वक्त संस्थानों से ये अपील की थी कि वो किसी कर्मचारी को ना निकालें, उनके पेट पर लात मत मारे, लेकिन आज सिंहेश्वर मंदिर में सिर्फ उच्चतम न्यायालय के न्यायदेश का ही नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील की धज्जियां उड़ायी गई है। इन परिवारों की जिंदगी पर ग्रहण लगाने का काम किया गया है।  दरसल सिंहेश्वर मंदिर के कर्मचारी लव कुमार, नीरज कुमार एवं दिलीप कुमार ने न्यास समिति के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला व सचिव सह सदर अनुमंडल पदाधिकारी नीरज कुमार को आवेदन समर्पित कर अपनी व्यथा सुनाई। कर्मियों ने कहा कि सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति सिंहेश्वर के द्वारा हमें न्यास समिति में न्यास की बैठक आठ जून 2015 के प्रस्ताव संख्या 11 के आलोक में मासिक वेतन साढ़े चार हजार रुपए के साथ अनुसेवक के पद पर बहाली की गई। इसका अनुमोदन भी पर्षद से मिल गया, इसके बावजूद 30 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है।

न्यास समिति के निर्णय से सचिव ने कर्मियों को दिया था नियुक्त पत्र : न्यास कर्मियों ने अध्यक्ष व सचिव को दिए आवेदन में कहा है कि 15 जुलाई 2015 को अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के निर्देश के आलोक में हमारा योगदान सिंहेश्वर मंदिर न्यास कार्यालय में लिया गया। इसकी सूचना न्यास अध्यक्ष, न्यास के सभी सदस्यों एवं न्यास कर्मचारियों को भी दी गई थी, वे पूरी ईमानदारी एवं सच्चे श्रद्धा से मंदिर में सेवा कर रहे हैं,  इससे पहले कर्मियों को बैंक के माध्यम से  खाता में वेतन भी दिया गया, इसके बाद अचानक से बिना कारण बताए मार्च. 2018 से अब तक वेतन रुका हुआ है, इससे हम कर्मियों के परिवार का  दैनिक जीवन अस्त व्यस्त हो गया है और कोरोना काल में भुखमरी की स्थिति उतपन्न हो गयी है। वर्षों न्यास में नौकरी करने के बाद अब हम कर्मियों के सामने न्यास में कार्य करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, हमलोगों का परिवार आज दाने-दाने को मोहताज है।

नाजीर सह प्रभारी प्रबंधक ने हाजरी बनाने से कर्मियों को जबरन रोका : कर्मियों ने कहा कि लॉकडाउन में मंदिर लगातार बंद रही और ऑनलॉक चार में जब 22 सितंबर को मंदिर खोला गया तो हमें उपस्थिति पंजी पर उपस्थिति बनाने से कार्यालय में नाजीर सह प्रभारी प्रबंधक द्वरा जबरन रोका जा रहा है, जबकी उपस्थिति नहीं बनाने का कोई लिखित आदेश ना तो पार्षद ने और ना ही न्यास समिति ने दिया है। मौके पर कर्मियों ने किये गए कार्य का वेतन भुगतान करने और उपस्थिति पंजी पर उपस्थिति बनाने देने की मांग की।

बताया जा रहा है कि 2018 में तत्कालीन समिति के द्वारा बैठक में निर्णय लिया गया था, कि गलत तरीके से बहाल कर्मीयों की जांच कर उन्हें कार्य मुक्त कर दिया जाय, लेकिन निर्णय के विपरीत न्यास समिति में गलत तरीके से मौखिक बहाल कर्मियों से कार्य लिया जा रहा है और जिन कर्मियों को न्यास के निर्णय से नियुक्ति पत्र दिया गया है, उन्हें उपस्थिति पंजी पर मौखिक ही रोक दिया गया है।

न्यास समिति में जिसकी लाठी उसकी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ : एक कोरोना वायरस ने किसी को बीमार किया, तो किसी को मार डाला, लेकिन इसी वायरस की वजह बेबसी में नौकरी करने वाले न्यास के कर्मचारी दाने-दाने को मोहताज कर दिया है। वो कहते हैं न जब पेट पर लात पड़ती है तो इंसान कहीं का नहीं रहता है, एक तो कोरोना ने हर किसी को बेबस कर दिया है, वहीं नौकरी छिन जाने के कारण इन कर्मियों का परिवार लाचारी का शिकार बन बैठा है। बताया जाता है कि सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के निर्णयानुसार सचिव को यह जांच करना था कि कर्मियों की नियुक्ति न्यास समिति के निर्णय के आलोक में कई गई है या नहीं, साथ ही नियुक्ति को बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद ने अनुमोदित किया की नहीं, लेकिन इस तीन वर्ष में न्यास समिति के तीन-तीन सचिव और अध्यक्ष बदल गये, लेकिन आज तक कर्मियों की नियुक्ति से संबंधित जांच नहीं हो सकी है। न्यास समिति में जिसकी लाठी उसकी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ है, न्यास में जिन कर्मियों की नियुक्ति, ना न्यास समिति और ना ही न्यास पर्षद से हुई है, वे बेधड़क न्यास हित के विरुद्ध कार्य कर, बेहिसाब मोटी पगार उठा रहे हैं।  आलम यह है कि एक ही परिवार के कई लोग गलत तरह से न्यास में कार्य कर रहे हैं। हालांकि जांच में यह तय हो जायेगा की किनकी नियुक्ति विधिवत की गई है और कौन अवैध रुप से न्यास में कार्यरत है।

इस बाबत पूछे जाने पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति सिंहेश्वर, नीरज कुमार, ने बताया कि कर्मियों की नियुक्ति से संबंधित संचिका उपस्थित करने का निर्देश नाजीर को दिया गया है, संचिका का अवलोकन कर इसे न्यास समिति की बैठक रखा जायेगा, विचारोपरांत न्यास समिति न्याय संगत निर्णय लेगी।


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