सुपौल-सरायगढ़ एवं आसनपुर- राघोपुर के बीच रेल परिचालन का हुआ शुभारंभ

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सिकंदर आलम की रिपोर्ट :

राघोपुर/सुपौल/बिहार : अमान परिवर्तन के बाद सरायगढ़-राघोपुर  रेलखंड पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से  रेल परिचलन का शुभारंभ किया।  दोपहर 12 बजे मोदी ने इस खंड के रेल को हरी झंडी दिखाया। जिसके साथ ही सुपौल स्टेशन से डीएमयू ट्रेन संख्या 55505/55506 सरायगढ़ स्टेशन के लिए प्रस्थान किया।

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दोपहर 1 बजे सरायगढ़ स्टेशन पर निर्मली विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, जदयू नेता शशि प्रसाद सिंह, मो नूर आलम आदि ने रेल के आगमन पर रेल का स्वागत किया। हालांकि सरायगढ़ से दोपहर  करीब सवा दो बजे ट्रेन आसनपुर  कुपहा के लिए प्रस्थान किया। जहाँ पहुंच कर पुनः सरायगढ़ स्टेशन के लिए प्रस्थान किया तथा सरायगढ़ स्टेशन से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर पहलीबार राघोपुर स्टेशन के लिए प्रस्थान किया और करीब 4 बजे राघोपुर स्टेशन पर ट्रेन का आगमन हुआ।

राघोपुर राघोपुर स्टेशन पर डीएमयू ट्रेन के आगमन पर जदयू प्रखंड अध्यक्ष कमल प्रसाद यादव  के नेतृत्व में जिला परिषद सदस्य पूनम देवी, नरेंद्र यादव, मो नूर आलम मनोज यादव, गोपाल चाँद,शशी  सिंह आदि जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता ने रेल  के चालक दल को माला पहनाकर कर स्वागत किया।

मालूम हो कि बीते 22 जून को नवनिर्मित कोसी रेल महासेतु पर पहली बार ट्रेन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। लगभग 1.9 किमी लंबे इस नए कोसी  ब्रिज सहित 22 किमी लंबे नवनिर्मित निर्मली -सरायगढ़ रेल खंड का निर्माण  के लिए वर्ष 2003-04 में 323 . 41 करोड रुपए की लागत से स्वीकृत किया गया था। इसके बाद 6 जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इस रेल मार्ग का शिलान्यास किया था। भारत-नेपाल सीमा के सामरिक दृष्टि से कोसी महासेतु काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इस योजना को कोविड-19 महामारी के दौरान अंतिम रूप दिया गया और इसके साथ ही मिथलांचल एवं सीमांचल को एक करने का कोसी क्षेत्र के लोगों का 86 वर्ष पुराना सपना साकार हो गया।  इसके साथ ही सहरसा -आसनपुर डीएमयू ट्रेन का परिचालन सुपौल स्टेशन से शुभारंभ किया गया।

रेल परिचालन प्रारंभ हो जाने के बाद सुपौल-सहरसा जिले के लोगों को काफी लाभ होगा । इस क्षेत्र के लोगों को कलकत्ता, दिल्ली, मुंबई आदि लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा करना आसान हो जाएगा। सहरसा-आसनपुर रेलखंड की कुल लंबाई 64 किलोमीटर है, इसमें सहरसा से सुपौल 26 किलोमीटर ट्रेन का परिचालन पूर्व से हो रहा है। कोसी रेक महासेतु  बन जाने सुपौल से आसनपुर ट्रेन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस परियोजना पर 516 करोड की लागत आई है। हलाकि  अमान परिवर्तन के तहत फारबिसगंज -सहरसा रेलखंड में आज तक सहरसा -राघोपुर स्टेशन के बीच रेल परिचालन सम्भव नहीं हो पाया है । अब भी इस खंड पर राघोपुर से फारबिसगंज के बीच अमान परिवर्तन के अंतर्गत रेल परिचालन होना अभी भी बाकि है।  


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