मधेपुरा : कोरोना महामारी में छात्रों की समस्या पर सरकार मौन क्यों – अभाविप

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार :  कोविड-19 की भयंकर महामारी की आर में बिहार सरकार ने चोरी-छिपे एसटीइटी की परीक्षा को रद्द कर छात्रों के रोजगार से जुड़ने के विकल्प को ही बंद कर दिया है। शायद उनकी यह सोच है कि छात्र उनके इस निर्णय पर चुप्पी साध लेंगे एवं वह छात्रों के रोजगार के अवसर को कब्र में दफ़न कर देगी।

उक्त बातें रविवार को जिला मुख्यालय के कॉलेज चौक स्थित अभाविप कार्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह मंत्री अभिषेक यादव ने प्रेस वार्ता के दौरान कही। श्री यादव कहा कि इस अहंकारी सरकार को अब बिहार के नौनिहाल छात्रों के भविष्य की भी चिंता नहीं रही है, इनके नाक के नीचे ही जिले में नौनिहाल छात्रों के अभिभावकों से प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा कोविड-19 जैसे महामारी की प्रलयकारी समस्या में भी उन्हें धमका कर जबरन मासिक शुल्क वसूला जा रहा है. । यह दृश्य पुरे बिहार की है लेकिन सत्तासीन मुकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अभाविप छात्रों की समस्यायों एवं उन्हें शैक्षणिक रोजगार से जोड़ने के लिये हमेशा ही सरकार, सत्ता एवं व्यवस्था में बैठे लोगों के आंखों पर से अंहकार की पट्टी हटाकर उसकी समस्यायों के समाधान के लिए बाध्य करते आ रही है और आगे भी करती रहेगी।

 वहीं विश्वविद्यालय प्रमुख रंजन यादव ने कहा कि छात्र राजनीति से ही निकले सत्ता एवं विपक्ष के राजनेता पता नहीं क्यों किसान एवं मजदूर के बच्चों की पढ़ाई में रूकावटें ला रही है। समस्याओं के समाधान तो दूर, चर्चा के लिये चंद आवाज़ नहीं निकाल रही है, जिसके कारण बिहार के छात्र आज कमरे का किराया समेत अन्य शैक्षणिक शुल्क की समस्या के कारण पढ़ाई-लिखाई छोड़ने पर मजबूर हैं। जिला संयोजक शशि यादव ने कहा की आज छात्रों की समस्यायों से भले सत्ताधारी सरकार, विपक्ष के नेता एवं अन्य छात्र संगठन चुप्पी साध बैठे हैं लेकिन हम अभाविप कार्यकर्ता इस महामारी के समय में भी अपने सेवा कार्य करते हुये सजग प्रहरी की तरह सोसल डिस्टेंस का पालन करते हुये 23 मई 2020 से ही आंदोलन का आगाज कर चरणबद्ध आंदोलन करते आ रहे हैं।

 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शामिक्षा यदुवंशी व आमोद आनंद ने कहा की आंदोलनों से घबराकर सरकार ने आनन-फानन में एसटीइटी की रद्द परीक्षा को तीन माह के अंदर लेने की घोषणा तो कर दी है, जिसका अभाविप स्वागत करती है, लेकिन संभावित भ्रष्टाचार की संभावनाओं का विरोध भी करती है। जिला संगठन मंत्री उपेंद्र कुमार भरत, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नीतीश कुमार यादव एवं नगर सह मंत्री विश्वजीत पीयूष ने कहा कि विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय, छात्रावास आदि सभी किसी न किसी समस्याया से घिरे हुए हैं, छात्र त्राहिमाम कर रहे हैं, अभिभावक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, इस परिस्थिति में आखिर सरकार मौन क्यों हैं?


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