मां अगर घर की धुरी है तो पिता समग्र चक्र

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    पिता शब्द जेहन में आते ही तस्वीर बनने लगती है एक ऐसे फ़रिश्ते की जिसके हांथ की लकीर बिगड़ जाती है अपनी सन्तान की किस्मत को खूबसूरत बनाने में। देवता हैं या नहीं इसपर विवाद हो सकता है, लेकिन पिता देवता के पर्यायवाची हैं, इसमें कोई शक नहीं हो सकता। पिता पूर्णतः सूर्य की भांति है जिसके चारों ओर जितनी गरमी होती है उसके समीप उतनी ही अधिक ठंडक। समस्त दुनिया में पिता ही एक ऐसे होते हैं, जिनकी हरपल ईमानदाराना चाहत होती है कि उनकी संतान हमेशा उनसे आगे जाए।

छोटे से शिक्षक किसान परिवार से ताल्लुक रखने के बाद भी आज वक्तृता, उद्घोषणा, साहित्य सृजन, छात्र राजनीति सहित अन्य क्षेत्रों में प्रांतीय, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर जो बड़े मुकाम व सम्मान  मिले वो पिता द्वारा मिले लगातार सहयोग, शिक्षा व संस्कार का ही फल है। उनकी जिंदगी में उतार चढ़ाव परेशानियां आई लेकिन उसका असर उन्होंने कभी मेरे बढ़ते कदम पर नहीं पड़ने दिया। अब समझ में आता है अपने जिंदगी में जो मेरे सपने थे, उसे पूरा करने का रास्ता कोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा। पापा की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने मुझे कभी झुकना नहीं सिखाया। एक शिक्षक के साथ वो एक किसान हैं, लेकिन इस समान्य से माहौल में उन्होंने जो असाधारण परवरिस दी वो बड़े कद वालों के लिए भी आसान नहीं होता। सच्चे अर्थों में मेरे पिता मेरे हीरो हैं, जिन्होंने कभी अपने सपने मूझपर नहीं थोपे बल्कि हरपल मेरे अपने सपने को पूरा करने में अपना सहयोग दिया । उनके कहे वाक्य हरपल मुझे भटकने से रोकते है कि “तुम जो पसंद करते हो वहीं करो लेकिन याद रहे ऐसा कुछ न करो जिससे मेरा सर झुके।”

ऐसे पिता बहुत कम मिलते हैं जो अपने बच्चों के सपनो में खुद के सपने देखते हैं। मुझे फख्र है कि मेरे पिता ऐसे हैं। मेरे पिता मेरे मान, सम्मान के साथ मेरी पहचान हैं। मां अगर घर की धुरी है तो पिता समग्र चक्र जिसपर परिवार का भार रहता है। अपनी खुशी को पीछे रख परिवार की खुशी में खुद की खुशी तलाशने की कला उन्हें खास बनाती है।

दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उनके कहे वाक्य कि “छात्र को फिल्में देखनी चाहिए और मनोरंजन भी करना चाहिए लेकिन हाल से बाहर सिर्फ प्रेरक चीजें ही लेकर निकलनी चाहिए।” उनके दूरदर्शी सोच को दिखाता है। रिश्तों के संगम होते हैं पिता दोस्त, भाई, अभिभावक सबकुछ होते हैं पिता। जब सामने कोई परेशानी हो तो उसके सामने खड़े होते हैं पिता। जब से समझ बनी तब से पापा को समझने का मौका मिला। लेकिन खुद पिता बनकर उन्हें और बेहतर तरीके से समझ पा रहा हूं। जब अपने बेटे को हरपल खुशियां देने के लिए कई कुर्बानी देता हूं तब दिल से अहसास होता है कि मेरी जिंदगी में पापा की भी यही भूमिका रही होगी। मेरे लिए पिता के सम्बन्ध में कोई एक दिन कभी खास नहीं हो सकता वो हर दिन, हर पल मेरे लिए खास हैं।

क्योंकि उन्होंने मेरे लिए किसी एक दिन को नहीं बल्कि हर दिन को खास बनाया। वो बच्चे बड़े भाग्यवान होते हैं जिन्हें भटकाव के समय पिता की दांत रास्ता दिखाने के लिए मिलती है जो मुझे भी मिली। हमेशा यह कोशिश रहेगी कि मेरी जिंदगी में जो पापा की भूमिका है, वहीं मैं अपने युवराज की जिंदगी में दे सकूं। शायद किसी ने ठीक ही कहा कि…….

पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है

पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है

पिता है तो सारे सपने हैं

पिता है तो बाजार के सारे खिलौने अपने हैं

फादर्स डे की सबों को बधाई 

लेखक-हर्ष वर्धन सिंह राठौर


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