मधेपुरा : कोरोना संक्रमण का भय, फसल की कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : लॉक डाउन का असर केवल जनजीवन पर ही नहीं बल्कि खेतीबाड़ी पर हुई है। वर्तमान में रबी फसल की कटाई शुरू हो चुकी रहती है। लेकिन कोरोना संक्रमण के भय से मजदूर अपने घरों से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। वहीं जिन किसानों के फसल की कटाई हो चुकी है। उन्हें बाजार तक पहुंचाने के लिए भी काफी परेशानियां सामने आ रही हैं। जिस वजह से अन्नदाता परेशान हैं। लॉक डाउन की वजह से किसानों को उनके अनाज की खरीद करने वाले व्यापारी तक नहीं मिल रहें हैं। वहीं अनाज मंडी बंद होने की वजह से किसान अपनी फसलों को मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेत में तैयार फसल बर्बाद हो रहे है। पूरे साल तक अपनी मेहनत की कमाई एवं अपने खून पसीने बहाने वाला किसान आज अपनी बदहाली पर रोने को मजबूर है।

कोरोना वायरस फैलने के डर से घर से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं मजदूर : जिले में किसानों के खेत में लगी गेहूं की फसल पककर तैयार है। लेकिन कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देश में घोषित लॉक डाउन के कारण गेहूं कटाई के लिए सर्वाधिक मजदूर घर से नहीं निकल रहे हैं। कटाई नहीं होने के कारण अब गेहूं की फसल खेत में जमीन पर गिरकर खराब होने लगी है। इसे देख किसान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर गेहूं की कटाई नहीं हुई एवं बारिश हो गई तो खेत में ही गेहूं सड़-गल जाएगा। किसानों ने कहा कि कोरोना वायरस फैलने के डर से मजदूर घर से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। गेहूं कटाई के लिए पहले अगल-बगल गांव के मजदूर भी एक दूसरे गांव जाया करते थे। लेकिन वो सब भी लॉक डाउन के कारण इस बार दूसरे गांव डर के मारे नहीं जा रहे हैं।

शोषण का शिकार हो रहे किसान भूखे मरने को हैं मजबूर : कोरोना महामारी से पूरे विश्व में त्राहिमाम है। इस वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लगाए गए लॉक डाउन से जिले कि खेती पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। मजदूरों के आभाव में खेतों में तैयार फसल सूख रही है। हालांकि अब किसानों को अपने फसलों की कटाई करने की अनुमति दे दी गई है। लेकिन लॉक डाउन की वजह से अब किसानों का ही शोषण होने लगा है। किसानों को उनके अनाज की खरीद करने वाले व्यापारी तक नहीं मिल रहें हैं। किसानों का कहना है कि व्यापारी किसानों को पांच सौ रुपए प्रति क्विंटल अनाज बेचने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में अपनी पूंजी लगाकर खेती करने वाले किसान आज शोषण का शिकार हो रहे हैं। फसल की कटाई, ढ़ुलाई एवं थ्रेशिंग करने में किसानों को अलग से पैसा खर्च करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में लागत मूल्य तक नहीं निकल पा रही है। कई किसान भूखे मरने को मजबूर हैं।

किसानों को  कर्ज चुकाना हो जाएगा मुश्किल : किसानों का कहना है कि ऐसी स्थिति में साल भर परिवार को चलाना एवं जिनसे कर्ज लेकर खेती किए थे उनको कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, छोटे किसान तो अपने से गेहूं की कटाई किसी तरह से कर रहे हैं, लेकिन जो मध्यम एवं बड़े किसान हैं, मोटी रकम कर्ज लेकर खेती किए हैं। उन्हें सबसे अधिक परेशानी हो रही है। हालांकि गेहूं कटाई पर सरकार द्वारा रोक हटा लिया गया है एवं किसान को स्पष्ट आदेश दे दिया गया है कि सोशल डिस्टेंस बनाकर गेहूं काट सकते हैं। किसानों का कहना है कि अभी रवि फसल कटाई का समय चल रहा है। इस समय यह गेहूं की कटाई के साथ-साथ प्याज, दलहन मक्का एवं कई तरह के साग-सब्जियों के तैयार होने का समय है। सुविधा के अभाव में खेत में तैयार फसल बर्बाद हो रहे हैं।


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