इंसानियत का जज़्बा : एक अजनबी शहर अकेला ही चल पड़ा, इंसानों के साथ जानवरों की मदद को

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वसीम अख्तर
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना के चपेट में है और लगातार इससे जूझ रही है । अन्य देशों की तरह भारत में भी 21 दिनों का लॉक डाउन चल रहा है । हालाँकि इसके वजह से हर तबके को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है । निम्न वर्ग जो कि अपने दैनिक आमदनी पर पूर्णतः निर्भर है, उनके लिए ये सबसे चुनौतीपूर्ण समय है और इसके साथ साथ लावारिस जानवरों के लिए भी यह लॉक डाउन काफी समस्या का विषय बन चुका है । जहाँ काफी लोग समाज में मदद के लिए आगे आ रहे हैं तथा उनकी हरसंभव सहायता भी कर रहे हैं ।

वहीं दूसरी ओर मधेपुरा जिला मुख्यालय केवार्ड नं 10 निवासीकाज़ी जमीलउर रहमान के सुपुत्र मो. आसिफ इंसानों के साथ जानवरों की भी मदद कर है ।

मो. आसिफ ने प्रारंभिक शिक्षा मधेपुरा से प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से की है और वर्तमान में Quikr बंगलौर में मैनेजर पोस्ट पर कार्यरत है । आसिफ ख़ुद इस आपदा में अपने शहर से दूर हैं फिर भी अपने शहर और बिहार के कई जिलों में राहतकार्य में हाथ बँटा रहे हैं । साथ ही साथ बैंगलोर में अकेले ही जरूरतमंदो की तथा लावारिस जानवरों की यथासंभव मदद कर रहे हैं । उनका यह मानना है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में एक दूसरे की मदद कर के ही हम इस विपदा से निपट सकते हैं ।


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