मधेपुरा : शहर को बीमार न कर दे जहां-तहां फैला कचरा, शहरवासी परेशान, नींद में नगर परिषद, कैसे होगा शहर स्वच्छ

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : विद्यालय का नाम सुनते ही शिक्षा का मंदिर नजर आता है। विद्यालय में बच्चों को शिक्षित करने के अलावा उनके साफ सफाई विशेष ध्यान देने की बात की जाती है। स्वच्छ सामाज के लिये एवं स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाता है। सरकार शिक्षा को आगे बढाने के लिये विभिन्न योजनाएं चला रही है। बड़े बड़े भवनों का निर्माण किया जा रहा है। कई विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरूआत कर दी गयी है। लेकिन जिला मुख्यालय के भिरखी वार्ड नंबर 21 स्थित आदर्श मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को किसी यातना से कम नहीं है। इस स्कूल में स्थानीय मुहल्ले के अलावा दूर दूर से बच्चे पढ़ने को आते हैं। स्कूल के ठीक मुख्य द्वार पर टूटा नाला एवं खुला नाला एक बड़े हादसे को चुनौती दे रही है। वहीं एनएच 107 की जर्जरता से बच्चों का तो वैसे घुटन सी होती है। हालांकि सड़क का निर्माण मंथर गति से किया जा रहा है।

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अधिकारियों को बच्चों की नहीं है चिंता : विद्यालय के आगे से गुजरना भी बड़ा मुश्किल होता है। यहां नाले में शहर का गंदा पानी खुले में बहता है। स्कूल के मुख्य द्वारा पर ही खुले एवं गंदे पानी का बहना एक बड़ी बीमारी को दावत दे रही है। स्थानीय लोगों की माने तो कई बच्चे इस खुले नाले से उठने वाले गंदगी से संक्रमित बीमारी के चपेट में आये हैं। इस बाबत स्कूल के प्रतिनिधि एवं प्रधान को इसकी फिक्र है। वहीं इस विद्यालय के आगे से रोजाना जिला प्रशासन एवं नगर परिषद के अधिकारी गुजरते हैं। लेकिन उन्हें बच्चों के शिक्षा से मतलब तो दूर बच्चों पर रहम तक नहीं आता है। समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जायेंगे। लोगों ने बताया कि सरकारी विद्यालय में हम गरीब के बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों के बीमार होने के बाद काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

खुले नाले होने के कारण गंदगी से बच्चों को परेशानी : विद्यालय के मुख्य द्वार की जितनी चौड़ाई उससे भी कम उसके रास्ते की चौड़ाई है। रास्ते के दोनों साइड खुला नाला है और जिसकी गहराई भी अधिक है. बच्चों के स्कूल आने के समय एवं जाने समय भीड़ अधिक होती है। जिससे बच्चों का पांव फिसलकर गिरने का डर बना रहता है। लेकिन बच्चों के जान से किसी को भी कोई मतलब नहीं है। वहीं विद्यालय के आगे खुले नाले होने के कारण गंदगी इतनी रहती है कि लोग वहीं मूत्र त्याग करते है. जिसके कारण विद्यालय में प्रवेश करने वाले बच्चों को नाक पर रूमाल लेकर प्रवेश करना पड़ता है। साथ ही नाले से ठीक सटे ही वर्ग का भी संचालन होता है। जितनी देर तक बच्चे वर्ग में रहते हैं उतनी देर तक उन्हें यातनाएं झेलनी पड़ती है।

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गंदगी से होकर छात्र गुजरने को हैं विवश : ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ एक विद्यालय की स्थिति हैं। अमुनन शहर के सभी विद्यालय की स्थिति ऐसी है कि उन्हें विद्यालय में प्रवेश करने से पहले गंदगियों के दुर्गंध से गुजरना पड़ता है। जिला मुख्यालय के मुख्य बाजार स्थित शिवनंदन प्रसाद मंडल इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय एवं इसी परिसर में स्थित बीपी मंडल अभियंत्रण महाविद्यालय में प्रवेश करने से पहले छात्र छात्राओं को मलमूत्र के दुर्गंध से गुजरना पड़ता है। इस परिसर के मुख्य द्वार पर ही मूत्रालय बना हुआ है। जिसका वर्षोँ से सफाई नहीं हुआ है। स्थानीय दुकानदारों एवं आम लोगों द्वारा मूत्र त्याग करते है। जहां बच्चे शर्म से इस होकर गुजरने को विवश है।

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शांति आदर्श मध्य विद्यालय के मुख्य द्वार गंदगी, बीमारी की आशंका : जिला मुख्यालय के कॉलेज चौक स्थित शांति आदर्श मध्य विद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थानीय लोगों द्वारा कचरा फेंका जाता है। कचरे के बगल से एवं कचरे के उपर से रोजाना सुबह सुबह बच्चों को गुजरना पड़ता है। जिसके कारण बच्चे गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते है। हालांकि कचरा उठाव होता है. लेकिन तबतक बहुत देर हो जाती हैं। कचरा उठाव से पूर्व बच्चों को सड़‍े गले कचरे से उठने वाले दुर्गंध से गुजरना पड़ता है। लेकिन इस बात की चिंता न तो नगर परिषद को है और न ही स्थानीय लोगों को हैं।


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